अश्वगंधा के फायदे और नुकसान | Ashwagandha ke fayde | health benefits of Ashwagandha in hindi

अश्वगंधा के फायदे और नुकसान | Ashwagandha ke fayde | health benefits of Ashwagandha in hindi

अश्वगंधा परिचय :-

अश्वगंधा एक जड़ी-बूटी है। अश्वगंधा का प्रयोग कई रोगों में किया जाता है। क्‍या आप जानते हैं कि मोटापा घटाने, बल और वीर्य विकार को ठीक करने के लिए अश्वगंधा का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा अश्वगंधा के फायदे और भी हैं। अश्वगंधा के अनगिनत फायदों के अलावा अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से अश्वगंधा के नुकसान से सेहत के लिए असुविधा उत्पन्न हो सकता है।

अश्वगंधा क्या है (What is Ashwagandha?)

अलग-अलग देशों में अश्‍वगंधा कई प्रकार की होती है, लेकिन असली अश्वगंधा की पहचान करने के लिए इसके पौधों को मसलने पर घोड़े के पेशाब जैसी गंध आती है। अश्वगंधा की ताजी जड़ में यह गंध अधिक तेज होती है। वन में पाए जाने वाले पौधों की तुलना में खेती के माध्‍यम से उगाए जाने वाले अश्‍वगंधा की गुणवत्‍ता अच्‍छी होती है। तेल निकालने के लिए वनों में पाया जाने वाला अश्‍वगंधा का पौधा ही अच्‍छा माना जाता है। इसके दो प्रकार हैं-

छोटी असगंध (अश्वगंधा)

इसकी झाड़ी छोटी होने से यह छोटी असगंध कहलाती है, लेकिन इसकी जड़ बड़ी होती है। राजस्‍थान के नागौर में यह बहुत अधिक पाई जाती है और वहां के जलवायु के प्रभाव से यह विशेष प्रभावशाली होती है। इसीलिए इसको नागौरी असगंध भी कहते हैं।

बड़ी या देशी असगंध (अश्वगंधा)

इसकी झाड़ी बड़ी होती है, लेकिन जड़ें छोटी और पतली होती हैं। यह बाग-बगीचों, खेतों और पहाड़ी स्थानों में सामान्य रूप में पाई जाती है। असगंध में कब्‍ज गुणों की प्रधानता होने से और उसकी गंध कुछ घोड़े के पेशाब जैसी होने से संस्कृत में इसकी बाजी या घोड़े से संबंधित नाम रखे गए हैं। 

बाजार में अश्‍वगंधा की दो प्रजातियां मिलती हैं :

पहली मूल अश्‍वगंधा Withania somnifera (Linn.) Dunal, जो 0.3-2 मीटर ऊंचा, सीधा, धूसर रंग का घनरोमश तना वाला होता है।

दूसरी काकनज Withania coagulans (Stocks) Duanl, जो लगभग 1.2 मीटर तक ऊंचा, झाड़ीदार तना वाला होता है।

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अनेक भाषाओं में अश्वगंधा के नाम (ASHWAGANDHA Called in Different Languages)

  • हिंदी :– अश्वगंध , अश्वगन्धा, पुनीर, नागोरी असगन्ध ;

  • संस्कृत नाम :– वराहकर्णी, वरदा, बलदा, कुष्ठगन्धिनी, अश्वगंधा ;

  • English :– Winter cherry (विंटर चेरी), पॉयजनस गूज्बेर्री (Poisonous gooseberry)

  • Scientific Names :– Withania somnifera (विथेनिआ सॉम्नीफेरा)

  • Oriya – असुंध (Asugandha)

  • Urdu – असगंधनागोरी (Asgandanagori)

  • Kannada – अमनगुरा (Amangura), विरेमङड्लनागड्डी (Viremaddlnagaddi)

  • Gujarati – आसन्ध (Aasandh), घोडासोडा (Ghodasoda), असोड़ा (Asoda)

