आमा हल्दी  के फायदे और नुक्सान | Aama Haldi ke fayde | health benefits of Aama Haldi in hindi

आमा हल्दी  के फायदे और नुक्सान | Aama Haldi ke fayde | health benefits of Aama Haldi in hindi

आमा हल्दी  परिचय :-

आपने हल्दी के बारे में तो सुना ही होगा लेकिन आज हम आपको एक ऐसी हल्दी के बारे में बताएंगे जो जो की बहुत सारी बीमारियों के उपचार में प्रयोग किया जाता है। आंबा हल्दी से खांसी सांस रोग, हिचकी, रुक रुक कर पेशाब आना जैसी बीमारियों के उपचार में प्रयोग किया जाता है तो आइए जानते हैं आंबा हल्दी को किन किन उपचार में प्रयोग किया जाता है|

आमा हल्दी  क्या है (What is Aama Haldi?)

आमा हल्दी की गाँठे आम की तरह गन्धयुक्त होती हैं इसलिए इसे आमा हल्दी कहते हैं। लोग इसकी गाँठों के छोटे-छोटे टुकड़े करके सुखा लेते हैं। प्राय बाजार में आमा हल्दी के नाम से वन्यहरिद्रा की गाँठें बिकती हैं। इसका उपयोग हलदी के स्थान पर किया जाता है। सुगन्धित होने के कारण इसे चटनी आदि में प्रयोग किया जाता है। मिठाईयों में आम की गन्ध लाने के लिए इसके फाण्ट का उपयोग किया जाता है। इसके प्रकन्द बृहत्, स्थूल, बेलनाकार अथवा दीर्घवृत्ताकार, शाखा-प्रशाखायुक्त होते हैं।

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अनेक भाषाओं में आमा हल्दी  के नाम (Aama Haldi Called in Different Languages)

  • हिंदी :– आमा हलदी, आमाहलद;

  • संस्कृत नाम :– दार्वीभेदा, आम्रगन्ध, सुरभीदारु, पद्मपत्रा;

  • English :– Mango ginger (मैंगो जिंजर)

  • वानस्पतिक नाम (Scientific Names) :– Curcuma amada Roxb. (कुरकुमा अमाडा)

  • कुल :- Zingiberaceae (जिन्जिबेरेसी)

  • कन्नड़अम्बारासिनीहुली (Ambarasisihuli);

  • गुजरातीआम्बामोरी (Ambamori), आम्बा हलदर (Amba haldar);

  • तमिलमान्काय्यीन्सी (Mankayyinci)

  • तेलुगुममिड़ी अल्लामु (Mamidi allamu);

  • नेपालीकालो बेसार (Kalo besar);

  • पंजाबीअंबिया हलदी (Ambia haldi);

  • बंगालीआम आदा (Aam aada);

  • मराठीअम्बाहलद (Amba halad), आंबा हलदी (Amba haldi);

  • मलयालममन्नायिनसी (Mannayinci)

  • अरबीदारूहल्दी (Daruhaladi); फारसीदारइल्द (Darild)

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आमा हल्दी   के द्रव्यगुण

  • रस (taste on tongue):- कसैली, खट्टी,

  • वीर्य (Potency): उष्ण तासीर वाली,

  • विपाक (transformed state after digestion):- दीपन एवं पाचक

  • स्वरूप :- यह एक पेड़ की जड़ है जो मिट्टी में उगती है

  • रंग : आंबा हल्दी (Amba haldi) लालिमा लिए हुए पीली रंग की होती है।

  • गुण (Pharmacological Action): वातानुलोमक, सुगन्धित, वायु को शांत करती है, पाचक है, पथरी को तोड़ने वाली, पेशाब की रुकावट को खत्म करने वाली,घाव और चोट में लाभ करने वाली, मंजन करने से मुंह के रोगों को खत्म करने वाली है। यह खांसी, सांस और हिचकी में लाभकारी होती है।

