सब जग ईश्वर-रूप है, sab jag ishvar roop hai in hindi pdf online

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सब जग ईश्वर-रूप है, sab jag ishvar roop hai in hindi

वीरान जंगल में एक सुन्दर मकान था। एक साधु ने उसे देखकर सोचा- ‘कितना सुन्दर स्थान है यह! यहाँ बैठकर ईश्वर का ध्यान करूँगा।

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एक चोर ने उसे देखा तो सोचा-‘वाह! यह तो सुन्दर स्थान है! चोरी का माल लाकर यहाँ रक्खा करूँगा।

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एक दुराचारी ने देखा तो सोचा-‘यह तो अत्यन्त एकान्त स्थान है! दुराचार करने के लिए इससे उत्तम स्थान और कहाँ मिलेगा?’’

 
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एक जुआरी ने देखकर सोचा-‘अपने साथियों को यहाँ लाउळँगा, यहाँ बैठकर हम जुआ खेलेंगे।

 

अलग-अलग दृष्टिकोण होने के कारण एक ही मकान को प्रत्येक व्यक्ति ने अलग-अलग रूप से देखा। जैसा दृष्टिकोण बनाओगे, वैसा अन्तःकरण बनेगा अवश्य। यदि तुम चाहते हो कि तुम्हारा अन्तःकरण अच्छा हो तो दृष्टिकोण अच्छा बनाओ।

 

सब जग ईश्वर-रूप है, भला बुरा नहिं कोय।

जैसी जाकी भावना, तैसा ही फल होय।।

 
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