द्राक्षासव के फायदे और नुकसान -Health Benefits of Drakshasava in Hindi 

द्राक्षासव के फायदे और नुकसान -Health Benefits of Drakshasava in Hindi 

बेस्ट हेल्थ टॉनिक द्राक्षासव  

Drakshasava द्राक्षासव बढ़िया द्राक्ष (मुन्नका) और जड़ीबूटियों से बनाया जाता है, इसके नियमित सेवन से ताकत और ताजगी आती है,और भूख एवं पाचन शक्ति को बढ़ाता है. शरीर में खून की मात्रा बढ़ाकर तंदुरुस्त बनाता है. द्राक्षासव एक आयुर्वेदिक हेल्थ टॉनिक है, जिसके साथ साथ यह कई बीमारियों को दूर करता है. द्राक्षासव का मुख्य घटक द्राक्ष यानी अंगूर होता है, इसीलिए इसे द्राक्षासव कहते हैं. द्राक्षासव हृदय रोगों में इस्तेमाल किया जाने वाला एक प्रभावी आयुर्वेदिक एक हर्बल टॉनिक है जो शरीर को मजबूत करता है, इसे पोषण करता है, और कमजोरी को कम करता है इस दवा में 4 से 10% स्वयं-जनित प्राकृतिक शराब/अल्कोहल शामिल हैं, जिसमें पानी मौजूद है,
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द्राक्षासव के फायदे / Benefits Of Drakshasava

1.बलवर्धक के लिए :- इसमें एंटीओक्सिडेंट गुण, बलवर्धक गुण होते है |  यह द्राक्षासव ग्रहणी (Chronic Diarrhoea), अर्श (Piles), पेट में गेस ऊपर चढ़ना, पेट के रोग, कृमि, कुष्ट (Skin Diseases), आंखों के रोग, शिरोरोग, बुखार, आम (Toxin), पांडु (Anaemia) और कामला (Jaundice) का नाश करने में श्रेष्ठ है। यह शरीर को मोटा करने वाला बल वर्धक और अग्नि प्रदीपक है।

2.निर्बलता को दूर करने के लिए :- किसी भी रोग में शक्ति के संरक्षण के लिये और निर्बलता को दूर करने के लिये द्राक्षासव उपयोगी है। अरुचि (Anorexia), आलस्य, थकावट और बेचैनी को दूर कर शारीरिक उत्साह बढ़ाता है। इसके सेवन से शांत निंद्रा आ जाती है। मलशुद्धि होती है और मन प्रफुल्लित बनता है।

3.भूख की कमी के लिए :- द्राक्षासव पाचक पित्त (Gastric Juice) का स्त्राव बढ़ाता है, इस हेतु से अग्निमांद्य और उससे उत्पन्न विविध रोगों में यह लाभदायक है। यह भोजन से पोषक तत्वों के अवशोषण में सुधार के द्वारा आहार और अनीमिया के उपचार में मदद के लिए पाया गया है। यह भूख में सुधार भी करता है |

4.पेट के लिए :- यदि उदावर्त (पेट में गेस ऊपर उठना) रोग प्रबल न हो गया हो, तो द्राक्षासव का प्रयोग अच्छा माना गया है। पित्तज गुल्म (Tumour) में बुखार, तृषा (प्यास), समस्त शरीर लाल हो जाना, मुखमंडल लाल हो जाना, भोजन के 3-4 घंटे पर मंद-मंद उदरशूल (पेट दर्द), गुल्म (Tumour) पर स्पर्श करने पर वेदना, जिस तरह व्रण (Wound) पर हाथ लगाने से वेदना होती है उस तरह गुल्म पर स्पर्श करने से वेदना का भान होना आदि लक्षण वाले गुल्म में यह अच्छा उपयोगी है।

5.बुखार के लिए:- आमज्वर (शरीर में बने जहर की वजह से होने वाला बुखार) की प्रथम अवस्था में ज्वर पाचन रूप से द्राक्षासव का प्रयोग हितकारक है। पांडु और कामला पर यह सहायक रूप से प्रयुक्त होता है।

6.चिंता और अवसाद के लिए :- चिंता और अवसादग्रस्तता विकारों से पीड़ित रोगियों को एक सुरक्षित और प्रभावी तरीके से लक्षणों से छुटकारा पाने के लिए द्राक्षासव का उपयोग कर सकते हैं। यह व्यक्ति के मूड में सुधार कर सकता है और दैनिक गतिविधियों में भूख की हानि, भूख की कमी, नींद आना और आत्मघाती विचारों जैसे लक्षणों को कम कर सकता है।sir dard

