अधिक प्यास लगने के 60 घरेलु उपचार | Adhik Pyas Lagne ka Desi ilaj

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अधिक प्यास लगने के 60 घरेलु उपचार | Adhik Pyas Lagne ka Desi ilaj

बार बार प्यास लगने के कारण व उपचार

इस रोग में व्यक्ति को बहुत अधिक प्यास लगती है। रोगी व्यक्ति जितना भी पानी पीता है उसे ऐसा लगता है कि उसने बहुत ही कम पानी पिया है और वह बार-बार पानी पीता रहता है| कुछ स्त्री-पुरुष बार-बार पानी में बर्फ डालकर ठंडा पानी पीते हैं, लेकिन उनकी प्यास इस पर भी शांत नहीं होती है। आइये जाने तृषा रोग(बार बार प्यास लगना) के सरल देसी घरेलु उपचारों के बारे में |

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अधिक प्यास लगने के कारण : Adhik Pyas Lagne ka karan

उपवास, धातुक्षय, मद्यपान, शोक, क्रोध, भय, परिश्रम, अग्निताप, अजीर्ण, आघात लगना, पित्तवर्धक पदार्थो का सेवन, दो दाल, कुल्थी आदि खाने पर तथा ज्वर (बुखार) के कारण भी प्यास अधिक लगती है।

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अधिक प्यास लगने के आयुर्वेदिक उपाय: Bar Bar Pyas Lagne ke Gharelu Upchar

  1. नीलोफर : नीलोफर के फूल 20 ग्राम को 200 मिलीलीटर पानी में 2 घंटे भिगोने के बाद पानी छानकर थोड़ा-थोड़ा करके दिन में 3 से 4 बार पीयें। इससे अधिक बोलने या गाने के बाद गला सूखने से लगने वाली प्यास खत्म होती है तथा गला सूखता नहीं है।

  2. गिलोय : गिलोय का रस 6 से 10 मिलीलीटर की मात्रा में दिन में कई बार देने से प्यास शांत हो जाती है।

  3. पान : पान खाने से प्यास कम लगती हैं।

  4. प्याज : प्यास अधिक लगने पर प्याज, पोदीना और मिश्री को मिलाकर घोटकर पिलाने से प्यास में लाभ होता है।

  5. पीपल : पीपल की छाल को जलाकर पानी में डाल दें। जब राख नीचे बैठ जाये तो उस पानी को छानकर पिलाने से तेज प्यास शांत हो जाती है।

  6. (Pipal vriksh )पीपल का चूर्ण बनाकर खाकर ऊपर से पानी पीने से अधिक प्यास का लगना बंद हो जाता है।

  7. पीपल के ताजे छिलके का रस लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग या सूखे पत्तों का काढ़ा बना लें। लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग काढ़ा में 5 से 10 ग्राम चीनी मिलाकर दिन में 3 बार लेने से प्यास का अधिक लगना बंद हो जाता है।

  8. प्यास अधिक लगने पर पानी पीते-पीते पेट फूल जाने पर पीपल का काढ़ा बनाकर पीने से उल्टी होकर आराम हो जाता है।

  9. पानी : गर्म पानी में नमक मिलाकर पीने से खुश्की की प्यास ठीक हो जाती है।

  10. संतरा : प्यास अधिक लगने पर नारंगी के सेवन से प्यास कम होती है।                
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  11. सोंठ : सोंठ (सूखी अदरक), जीरा और संचर नमक इन सबको बराबर मात्रा लेकर पीसकर छानकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को पानी के साथ खाने से कफज तृष्णा प्यास शांत हो जाती है।

  12. Sonth सोंठ और जवाखार को मिलाकर कूटकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को गर्म पानी के साथ खाने से बदले हुए प्यास का असर मिट जाता है।

  13. सोंठ, पित्तपापड़ा, नागरमोथा, खस, लालचंदन, सुगन्धबाला इन सबको बराबर मात्रा में लेकर बने काढ़े को थोड़ा-थोड़ा पीने से बुखार तथा प्यास शांत होती है। यह उस रोगी को देना चाहिए जिसे बुखार में बार-बार प्यास लगती है।

  14. सौंफ : 25 ग्राम सौंफ को 250 मिलीलीटर पानी में भिगोकर रखें। 1 घंटे बाद भिगोये हुए पानी को छानकर 1-1 घूंट पीने से तीव्र (तेज) प्यास मिटती है।

  15. पित्त ज्वर (बुखार), कफबुखार और मलेरिया बुखार में अधिक प्यास लगने पर बार-बार पानी पीने पर भी प्यास न बुझती हो और शरीर के भीतर गर्मी और जलन हो रही हो तो सौंफ को पानी में भिगोकर पीने से प्यास और बुखार की जलन मिटती है और घबराहट जल्द दूर होती है।

