वायरस (विषाणु ) क्या है? इसकी खोज, संरचना, कार्य ,प्रकार, फैलाना , बीमारियां व बचने के उपाय बताइए

वायरस (विषाणु ) क्या है? इसकी खोज, संरचना, कार्य ,प्रकार, फैलाना , बीमारियां व बचने के उपाय बताइए |

What is a virus? Explain its discovery, structure, function, type, spread, diseases and methods of survival.

वायरस ( विषाणु ) क्या है?

वायरस को हिंदी में विषाणु कहते हैं ,विषाणु(Virus) एक प्रकार के संक्रमक फैलने वाला घटक यानिकि एजेंट (infectious agent) होते हैं हमेशा दूसरे जीवों के जीवित कोशिकाओं में पनपते हैं।और उन्हें नुकसान पहुंचते है। कोई वायरस मेजबान सेल (Host cell) की सहायता के बिना वृद्धि नहीं कर सकता है और हालांकि वे फैल सकते हैं लेकिन वायरस में स्वयं प्रजनन की क्षमता की कमी होती है और इसलिए इसे सामान्य जीवित जीवों जैसा नहीं माना जाता है। कोई वायरस किसी भी जानवर, पौधे या बैक्टीरिया को संक्रमित कर सकता है और अक्सर बहुत गंभीर या यहां तक कि घातक बीमारियों का कारण बनता है।

विषाणु (वायरस) किसी ठग की तरह होते हैं। वे जीवित, सामान्य कोशिकाओं पर आक्रमण करते हैं और उन कोशिकाओं का उपयोग अपने जैसे अन्य वायरस की संख्या बढ़ाने के लिए करते हैं।

वायरस कोशिकाओं को मार सकते हैं, क्षति पहुंचा सकते हैं या बदल सकते हैं और आपको बीमार कर सकते हैं। विभिन्न वायरस आपके शरीर में कुछ कोशिकाएं जैसे आपके लिवर, श्वसन तंत्र या खून पर हमला करते हैं।

आम सर्दी जुकाम भी एक वायरस के कारण होता है। चूंकि अभी भी नए-नए विषाणुओं की उत्पत्ति का मुद्दा रहस्य से घिरा हुआ है, इन वायरस या विषाणु के कारण होने वाली बीमारियां और उन्हें ठीक करने के तरीके अभी भी विकास के शुरुआती चरणों में हैं।

वायरस बेहद छोटे, व्यास में लगभग 20 – 400 नैनोमीटर तक होते हैं। मिमिवायरस के रूप में जाना जाने वाला सबसे बड़ा वायरस 500 नैनोमीटर के व्यास तक होता है।
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आइये जानते हैं कि  वायरस (virus ) की खोज कैसे हुई ?

वायरल (virus) की खोज रूसी वनस्पति वैज्ञानिक इवानोवस्की (Ivanovsky) ने 1892 ई. में की थी । उन्होंने तम्बाकू की पत्ती में मोजैक रोग (Mosaic disease) के कारण की खोज करते समय विषाणु के बारे में बताया था।

विषाणु बहुत छोटे, परजीवी, अकोशिकीय (Noncellular) और विशेष न्यूक्लियो प्रोटीन कण है, जो जीवित परपोषी के अन्दर रहकर जनन(Reproduction) करते हैं।इन्हे केवल इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की सहायता से ही देखा जा सकता है।विषाणुओं के अध्ययन करने वाली विज्ञान को विषाणु विज्ञान (Virology) कहा जाता है

1898 में, फ्रेडरिक लोफ्लर और पॉल फ्रॉश ने शोध में पाया कि पशुओं में पैर और मुंह की बीमारी का कारण कोई बैक्टीरिया से भी छोटा संक्रामक कण है। यह वायरस की प्रकृति का पहला संकेत था, एक ऐसा जेनेटिक तत्व जो जीवित और निर्जीव अवस्थाओं के बीच में कहीं आता है।

लुई पाश्चर तथा बीजरिक ने इन्हें जीवित तरल संक्रामक का नाम दिया। एड्स (AIDS) के विषाणु को 1986 ई. में मानव प्रतिरक्षा अपूर्णता वाइरस (HIV) नाम दिया गया।