  • Tamil – चुवदिग (Chuvdig), अमुक्किरा (Amukkira), अम्कुंग (Amkulang)

  • Telugu – पैन्नेरुगड्डु (Panerugaddu), आंड्रा (Andra), अश्वगन्धी (Ashwagandhi)

  • Bengali – अश्वगन्धा (Ashwagandha)

  • Nepali – अश्वगन्धा (Ashwagandha)

  • Punjabi – असगंद (Asgand)

  • Malyalam – अमुक्कुरम (Amukkuram)

  • Marathi (ashwagandha in marathi) – असकन्धा (Askandha), टिल्लि (Tilli)

  • Arabic – तुख्मे हयात (Tukhme hayat), काकनजे हिन्दी (Kaknaje hindi)

  • Farasi – मेहरनानबरारी (Mehernanbarari), असगंध-ए-नागौरी (Ashgandh-e-nagori)

अश्वगंधा  के द्रव्यगुण

  • रस (taste on tongue):- तिक्त, कटु

  • गुण (Pharmacological Action): गुरु/भारी,

  • वीर्य (Potency): शीत

  • विपाक (transformed state after digestion):- मधुर और उष्ण वीर्य
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अश्वगंधा के गुण : Properties of Ashwagandha

  1. अश्वगंधा हलकी, स्निग्ध, तिक्त, कटु व मधुर रस युक्त है।

  2. यह विपाक में मधुर और उष्ण वीर्य है।

  3. अश्वगंधा अत्यन्त शुक्रवर्द्धक, बलवर्द्धक, रसायन है।

  4. यह कड़वी, कसैली, गर्म तथा वात-कफ का शमन करने वाली है।

  5. अश्वगंधा शोथ,क्षय और श्वेत कुष्ट का नाश करने वाली औषधि है।

  6. यह शरीर को पुष्ट तथा सुडौल करने वाली चमत्कारी वनस्पति है।

अश्वगंधा का रासायनिक विश्लेषण : Ashwagandha Chemical Constituents

अश्वगन्धा की जड़ से Cuseohygrine, anahygrine, tropine, anaferine आदि 13 क्षाराभ निकाले गये हैं। कुल क्षाराभ 0.13 से 0.31% होता है।

इसके अतिरिक्त अश्वगन्धा की जड में ग्लाइकोसाइड, विटानिआल, अम्ल, स्टार्च, शर्करा व एमिनो एसिड आदि तत्व पाये जाते हैं।

अश्वगंधा से विभिन्न रोगों का सफल उपचार : Ashwagandha benefits and Uses (labh) in Hindi

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सफेद बाल की समस्या में अश्वगंधा के फायदे (Use Ashwagandha Powder to Stop Gray Hair Problem in Hindi)

2-4 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण (Ashgandha Churn benefits) का सेवन करें। अश्वगंधा के फायदे (ashwagandha benefits in hindi)के वजह से समय से पहले बालों के सफेद होने की समस्या ठीक होती है।

आंखों की ज्‍योति बढ़ाए अश्‍वगंधा  (Ashwagandha Benefits in Increasing Eyesight in Hindi)

2 ग्राम अश्‍वगंधा, 2 ग्राम आंवला (धात्री फल) और 1 ग्राम मुलेठी को आपस में मिलाकर, पीसकर अश्वगंधा चूर्ण कर लें। एक चम्मच अश्वगंधा चूर्ण को सबह और शाम पानी के साथ सेवन करने से आंखों की रौशनी बढ़ती है। अश्वगंधा के फायदे (ashwagandha benefits in hindi) के कारण आँखों को आराम मिलता है।

स्तनों में दूध वृद्धि करने में अश्‍वगंधा के प्रयोग से लाभ (Ashwagandha Powder Helps to Increase Breast Milk in Hindi)dcgyan

अश्वगन्धा, शतावर, विदारीकन्द और मुलहठी- सबका महीन पिसा हुआ चूर्ण समान मात्रा में ले कर मिला लें। एक चम्मच चूर्ण सुबह शाम दूध के साथ सेवन करते रहने से कुछ दिनों में, स्तनों में दूध की मात्रा बढ़ जाती है।

