एक्टोपिक प्रेग्नेंसी कारण लक्षण और रोकथाम || Ectopic pregnancy causes symptoms and prevention

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी कारण लक्षण और रोकथाम || Ectopic pregnancy causes symptoms and prevention

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (Ectopic pregnancy) कारण, लक्षण और रोकथाम

गर्भधारण करना हर महिला का सपना होता है। कुछ महिलाओं को गर्भावस्था की पूरी योजना बनाने के बाद भी किसी न किसी परेशानी से जूझना पड़ता है, जिनका इलाज समय पर कराना ज़रूरी होता है, नहीं तो छोटी-सी समस्या बड़ा रूप ले सकती हैं। इन्हीं परेशानियों में से एक है, अस्थानिक गर्भावस्था (Ectopic pregnancy), जिसे अंग्रेज़ी में एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (Ectopic pregnancy) कहते हैं। सबसे पहले हमारे लिया यह जानना ज़रूरी है कि एक्टोपिक प्रेग्नेंसी क्या है।

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Ectopic Pregnancy Signs and Symptoms – प्रेगनेंसी का बच्चेदानी में न होना-एक्टोपिक प्रेग्नेंसी

तो आइए, जानते हैं कि एक्टोपिक प्रेग्नेंसी क्या है?( What is ectopic pregnancy?)

अस्थानिक का मतलब होता है गलत स्थान पर, यानि गर्भावस्था के मूल  अंडाणु गलत स्थान पर जुड़ जाएं, उसे एक्टोपिक प्रेग्नेंसी कहते हैं। इस स्थिति में अंडाणु गर्भाशय के अंदर विकसित होने की जगह उसके बाहर फैलोपियन ट्यूब में विकसित होने लगते हैं । फैलोपियन ट्यूब में विकसित होने के कारण इस गर्भावस्था को ट्यूबल गर्भावस्था (Tubal pregnancy) भी कहते हैं। हालांकि, ऐसा दुर्लभ मामलों में ही होता है। हां, अगर इस गर्भावस्था के लक्षणों को शुरू में ही नहीं पहचाना गया, तो फैलोपियन ट्यूब फटने का खतरा भी हो सकता है, जिससे अंदर रक्त स्राव शुरू हो सकता है। सही समय पर इलाज न होने पर यह समस्या जानलेवा भी हो सकती है।cancer

आइए, जानते हैं कि अस्थानिक गर्भावस्था (Ectopic pregnancy)  होने की आशंका कब होती है?

आमतौर पर गर्भधारण करने के बाद 40 से 70 days  के बीच अस्थानिक गर्भावस्था का पता चलता है । इसके अलावा, पीरिड्स मिस होने के दो सप्ताह बाद अस्थानिक गर्भावस्था के लक्षण महसूस होने लग जाते हैं। इसके लक्षण नज़र आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और इसका इलाज कराना चाहिए।
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आइए, अब जानते हैं कि यह गर्भावस्था किन महिलाओं को हो सकती है।

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी किसी भी महिला को हो सकती है, लेकिन कुछ लक्षण और कारण इसकी आशंका को बढ़ा देते हैं। नीचे हम बता रहे हैं कि आखिर किन-किन परिस्थितियों में अस्थानिक गर्भावस्था का खतरा होता है:

  1. जिन महिलाओं को पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज हो।

  2. जिन महिलाओं को ट्यूबल एंडोमेट्रियोसिस हो।

  3. धूम्रपान करने वालीं महिलाओं में इसकी आशंका बढ़ जाती है।

  4. जिन महिलाओं ने गर्भनिरोधक कॉइल लगवाई हो।

  5. अगर प्रेग्नेंट होने के लिए ट्यूब की सर्जरी कराई हो।

  6. अगर 35 साल की उम्र के बाद गर्भवती हों।  हालांकि, कुछ मामलों में इसके कारणों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।dcgyan

अब आइए, जानते हैं कि एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के लक्षणों के बारे में –

  1. पेट के निचले हिस्से में या श्रोणि के एक हिस्से में दर्द होना एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का लक्षण हो सकता है। यह दर्द लगातार बना रह सकता है, जो कभी हल्का हो सकता है, तो कभी तेज़। कभी-कभी यह दर्द बहुत तेज़ भी हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