वैज्ञानिक लंबे समय से वायरस की संरचना और कार्य को उजागर करने का प्रयास करते रहे हैं। वायरस इस मामलें में अद्वितीय हैं कि उन्हें जीव विज्ञान के इतिहास में अलग-अलग समय पर जीवित और निर्जीव दोनों रूपों में वर्गीकृत किया जाता रहा है। वायरस कोशिकाएं नहीं बल्कि गैर-जीवित, संक्रामक कण होते हैं। वे विभिन्न प्रकार के जीवों में कैंसर समेत कई बीमारियों को जन्म देने में सक्षम हैं।

वायरल रोग जनक न केवल मनुष्यों और जानवरों को संक्रमित करते हैं, बल्कि पौधों, बैक्टीरिया इत्यादि को भी संक्रमित करते हैं। ये बेहद छोटे कण बैक्टीरिया से लगभग 1000 गुना छोटे होते हैं और लगभग किसी भी पर्यावरण में पाए जा सकते हैं। वायरस अन्य जीवों से अलग स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में नहीं रह सकते क्योंकि उन्हें पुनरुत्पादन (Reproduction) के लिए एक जीवित कोशिका पर निर्भर रहना पड़ता है।
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आइये जानते हैं कि वायरस की संरचना कैसी होती है ?(structure of virus in hindi)

वायरस संरचना में प्रोटीन के आवरण से घिरा न्यूक्लिक अम्ल होता है। बाहरी आवरण या कैप्सिड (capsid )में बहुत सी प्रोटीन इकाइयाँ होती हैं जिने केप्सोमेरे (capsomere )कहते हैं। सम्पूर्ण कण को विरियन (Virion) कहते हैं।

विषाणु को हम किसी भी तरह से जीवित प्राणी नहीं मान सकते हैं।उनके अंदर वो सभी चीजें होती है जो एक जीवित प्राणी में होती हैं जैसे कि न्यूक्लेइक एसिड, डीएनए, आरएनए आदि।लेकिन वे नुक्लेइक एसिड में पाए जाने वाले जानकारियों के अनुसार स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर सकते हैं।

वायरस उन परजीवी प्राणियों की श्रेणी में आते हैं जो मेजबान कोशिकाओं के अंदर प्रजनन कर पनपते रहते हैं। मेजबान कोशिकाओं के बाहर विषाणु स्वयं का प्रजनन नहीं कर सकते क्योंकि उनके अंदर वह जटिल तंत्र नहीं पाया जाता जोकि कोशिकाओं के अंदर होता है।

मेजबान (Host) के कोशिका तंत्रो में पाए जाने वाले DNA कि मदद से विषाणु अपना RNA बना लेते हैं, इस पूरी प्रक्रिया को प्रतिलेखन (transcription) कहा जाता है एवं RNA में दिए गए संकेतों के हिसाब से प्रोटीन बना लेते हैं जिसे अनुवादन (translation) प्रक्रिया कहा जाता है।  वायरस अच्छी तरह से एकत्रित हो जाते है तब से संक्रमण फैलाने योग्य हो जाते हैं, उनको वायरन कहा जाता है। इसके संरचना में नुक्लेइक एसिड पाया जाता है जो प्रोटीन से घिरा होता है।इसको कैप्सिड कहा जाता है जोकि एसिड को न्यूक्लिअसिस नाम के एंजाइम से नष्ट होने में बचाते हैं। कुछ विषाणुओं के पास सुरक्षा के लिए दूसरी परत भी होती है जो मेजबान के कोशिका झिल्ली का भाग होता है।
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विषाणु (virus) का कार्य (function of virus in hindi)

सूक्ष्मजीवकी के अनुसार, विषाणु अपना डीएनए या आरएनए जीन मेजबान कोशिकाओं में प्रत्यारोपित (implant) करने का कार्य करते हैं ताकि वो जीन मेजबान कोशिकाओं द्वारा प्रतिलेखित या अनुवादित हो सकें।

पहले तो विषाणु मेजबान के शरीर में जाने का रास्ता ढूंढते हैं। खुले हुए घाव या श्वशन मार्ग शरीर में जाने के लिए इनके लिए द्वार का काम करते हैं। कभी कभी कीटाणुओं के द्वारा भी विषाणु शरीरों में प्रवेश लेते हैं। जब कीटाणु इंसानों को काटते हैं, तब वे विषाणु कीटाणुओं के लार के साथ शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इन विषाणुओं के द्वारा डेंगू का बुखार और पीला बुखार चढ़ता है।