प्रजनन शक्ति बढ़ाने मे मदद करता है अश्वगंधा का सेवन (Ashwagandha Helps in Pregnancy Problem in Hindi)

डिम्ब की निर्बलता से कुछ स्त्रियां गर्भ धारण नहीं कर पातीं। ऐसी स्त्रियों को मासिक ऋतु स्राव शुरू होने के 3 दिन बाद से यह नुस्खा 7 दिन तक सेवन करना चाहिए-

दस ग्राम अश्वगंधा ज़रा से घी में, मन्दी आंच पर अच्छे से सेक लें फिर एक गिलास उबलते दूध में डाल कर 15-20 मिनिट तक उबालें। इसके बाद उतार लें। इसमें मिश्री मिला कर सुबह के समय खाली पेट कुनकुना गर्म पी लें। इस प्रयोग को लाभ न होने तक प्रति मास 7 दिन तक इसी ढंग से सेवन करते रहना चाहिए।

वात रोग में लाभकारी है अश्वगंधा का प्रयोग (Ashwagandha Uses in Getting Relief from Arthritis in Hindi)

अपच और क़ब्ज़ होने पर वात कुपित होता है और वात प्रकोप उत्पन्न होने वाली व्याधियों से शरीर पीड़ित होने लगता है। वात प्रकोप का शमन करने में अश्वगंधा बेजोड़ है। वात प्रकोप का शमन करने में ‘अश्वगन्धादि घृत’ का प्रयोग बहुत गुणकारी सिद्ध होता है। एक-एक चम्मच घृत सुबह शाम दूध में डाल कर पीना चाहिए या असगन्ध, शतावर व मिश्री- समान मात्रा में ले कर पीस लें और मिला लें। इस चूर्ण को 1-1 चम्मच मात्रा में दूध के साथ सुबह शाम लेना चाहिए। दोनों में से किसी भी एक प्रयोग से वात प्रकोप के कारण उत्पन्न होने वाले सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

गर्भवती की कमजोरी मिटाए अश्वगंधा का उपयोग

गर्भवती स्त्री का शरीर कमज़ोर हो तो गर्भस्थ शिशु भी कमज़ोर होता है। सुबह एक कप पानी में 10 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण डाल कर उबालें। जब पानी पाव कप (चौथाई भाग) बचे तब छान कर एक चम्मच शक्कर या पिसी मिश्री डाल कर पी लें। यह प्रयोग 2-3 माह तक लगातार करने से गर्भवती और गर्भ दोनों को ही बल-पुष्टि प्राप्त होती है।

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शुक्रक्षीणता मिटाए अश्वगंधा चूर्ण का उपयोग

अधिक भोग विलास या अविवाहित जीवन में लम्बे समय तक हस्तमैथुन द्वारा या अन्य तरीकों से शुक्र का नाश करने से शरीर की धातुएं क्षीण हो जाती हैं जिसका परिणाम शुक्र क्षीणता होना होता है। इस स्थिति को ठीक करने के लिए यह नुस्खा विवाहित पुरुषों को सेवन करना चाहिए-

अश्वगन्धा चूर्ण 1 चम्मच, पिसी मिश्री आधा चम्मच, पिप्पली चूर्ण पाव चम्मच, आधा चम्मच घी और डेढ़ चम्मच शहद- सबको मिला कर चाट लें और ऊपर से, अश्वगंधा चूर्ण एक चम्मच व घी एक चम्मच डाल औंटाया हुआ एक गिलास मीठा दूध बिल्कुल ठण्डा करके पिएं। यह प्रयोग सिर्फ़ सुबह खाली पेट 3-4 माह तक करें । शुक्र क्षीणता दूर हो जाएगी।

शीघ्रपतन में लाभकारी है अश्वगंधा चूर्ण का सेवन

जिन नवविवाहित युवकों अथवा प्रौढ़ विवाहित पुरुषों को शीघ्रपतन की शिकायत हो उन्हें यह नुस्खा 3 से 4 माह तक लगातार सेवन करते रहना चाहिए-