आमा हल्दी  के गुण : Properties of Aama Haldi

प्रकन्द अजीर्ण, जीर्ण व्रण, त्वक् रोग, श्वासनलिका शोथ, वातरक्त, विबन्ध, अतिसार, जीर्ण पूयमेह, कटिशूल, मुखरोग तथा कर्णरोग में हितकर है।

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आमा हल्दी  से विभिन्न रोगों का सफल उपचार : AAMA HALDI  benefits and Uses (labh) in Hindi

  1. उदररोग में आंबा हल्दी के फायदे :प्रकन्द का क्वाथ बनाकर उसमें आर्द्रक तथा काली मिर्च मिलाकर पिलाने से उदररोग में लाभ होता है।dcgyan

  2. प्रमेह में आंबा हल्दी के फायदे :3 ग्राम आम्रंधी हरिद्रा में समभाग तिल चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन प्रातकाल सेवन करने से तथा पथ्य पालन करने से प्रमेह में शीघ्र लाभ होता है।

  3. दंतशूल में आंबा हल्दी के फायदे :अकारकरभ, तुत्थ, अफीम तथा आम्रंधी हरिद्रा के चूर्ण से दाँतों का मर्दन करने से दंत गत वेदना का शमन होता है।teeth dard

  4. आमवात में आंबा हल्दी के फायदे :प्रकन्द को पीसकर गुनगुना करके जोड़ों में बाँधने से वेदना तथा शोथ का शमन होता है। 1 ग्राम कंद चूर्ण में समभाग गेहूँ का आटा, शर्करा तथा घृत मिलाकर, प्रतिदिन प्रातकाल, एक माह तक सेवन करने से आमवात में लाभ प्राप्त होता है।

  5. त्वचा रोग में आंबा हल्दी के फायदे : कंद को उष्ण जल से पीसकर, अभिघातजन्य शोथ, पामा, व्रण (मुख तथा शिश्न आदि पर उत्पन्न) तथा अन्य त्वचा रोगों में लेप करने से लाभ होता है।

  6. सूजन में आंबा हल्दी के फायदे : त्वचा पर यदि कहीं सूजन हो तो आंबा हल्दी के चूर्ण को एलोवेरा के गूदे में मिलाकर और कुछ गर्म करके सूजन वाले स्थान पर बाँधना चाहिए।

  7. घाव में आंबा हल्दी के फायदे :- शरीर पर यदि कहीं जख्म हो जाए तो आंबा हल्दी को फाहे पर रखकर जख्म पर बाँध देना चाहिए। घाव जल्दी भर जाता है।

  8. ज्वर में आंबा हल्दी के फायदे :- आँबा हल्दी 2 ग्राम, दो तीन नग काली मिर्च, आंवला का चूर्ण 2 ग्राम, सोंठ चूर्ण 2 ग्राम, हरड़ का छिलका 2 ग्राम, चीता और मीठा कूट 2-2 ग्राम, पीपल (छोटी) 2 ग्राम, सेंधा नमक 1 ग्राम, इन सभी को कूट-पीस लें और कपड़छन कर लें। किसी भी तरह का जाड़ा बुखार होने पर ताजे पानी से 1 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम रोगी को दें। बुखार जल्द उतर जाएगा।

  9. वात, कफ, पित्त में आंबा हल्दी के फायदे :- आंबा हल्दी का चूर्ण 2 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम ताजे पानी अथवा शहद से देने पर तीनों दोषों वात, कफ, पित्त यादि का शमन होता है। ‘खाँसी’ आदि में भी आराम मिलता है।

  10. जलशोफ प्रंद क्वाथ का सेवन करने से जलशोफ में लाभ होता है।

  11. चोट लगने पर :-

    • चोट सज्जी, अम्बा हल्दी 10-10 ग्राम को पानी में पीसकर कपड़े पर लगाकर चोट (मोच) वाले स्थान पर बांध दें। आंबा हल्दी को पीसकर, गरम करके बांधने से चोट को अच्छा करती है तथा सूजन दूर होती है।