शरीर में प्रवेश लेने के बाद विषाणु अपने आप को कोशिकाओं के सतह से संलग्न कर लेते हैं। कोशिका के सतहों पर अपने आप को बाँध कर वे ऐसा कर पाते हैं। अलग अलग विषाणु एक सतह पर बंध जाते हैं और एक ही विषाणु अलग अलग सतहों पर भी बंध सकते हैं। इसके बाद विषाणु कोशिकाओं के झिल्ली की तरफ बढ़ना शुरू कर देते हैं।
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आइये जानते हैं कि वायरस के प्रकार – Virus ke prakar in hindi

वायरस को उसके होस्ट के प्रकार के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। इसी आधार पर होम्स ने 1948 में वायरस को तीन समूहों में विभाजित किया है। वे हैं –

1.एनिमल वायरस

वायरस जो मनुष्य सहित पशुओं की कोशिका को संक्रमित करते हैं, उन्हें एनिमल वायरस कहा जाता है। उदाहरण के लिए, इन्फ्लूएंजा वायरस, रैबीज वायरस, मम्प्स वायरस (जिससे गलसुआ रोग होता है), पोलियो वायरस, स्माल पॉक्स वायरस, हेपेटाइटिस वायरस, राइनो वायरस (सामान्य सर्दी जुकाम वाला वायरस) आदि। इनकी आनुवंशिक सामग्री आरएनए या डीएनए होता है।

2.प्लांट वायरस

पौधों को संक्रमित करने वाले वायरस को प्लांट वायरस कहा जाता है। उनकी अनुवांशिक सामग्री आरएनए होता है जो प्रोटीन की खोल में रहता है। उदाहरण के लिए, तंबाकू मोजेक वायरस, पोटैटो वायरस (आलू विषाणु), बनाना बंची टॉप वायरस, टोमॅटो येलो लिफ कर्ल वायरस (टमाटर की पत्ती ), बीट येलो वायरस और टर्निप येलो वायरस इत्यादि हैं।

3.बैक्टीरियोफेज

वायरस जो जीवाणु या बैक्टीरिया की कोशिकाओं को संक्रमित करते हैं उन्हें बैक्टीरियोफेज या बैक्टीरिया खाने वाले के रूप में जाना जाता है। उनमें आनुवांशिक सामग्री के रूप में डीएनए होता है। बैक्टीरियोफेज की कई किस्में हैं। आम तौर पर, प्रत्येक प्रकार का बैक्टीरियोफेज केवल एक प्रजाति या बैक्टीरिया के केवल एक स्ट्रेन पर हमला करता है।
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आइये जानते हैं कि वायरस कैसे फैलता है – Virus kaise failta hai in hindi

वायरस पर्यावरण से या अन्य व्यक्तियों के माध्यम से मिट्टी से पानी में या हवा में पहुंच कर नाक, मुंह या त्वचा में किसी भी कट/घाव के माध्यम से हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं और संक्रमित करने के लिए किसी कोशिका की तलाश करते हैं।

विषाणु और जीवाणु संक्रमण दोनों मूल रूप से मनुष्यों में एक ही तरह से फैलते हैं।

 वायरस मनुष्यों में निम्न कुछ तरीकों से फैल सकते हैं –

  • जिस व्यक्ति को सर्दी जुकाम है उस व्यक्ति की खांसी या छींक से वायरस संक्रमण फैल सकता है।

  • वायरस किसी अन्य व्यक्ति के हाथ को छूने या हाथ मिलाने से फैल सकता है।

  • यदि कोई व्यक्ति गंदे हाथों से भोजन को छूता है तो वायरस आंत में भी फैल सकता है।

  • शरीर के तरल पदार्थ जैसे कि खून, लार और वीर्य और ऐसे ही अन्य तरल पदार्थों के इंजेक्शन या यौन संपर्क द्वारा संचरण (Transmission) से वायरस, विशेष रूप से हेपेटाइटिस या एड्स जैसे वायरल संक्रमण अन्य व्यक्तियों में फैल सकते हैं।
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आइये जानते हैं कि वायरस से होने वाली बीमारियां – Virus se hone wale rog in hindi

वायरस यूकेरियोट्स (एक से अधिक कोशिका वाले जीव) में कई बीमारियों का कारण बनता है। इंसानों में वायरस के कारण कई प्रकार के रोग हो सकते हैं। वायरस से होने वाली कुछ बीमारियां निम्नलिखित हैं –