अश्वगन्धा , विधायरा, तालमखाना, मुलहठी और मिश्री – सब 100-100 ग्राम खूब कूट पीस कर कपड़ छन महीन चूर्ण करके मिला लें और तीन बार छान कर शीशी में भर कर एयरटाइट ढक्कन लगाएं । यह चूर्ण एक चम्मच, ज़रा से घी या शहद में मिला कर चाट लें। यदि घी लें तो कुनकुना गर्म दूध पी लें और शहद के साथ लें तो दूध ठण्डा करके ही पिएं। यह एक बहत अच्छा और परीक्षित नुस्खा है।

शुक्र वृद्धि व पुष्टि में अश्वगंधा चूर्ण का उपयोग फायदेमंद

युवा एवं प्रौढ़, अविवाहित एवं विवाहित पुरुषों को वीर्य वृद्धि, वीर्य पुष्टि, शरीर पुष्टि, शक्ति और चुस्ती फुर्ती के लिए कम से कम 3 माह तक यह नुस्खा लेना चाहिए । एक चम्मच अश्वगन्धा चूर्ण महीन पिसा हुआ, आधा चम्मच शुद्ध घृत और घृत से तिगुना शहद – तीनों को मिला कर सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले चाट कर मीठा ठण्डा दूध पीना चाहिए। यह प्रयोग पूरे शीतकाल के दिनों में तो अवश्य ही करना चाहिए। दुबले-पतले, पिचके गाल, धंसी हुई आंखों वाले युवक-युवतियों के लिए यह नुस्खा एक वरदान है। अविकसित स्तनों वाली युवतियों को यह नुस्खा 3-4 माह तक सेवन करना चाहिए। उनके स्तन सुविकसित और सुडौल हो जाएंगे।

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गले के रोग (गलगंड) में अश्वगंधा के पत्ते के फायदे (Ashwagandha Uses to Cure Goiter in Hindi)

अश्वगंधा के फायदे के कारण और औषधीय गुणों के वजह से अश्वगंधा गले के रोग में लाभकारी सिद्ध होता है।

अश्‍वगंधा पाउडर (ashwagandha powder benefits) तथा पुराने गुड़ को बराबार मात्रा में मिलाकर 1/2-1 ग्राम की वटी बना लें। इसे सुबह-सुबह बासी जल के साथ सेवन करें। अश्‍वगंधा के पत्‍ते का पेस्‍ट तैयार करें। इसका गण्डमाला पर लेप करें। इससे गलगंड में लाभ होता है।

टीबी रोग में अश्वगंधा चूर्ण के उपयोग (Ashwagandha Benefits in Tuberculosis (T.B.) Treatment in Hindi)

अश्‍वगंधा चूर्ण की 2 ग्राम मात्रा को असगंधा के ही 20 मिलीग्राम काढ़े के साथ सेवन करें। इससे टीबी में लाभ होता है। अश्‍वगंधा की जड़ से चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की 2 ग्राम लें और इसमें 1 ग्राम बड़ी पीपल का चूर्ण, 5 ग्राम घी और 5 ग्राम शहद मिला लें। इसका सेवन करने से टीबी (क्षय रोग) में लाभ होता है।

अश्वगंधा के इस्तेमाल से खांसी का इलाज (Ashwagandha Uses in Getting Relief from Cough in Hindi)

असगंधा की 10 ग्राम जड़ों को कूट लें। इसमें 10 ग्राम मिश्री मिलाकर 400 मिलीग्राम पानी में पकाएं। जब इसका आठवां हिस्सा रह जाए तो आंच बंद कर दें। इसे थोड़ा-थोड़ा पिलाने से कुकुर खांसी या वात से होने वाले कफ की समस्या में विशेष लाभ होता है।