    • पपड़िया कत्था 20 ग्राम अम्बा हल्दी 20 ग्राम कपूर, लौंग 3-3 ग्राम पानी में पीसकर चोट मोच पर लगाकर पट्टी बांध दें।

    • अम्बाहल्दी, मुरमक्की, मेदा लकड़ी 10-10 ग्राम लेकर पानी में पीसकर हल्का गर्म कर चोट पर लगायें।

12.गिल्टी (ट्यूमर) :-

  • आमाहल्दी, अलसी, घीग्वार का गूदा और ईसबगोल को पीसकर एक साथ मिलाकर आग पर गर्म करने के बाद गिल्टी पर लगाने से लाभ होता है और सूजन मिट जाती है।

  • 10 ग्राम आमाहल्दी, 6 ग्राम नीलाथोथा, 10 ग्राम राल, 6 ग्राम गूगल और 10 ग्राम गुड़ इसमें से सूखी वस्तुओं को पीसकर और उसमें गुड़ मिलाकर बांधें तो आराम होगा और जल्द ही फूट जायेगा।

  • आमाहल्दी, चूना और गुड़ सबको एक ही मात्रा में लेकर पीसे और बद पर लेप कर दें। इससे गिल्टी जल्द फूट जायेगी।

  1. . उपदंश (फिरंग) के रोग में :- आमाहल्दी, राल और गुड़ 10-10 ग्राम, नीलाथोथा और गुग्गुल 6-6 ग्राम इन सबको मिलाकर पीस लें और बद पर बांधे इससे तुरन्त लाभ मिलता है।

  2. पीलिया रोग :- सात ग्राम आमाहल्दी का चूर्ण, पांच ग्राम सफेद चंदन का चूर्ण , शहद में मिलाकर सुबह और शाम सात दिन तक खाने से पीलिया रोग मिट जाता है।

  3. खाजखुजली :- आमाहल्दी को पीसकर शरीर में जहां पर खाज-खुजली हो वहां पर लगाने से आराम आता है।

प्रयोज्याङ्ग  :- प्रकन्द।

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आमा हल्दी  के सेवन की मात्रा (How Much to Consume AAMA HALDI ?)

मात्रा  : चूर्ण 2-4 ग्राम। चिकित्सकीय परामर्शानुसार।

काढ़ा15-30 मिली

आमा हल्दी  के सेवन का तरीका (How to Use AAMA HALDI ?)

  • काढ़ा

  • रस

  • चूर्ण

आमा हल्दी  के नुकसान :Side Effects of AAMA HALDI

हल्दी स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती है, इस बात में कोई शक नहीं है, लेकिन हल्दी की अधिक खुराक या ज्यादा समय तक उपयोग कुछ प्रकार के दुष्प्रभावों का कारण बन सकता है, तो चलिए जानते हैं हल्दी के साइड इफेक्ट के बारे में जो निम्न हैं-

  1. आमा हल्दी का लंबे समय तक सेवन आपके पेट को खराब कर सकता है।

  2. हल्दी के ज्यादा या फिर ज्यादा दिनों तक सेवन करने से रक्तस्राव के शिकार हो सकते है।

  3. आमा हल्दी से कीमोथेरेपी पर प्रभाव हो सकता है, इसलिए कीमोथेरेपी उपचार के दौरान हल्दी के उपयोग से बचना चाहिए।

  4. हल्दी का प्रयोग पित्त या पित्त रुकावट से पीड़ित लोगों द्वारा नहीं किया जाना चाहिए।

आमा हल्दी  कहाँ पे पाया या उगाया जाता है (Where is AAMA HALDI  Found or Grown?)

भारत के समस्त प्रान्तों में इसकी खेती की जाती है। पंसारी यानि कि जड़ी बूटी विक्रेता के पास मिल जाती है।

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