  • चेचक

  • सामान्य सर्दी जुकाम

  • चिकन पॉक्स

  • इन्फ्लूएंजा

  • जेनाइटल हर्पीस

  • मीजल्स

  • पोलियो

  • रेबीज

  • इबोला हेमोरेजिक बुखार

  • एड्स

  • कोरोनावायरस Novel Coronavirus (COVID-19)  इत्यादि।

यहां तक कि कुछ प्रकार के कैंसर भी वायरस से जुड़े हुए हैं। कुछ मामलों में, यह निर्धारित करना मुश्किल हो सकता है कि आपके लक्षण का कारण बैक्टीरिया है या वायरस। कई बीमारियां – जैसे निमोनिया, मेनिनजाइटिस और दस्त या तो बैक्टीरिया या वायरस के कारण हो सकती हैं।

जानवरों को प्रभावित करने वाली वायरल बीमारियों में रेबीज, मुंहपका-खुरपका रोग, बर्ड फ्लू और स्वाइन फ्लू शामिल हैं। पौधों की बीमारियों में मोज़ेक रोग, रिंग स्पॉट, लीफ कर्ल और लीफ रोल रोग शामिल हैं।
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आइये जानते हैं कि वायरस से बचने के उपाय – Virus se bachne ke upay in hindi

जब आप के शरीर में कोई वायरस प्रवेश करता है, तो आप हमेशा बीमार नहीं होते बल्कि कई बार आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली इससे लड़ने में सक्षम होती है। अगर आपको वायरल संक्रमण हुआ है तो इसके कारण होने वाली विभिन्न स्थितियों का पता करने में सहायता के लिए एक इम्यूनोग्लोबुलिन ब्लड टेस्ट किया जा सकता है।

अधिकांश वायरल संक्रमणों के मामले में, इलाज केवल लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है, आप केवल अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली के वायरस से लड़ने की प्रतीक्षा कर सकते हैं। एंटीबायोटिक्स वायरल संक्रमण के लिए काम नहीं करते हैं। कुछ वायरल संक्रमणों के इलाज के लिए एंटी वायरल दवाएं दी जाती हैं।

कुछ टिके भी उपलब्ध हैं जो आपको कई वायरल बीमारियों से बचाने में मदद कर सकते हैं। स्माल पॉक्स जैसे कुछ प्रकार के वायरल संक्रमणों को रोकने में टीका काफी प्रभावी रहा है। टिका शरीर को विशिष्ट प्रकार के वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली को लड़ने में मदद करके काम करता है।

कई प्रकार की नई एंटीवायरल दवाएं विकसित की जा रही है जो वायरस को गुणा (Multiplication)करने से रोकती है लेकिन दुर्भाग्यवश, इन उपचारों का उपयोग अभी भी बहुत कम वायरस पर उपयोग किया जा सकता है और इनकी प्रभावशीलता सीमित हैं।
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आइये जानते हैं कि वायरस के प्रसार को रोकने के उपाय ( Measures to stop the spread of virus)

जब आप खांसते या छींकते हैं, तो आप हवा में रोगाणु से भरी छोटी बूंदों को छोड़ते हैं। सर्दी जुखाम या फ्लू आमतौर पर इसी तरह फैलता है। आप निम्नलिखित कुछ बातों का ध्यान रख कर रोगाणुओं के प्रसार को रोकने में मदद कर सकते हैं –

  1. जब आप छींकते हैं या खांसते हैं तो आप अपने मुंह और नाक पर हाथ की बजाय अपनी कोहनी को रखें।dcgyan

  2. भोजन खाने या तैयार करने से पहले अपने हाथों को अक्सर साफ करें और बाथरूम का उपयोग करने या डायपर बदलने के बाद अपनी आंखों, नाक या मुंह को छूने से बचें तथा हाथों को अच्छे से साफ करें।dcgyan

  3. हाथ धोना बीमारी को रोकने का सबसे प्रभावी लेकिन सबसे अधिक अनदेखा किया जाने वाला तरीका है। साबुन और पानी विषाणुओं को मारने का काम करते हैं। कम से कम 20 सेकंड तक अपने हाथ धोएं और अपने दोनों हाथों को आपस में अच्छे से रगड़ें।

  4. डिस्पोजेबल हैंड वाइप्स या जेल सैनिटाइजर्स भी अच्छा काम करते हैं।

आशा करते हैं कि इस लेख से आपको वायरस के बारे में  मिली जानकारी से आप लाभ ले पाएंगे , इस लेख को देखने ,लाइक व शेयर करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यबाद |

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