असगंधा के पत्तों से तैयार 40 मिलीग्राम गाढ़ा काढ़ा लें। इसमें 20 ग्राम बहेड़े का चूर्ण, 10 ग्राम कत्था चूर्ण, 5 ग्राम काली मिर्च तथा ढाई ग्राम सैंधा नमक मिला लें। इसकी 500 मिलीग्राम की गोलियां बना लें। इन गोलियों को चूसने से सब प्रकार की खांसी दूर होती है। टीबी के कारण से होने वाली खांसी में भी यह विशेष लाभदायक है। अश्वगंधा के फायदे खांसी से आराम दिलाने में उपचारस्वरुप काम करता है।

पेट की बीमारी में अश्वगंधा चूर्ण के उपयोग (Ashwagandha Churna Cures Abdominal or Intestinal Worms in Hindi)

अश्वगंधा चूर्ण के फायदे (ashwagandha benefits in hindi) आप पेट के रोग में भी ले सकते हैं। पेट की बीमारी में आप अश्वगंधा चूर्ण का प्रयोग कर सकते हैं। अश्‍वगंधा चूर्ण में बराबर मात्रा में बहेड़ा चूर्ण मिला लें। इसे 2-4 ग्राम की मात्रा में गुड़ के साथ सेवन करने से पेट के कीड़े खत्म  होते हैं। 

अश्‍वगंधा चूर्ण में बराबर भाग में गिलोय का चूर्ण मिला लें। इसे 5-10 ग्राम शहद के साथ नियमित सेवन करें। इससे पेट के कीड़ों का उपचार होता है। 

छाती के दर्द में अश्वगंधा के लाभ (Ashwagandha Powder Helps getting Relief from Chest Pain in Hindi)

अश्‍वगंधा की जड़ का चूर्ण 2 ग्राम की मात्रा का जल के साथ सेवन करें। इससे सीने के दर्द में लाभ (ashwagandha powder benefits) होता है।

अश्‍वगंधा चूर्ण के उपयोग से कब्‍ज की समस्या का इलाज (Ashwagandha Powder Benefits in Fighting with Constipation in Hindi)dast,constipation constipation remedy constipation pain constipation causes constipation definition constipation in kids constipation and gas constipation and vomiting constipation a sign of labor constipation a sign of constipation cause fever constipation ease constipation enema constipation exercises constipation effects constipation education constipation face constipation hard stool

अश्वगंधा चूर्ण या अश्वगंधा पाउडर की 2 ग्राम मात्रा को गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से कब्‍ज की परेशानी से छुटकारा मिलता है।

गर्भधारण करने में अश्‍वगंधा के प्रयोग से लाभ (Ashwagandha Churna Helps in Pregnancy Problem in Hindi)

  • 20 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण को एक लीटर पानी तथा 250 मिलीग्राम गाय के दूध में मिला लें। इसे कम आंच पर पकाएं। जब इसमें केवल दूध बचा रह जाय तब इसमें 6 ग्राम मिश्री और 6 ग्राम गाय का घी मिला लें। इस व्‍यंजन का मासिक धर्म के शुद्धिस्नान के तीन दिन बाद, तीन दिन तक सेवन करने से यह गर्भधारण में सहायक (ashwagandha ke fayde) होता है।

  • अश्वगंधा चूर्ण के फायदे गर्भधारण की समस्या में भी मिलते हैं। अश्वगंधा पाउडर को गाय के घी में मिला लें। मासिक-धर्म स्‍नान के बाद हर दिन गाय के दूध के साथ या ताजे पानी से 4-6 ग्राम की मात्रा में इसका सेवन लगातार एक माह तक करें। यह गर्भधारण में सहायक होता है।

  • असगंधा और सफेद कटेरी की जड़ लें। इन दोनों के 10-10 मिलीग्राम रस का पहले महीने से पांच महीने तक की गर्भवती स्त्रियों को सेवन करने से अकाल में गर्भपात नहीं होता है।

ल्यूकोरिया के इलाज में अश्‍वगंधा से फायदा (Ashwagandha Root Benefits to Cure Leukorrhea in Hindi)dcgyan

