शरत चंद्र चट्टोपाध्याय (बांग्ला उपन्यास) – देवी चौधरानी (Devi Chaudharani)

शरत चंद्र चट्टोपाध्याय (बांग्ला उपन्यास) – देवी चौधरानी भाग -1 (Devi Chaudharani)

‘देवी चौधरानी’ उपन्यास में बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय भारतीय स्त्रियों की दुर्दशा को जीवंत रूप दिया है. प्रफुल्ल एक गरीब लड़की है, जिसका विवाह सुखी-सम्पन्न परिवार में होता है. परंतु गरीबी के कारण उसे घर से निकाल दिया जाता है. इसके बाद वो पूरी कहानी में संघर्ष करती नजर आती है. ‘देवी चौधरानी’ एक ऐसी नारी की गौरव गाथा है, जो ससुराल से निकाल दिए जाने पर भी आजीवन पतिपरायणा रही.इतना ही नहीं डाकुओं के चंगुल में पड़ कर वह डाकू भले ही बन गई हो, पर उस ने कभी डाका नहीं डाला, कभी किसी को सताया नहीं. कालांतर में अपार धनदौलत की मालकिन हो कर भी उस ने सदैव गरीबों और निस्सहायों का उपकार किया. फिर भी क्या वह अपने पति का प्रेम पा सकी? इस कहानी में स्त्री के मजबूत इरादों को सुंदर तरीके से उकेरा गया है.

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शरत चंद्र चट्टोपाध्याय (बांग्ला उपन्यास) – देवी चौधरानी भाग -2 (Devi Chaudharani)

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