  2. योनि से रक्तस्राव होना एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का लक्षण हो सकता है। यह रक्तस्राव सामान्य महावारी से कम या ज्यादा या सामान्य से ज्यादा गहरे रंग का हो सकता है।

  3. चक्कर आना ,बेहोशी आना व कमज़ोरी महसूस होना भी एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का लक्षण हो सकता है। इसके अलावा, कुछ मामलों में मल त्याग करते समय दर्द होना या दस्त लगना इसके लक्षण हो सकते हैं।

  4. अगर एक्टोपिक गर्भावस्था (Ectopic pregnancy) का जल्दी पता न चले, तो नलिका में खिंचाव पड़ सकता है, जिसके कारण यह फट भी सकती है। नलिका फटने से आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है,
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अगर आपको बताए गए लक्षण नज़र आएं, तो डॉक्टर से संपर्क करने में देरी न करें।

आइए, अब जानते हैं कि एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (Ectopic pregnancy)  से निपटा कैसे जाए।

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का पता लगाना आसान नहीं है। डॉक्टर इसकी जांच तभी करते हैं, जब आपको गर्भावस्था के दौरान बार-बार दर्द होता है। ऐसे में डॉक्टर पेल्विक परीक्षा करवाते हैं। इनके अलावा, अन्य जांच भी की जा सकती हैं:-

  • रक्त परीक्षण (blood test) :- इसके जरिए, रक्त जांच में एचजीसी (ह्यूमन कोरिओनिक गोनाडोट्रोपिन) का स्तर पता किया जाता है। एचसीजी एक हार्मोन है, जो गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न होता है। अगर एचसीजी का स्तर बहुत ज्यादा है, तो यह एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के लक्षण हो सकते हैं। अगर आपको दर्द नहीं हो रहा और लक्षण फिर भी बने हुए हैं, तो यह टेस्ट दोबारा भी किया जा सकता है।

  • अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) :- एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से निपटने के लिए डॉक्टर ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड (Transvaginal ultrasound) का सहारा ले सकते हैं। योनि में एक डिवाइस डाला जाता है, जिससे अंदर का भाग देखा जा सकता है। अगर फैलोपियन ट्यूब में भ्रूण दिखाई दे, तो यह एक्टोपिक प्रेग्नेंसी होती है।

इसके अलावा, सोनोग्राफी के जरिए भी गर्भाशय की जांच की जा सकती है। अगर प्रेग्नेंसी की पुष्टि हो चुकी है और फिर भी गर्भाशय में भ्रूण दिखाई न दे, तो यह एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का संकेत हो सकता है। यह भी हो सकता है कि गर्भावस्था का शुरुआती चरण होने की वजह से भ्रूण न दिखाई दे या फिर यह गर्भपात का संकेत भी हो सकता है। इसकी पुष्टि डॉक्टर सिर्फ जांच के बाद ही करते हैं।
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आइए, अब पता करते हैं इसकी रोकथाम के बारे में।

परेशानियां कभी कहकर दस्तक नहीं देतीं, लेकिन अगर आप कुछ सावधानियां बरते लें, तो आने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है। बात करें अस्थानिक प्रेग्नेंसी की, तो इसके लिए तो अगर आपको किसी तरह का यौन संक्रमण हो गया है, तो इसका जल्द से जल्द इलाज कराएं। जितनी जल्दी इसका इलाज कराएंगे, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (Ectopic pregnancy)  का खतरा कम हो जाएगा। पेट के निचले हिस्से में दर्द, पेशाब करते समय दर्द होना, योनि से असामान्य रक्तस्राव, योनि से दुर्गंध आना या फिर संभोग के दौरान दर्द होना यौन संक्रमण के सामान्य लक्षण हो सकते हैं। अगर आपको यह सब लक्षण नज़र आते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर उचित इलाज करवाना ज़रूरी है। इससे एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के खतरे को टाला जा सकता है। यौन रूप से सक्रिये होने के बाद समय-समय पर जांच कराते रहना आपके लिए अच्छा रहेगा। और धूम्रपान करने से भी एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए, अगर आप गर्भवती होने की कोशिश कर रही हैं, तो धूम्रपान तुरंत छोड़ दें। इससे एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का खतरा कम हो सकता है ।

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