  16. सोना : गरम सोना, चांदी व गरम ईंट को जिस पानी में बुझाएं उस पानी को पीने से तेज प्यास शांत हो जाती है।

  17. सेब : सेब का रस पानी में मिलाकर पीने से प्यास कम लगती है। जिन्हे वायु विकार हो, उन्हें यह प्रयोग लाभकारी नहीं होगा।

  18. उदुम्बर के पत्ते : उदुम्बर के सूखे पत्तों के लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग काढ़े में 5 से 10 ग्राम चीनी मिलाकर दिन में 3 बार खाने से प्यास का बार-बार लगना बंद हो जाता है।

  19. उदुम्बर के ताजे पत्तों का रस निकालकर लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग रस पीयें।        
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  20. दही : दही में गुड़ मिलाकर खाने से बादी प्यास मिट जाती है तथा भोजन के बाद आने वाले तेज प्यास कम होती है।

  21. दूध : ताजा दूध 100 से 500 मिलीलीटर पाचन क्षमता के अनुसार पीने से तेज प्यास दूर होती है।

  22. चकोतरा : चकोतरे का रस थोड़ा सा पानी मिलाकर पीने से जलन व प्यास शांत होती है और बुखार भी उतर जाता है।

  23. चावल : चावल का काढ़ा लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग दिन में 2 से 3 बार खाने से प्यास शांत होती है।

  24. फालसा : पके फालसों के रस में पानी मिलाकर पीने से तृषा (प्यास) का रोग दूर होता है।

  25. तरबूज : तरबूज खाने से प्यास लगना कम हो जाता है। तरबूज के रस में मिश्री को मिलाकर प्रतिदिन सुबह पीने से रोग में अधिक लाभ होता है।

  26. तुलसी : तुलसी के 25 पत्ते पीसकर एक गिलास पानी में घोल लें। इसमें स्वादानुसार मिश्री और नींबू निचोड़ लें। इसे पिलाने से किसी रोग में यदि प्यास अधिक लग रही हो तो लाभ मिलता है। प्यास कम लग रही हो तो भी लाभ होता है।

  27.  Tulsi तुलसी के पत्तों को पीसकर 1 गिलास पानी में मिलाकर इस पानी में नीबू निचोड़कर व मिश्री मिलाकर पिलाने से प्यास कम लगती है।

  28. जायफल : किसी भी प्रकार के रोग में प्यास अधिक लगने पर जायफल का टुकड़ा मुंह में रखने से लाभ होता है।

  29. किशमिश : 10 ग्राम किशमिश 500 मिलीलीटर गाय के दूध में पकाकर ठंडा हो जाने पर रात के समय रोज सेवन करने से जलन शांत होती है।                    
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  30. Kishmish किशमिश 80 ग्राम, गिलोय का बारीक चूर्ण, जीरा 10-10 ग्राम तथा चीनी 10 ग्राम इन सभी के मिश्रण को चिकने गर्म बर्तन में भरकर उसमें इतना गाय का घी मिलायें कि मिश्रण अच्छी तरह भीग जायें। इसमें से नित्य प्रति 6 से 20 ग्राम तक सेवन करने से एक दो सप्ताह में चेचक आदि विस्फोटक रोग होने के बाद जो दाह शरीर में हो जाती है, वह शांत हो जाती है।

  31. मुलहठी : मुलहठी में शहद मिलाकर सूंघने से तेज प्यास खत्म हो जाती है तथा थोड़े-थोड़े देर पर लगने वाली प्यास मिट जाती है।

  32. बिहीदाना : बिहीदाना 3 ग्राम को 200 मिलीलीटर पानी में 1 घंटा भिगो दें। 1 घंटे बाद बिहीदाना को उसी पानी में मसलकर छान लें। इस पानी में खांड मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम पिलायें। इससे बार-बार गले का सूखना बंद हो जाता है।

  33. सिरका : ठंडे पानी में सिरका मिलाकर पीने से बादी की प्यास मिट जाती है।

  34. जामुन : जामुन का मीठा गुदा खाने से या उसका रस पीने से प्यास में आराम मिलता है।

  35. jamun जामुन के पत्तों का रस लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग रोगी को पिलाने से प्यास का अधिक लगना बंद हो जाता है।

  36. जामुन के पत्ते : जामुन के सूखे पत्तों का काढ़ा बनाकर लगभग 7 से 14 मिलीलीटर काढ़े में 5 से 10 ग्राम चीनी मिलाकर दिन में 3 बार पीने से बुखार में प्यास का लगना कम हो जाता है।