7.रक्तस्राव के लिए :-  द्रक्षसाव उन असामान्यताओं को ठीक कर सकता है जो रक्तस्राव विकारों का कारण बनता है। यह चोटों के मामलों में आवश्यक रूप से एक स्वस्थ रक्त के थक्के लगाने की अनुमति देता है और रक्त का अत्यधिक नुकसान रोकता है। यह रक्त के थक्के में सहायता करके और उपचार समय को सुधारता है। इसका उपयोग एक ऐसी स्थिति जिसमें नाक से खून बह रहा है। यह महिलाओं द्वारा अत्यधिक मासिक धर्म प्रवाह का इलाज करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है

8.हृदय रोग के लिए :-  द्राक्षासव  एक शक्तिशाली हृदय टॉनिक है। यह हृदय के कार्यों को नियंत्रित करता है और इसकी क्षमता में सुधार करता है। इसका उपयोग दिल के दौरे और हृदय की विफलता के जोखिम को कम करने के लिए किया जा सकता है। यह रक्तचाप भी कम करता है यह हृदय को मजबूत करता है और शरीर के सभी भागों में खून का उचित प्रवाह सुनिश्चित करता है।

9.पाचन रोग के लिए :- द्राक्षासव का उपयोग बवासीर के इलाज में किया जा सकता है, खून वाले बवासीर और पित्त की वजह से होने वाले बवासीर पर इसका सेवन हितकारक है।यह यकृत पर एक सुरक्षात्मक कार्रवाई का उत्पादन करता है |
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द्राक्षासव का सेवन कैसे करना है आइए देखते हैं :- 

सेवन की मात्रा – 20 से 30 मिली. सुबह एवं शाम भोजन के पश्चात समान मात्रा में जल मिलाकर या चिकित्सक के परामर्शानुसार सेवन करना चाहिए |

6 साल के ऊपर वाले बच्चों को एक-एक चम्मच समभाग पानी के साथ सुबह – शाम खाने के बाद दें .

12 साल के ऊपर वाले बच्चों को दो – दो चम्मच समभाग पानी के साथ दे.

18 साल के ऊपर वाले सभी लोग 2 से 5 चम्मच समभाग पानी के साथ सुबह – शाम खाने के बाद ले.

इसे आप 6 महीने तक कंटिन्यू सेवन कर सकते हैं ,इसका कोई भी साइड इफेक्ट नहीं है. इसे स्त्री पुरुष दोनों भी इसका यूज कर सकते हैं.
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द्राक्षासव की कीमत :-

बैद्यनाथ द्राक्षासव स्पेशल 370 ml  की कीमत ₹200 है. यह आपको किसी भी मेडिकल स्टोर में मिल जाएगा.

आप बैद्यनाथ,डावर ,पतंजलि ,झंडू,आदि फार्मेसियों का द्राक्षासव ले सकते हैं|

द्राक्षासव के नुकसान disadvantages of Drakshasava

1.अगर निर्देशित मात्रा में सेवन किया जाए तो इस दवा के कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होते | वैसे द्राक्षासव में स्वयम निर्मित लगभग 12 % अल्कोहल होती है लेकिन यह प्राकृतिक अल्कोहल दुष्प्रभाव रहित होती है | क्योंकि आयुर्वेद की आसव कल्पनाओं से निर्मित सभी दवाओं में अल्कोहल होती है जो इन्हें रोग में तीव्र प्रभावी बनाती है |

2.निर्देशित मात्रा से अधिक सेवन करने पर हल्के दस्त की शिकायत हो सकती है |

3.गर्भवती महिलाएं इसका सेवन डॉक्टर के परामर्श के बिना ना करें

द्राक्षासव के घटक द्रव्य (Components of Drakshasava)

द्राक्षा (मुन्नका) ,खांड (चीनी), धाय के फूल, इलायची , मरिच (कालीमिर्च) जायफल, सुपारी, लौंग ,जावित्री ,तेजपात,नागकेसर ,सोंठ ,पिप्पली,रूमीमस्तंगी,अकरकरा,और कूठ आदि

अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें।  लेख(Article) देखने के लिए आपका धन्यवाद , आपको यह जानकारी पसन्द आयी है तो लाइक करें और अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें |

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