  37. जौ : एक कप जौ को बारीक पीसकर दो गिलास पानी में 8 घंटे के लिए भिगोकर रख दें। 8 घंटे बाद इसे आग पर उबालकर इसके पानी को छानकर गर्म-गर्म पानी से गरारे करने से तेज प्यास मिट जाती है।

  38. सेंके हुए जौ के आटे को पानी में मथकर (न अधिक गाढ़ा हो और न अधिक पतला) घी मिलाकर पीने से प्यास, जलन और रक्तपित्त दूर होता है।

  39. ज्वार : ज्वार की रोटी को छाछ में भिगोकर खाने से प्यास लगना कम होता है। ज्वार की रोटी कमजोर और वात पित्त के रोगी को न देना चाहिए।

  40. नमक : नमक खाने से ग्रंथियों का रस सूख जाता है और प्यास लगने लग जाती है। इसलिए नमक का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए।                        
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  41. 1 गिलास पानी में 1 चुटकी नमक डालकर घोल लें। 1-1 चम्मच थोड़ी-थोड़ी देर पर पिलाने से प्यास का अधिक लगना कम हो जाता है।

  42. नींबू : नींबू का शर्बत पीने से प्यास शांत होती है।

  43. नींबू को 1 गिलास पानी में निचोड़कर पीने से तेज प्यास का लगना बंद हो जाता है।

  44. गर्मी में नींबू के रस को शीतल (ठंडे) पानी में मिलाकर, चीनी डालकर शिकंजी बनाकर पीने से गर्मी नष्ट होती है और प्यास शांत होती है।

  45. नींबू की पत्ती को मिट्टी में मिलाकर गोली बना लें। इस गोली को आग में पकाकर 1 गिलास पानी में डालकर बुझाएं। फिर उस पानी को कपड़े से छानकर पिलायें। इससे बुखार व अन्य रोगों में लगने वाली प्यास मिटती है और गले का सूखना बंद हो जाता है।

  46. प्यास अधिक लगने पर नीम के पत्तों का शर्बत बनाकर पीने से प्यास का अधिक लगना बंद हो जाता है।

  47. नीम : कड़वे नीम की छाल, धनिया, सोंठ और मिश्री बराबर मात्रा में लेकर 20 ग्राम की मात्रा बना लें। इसे 375 मिलीलीटर पानी में डालकर पकायें। आधा पानी रह जाने पर उतारकर ठंडा कर पीने से पित्त की प्यास बुझ जाती है।

  48. Neem नीम के पत्तों को मिट्टी में मिलाकर गोला बनाकर आग में जला दें। लाल होने पर एक बर्तन में पानी भरकर उस पानी में गोला को बुझाकर उस पानी को पीने से तेज प्यास भी शांत हो जाती है।

  49. नीम की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से कफ के कारण लगने वाली प्यास शांत हो जाती है।

  50. नारियल : नारियल की जड़ों को जलाकर गर्म पानी में डालकर रख दें। ठंडे हो जाने पर छानकर देने से ज्वर (बुखार) में प्यास का लगना दूर होता है।

  51. नारियल की जटा (रेशा) जलाकर पानी में बुझा लें। फिर इस पानी को अच्छे से मिलाकर व छानकर पिलायें। इससे गले का सूखापन दूर होता है।

  52. नारियल का पानी पीने से भी गले का सूखना व तेज प्यास लगना बंद हो जाता है।

  53. नारंगी : प्यास अधिक लगने पर नारंगी खाने से प्यास कम लगती है।

  54. नागरमोथा : नागरमोथा, पित्तपापड़ा, उशीर (खस), लाल चंदन, सुगन्धबाला, सौंठ आदि पदार्थो को पीसकर काढ़ा बना लें और ठंडे पानी के साथ बीमार व्यक्ति को देने से प्यास और ज्वर की प्यास में शांति मिलती है।

  55. अंजीर : बार-बार प्यास लगने पर अंजीर का सेवन करने से लाभ होता है।

  56. अमरूद : अमरूद, लीची, शहतूत और खीरा खाने से प्यास का अधिक लगना बंद हो जाता है।

  57. Amrud अमरूद के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर पानी में डाल दें। कुछ देर बाद इस पानी को पीने से मधुमेह (शूगर) या बहुमूत्र प्यास में उत्तम लाभ होता है।

  58. आंवला : आंवला और सफेद कत्था मुंह में रखने से प्यास का अधिक लगना ठीक हो जाता है।

  59. आम : आम की गुठली की गिरी के 40-60 मिलीलीटर काढे़ में 10 ग्राम मिश्री मिलाकर पीने से भयंकर प्यास शांत होती है।

  60. 7-14 मिलीलीटर आम के ताजे पत्तों का रस या 14-28 मिलीलीटर सूखे पत्तों का काढ़ा चीनी के साथ दिन में तीन बार देना चाहिए।

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