2-4 ग्राम असगंधा की जड़ के चूर्ण (ashwagandha powder benefits) में मिश्री मिला लें। इसे गाय के दूध के साथ सुबह और शाम सेवन करने से ल्यूकोरिया में लाभ होता है।

अश्‍वगंधा, तिल, उड़द, गुड़ तथा घी को समान मात्रा में लें। इसे लड्डू बनाकर खिलाने से भी ल्यूकोरिया में फायदा होता है।

इंद्रिय दुर्बलता (लिंग की कमजोरी) दूर करता है अश्‍वगंधा का प्रयोग (Ashwagandha Powder Uses in Penis Weakness Problem in Hindi)

असगंधा के चूर्ण को कपड़े से छान कर (कपड़छन चूर्ण) उसमें उतनी ही मात्रा में खांड मिलाकर रख लें। एक चम्मच की मात्रा में लेकर गाय के ताजे दूध के साथ सुबह में भोजन से तीन घंटे पहले सेवन करें।

रात के समय अश्‍वगंधा की जड़े के बारीक चूर्ण को चमेली के तेल में अच्छी तरह से घोंटकर लिंग में लगाने से लिंग की कमजोरी या शिथिलता (ashwagandha ke fayde) दूर होती है।

असगंधा, दालचीनी और कूठ को बराबर मात्रा में मिलाकर कूटकर छान लें। इसे गाय के मक्खन में मिलाकर सुबह और शाम शिश्‍न (लिंग) के आगे का भाग छोड़कर शेष लिंग पर लगाएं। थोड़ी देर बाद लिंग को गुनगुने पानी से धो लें। इससे लिंग की कमजोरी या शिथिलता दूर होती है।

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चोट लगने पर करें अश्‍वगंधा का सेवन (Uses of Ashwagandha in Injury in Hindi)

अश्वगंधा पाउडर में गुड़ या घी मिला लें। इसे दूध के साथ सेवन करने से शस्‍त्र के चोट से होने वाले दर्द में आराम मिलता है।

अश्वगंधा का गुम गठिया के इलाज के लिए फायदेमंद (Ashwagandha Benefits in Getting Relief from Arthritis in Hindi)

  • 2 ग्राम अश्वगंधा पाउडर को सुबह और शाम गर्म दूध या पानी या फिर गाय के घी या शक्‍कर के साथ खाने से गठिया में फायदा (ashwagandha ke fayde) होता है।

  • इससे कमर दर्द और नींद न आने की समसया में भी लाभ होता है।

  • असगंधा के 30 ग्राम ताजा पत्तों को, 250 मिलीग्राम पानी में उबाल लें। जब पानी आधा रह जाए तो छानकर पी लें। एक सप्ताह तक पीने से कफ से होने वाले वात तथा गठिया रोग में विशेष लाभ होता है। इसका लेप भी लाभदायक है।

अश्वगंधा के सेवन से दूर होती है शारीरिक कमजोरी (Ashwagandha Uses to Cure Body Weakness in Hindi)

  • 2-4 ग्राम अश्‍वगंधा चूर्ण को एक वर्ष तक बताई गई विधि से सेवन करने से शरीर रोग मुक्‍त तथा बलवान हो जाता है।

  • 10-10 ग्राम अश्‍वगंधा चूर्ण, तिल व घी लें। इसमें तीन ग्राम शहर मिलाकर जाड़े के दिनों में रोजाना 1-2 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से शरीर मजबूत बनता है।

  • 6 ग्राम असगंधा चूर्ण में उतने ही भाग मिश्री और शहद मिला लें। इसमें 10 ग्राम गाय का घी मिलाएं। इस मिश्रण को 2-4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम शीतकाल में 4 महीने तक सेवन करने से शरीर का पोषण होता है।

  • 3 ग्राम असगंधा मूल चूर्ण को पित्त प्रकृति वाला व्‍यक्ति ताजे दूध (कच्चा/धारोष्ण) के साथ सेवन करें। वात प्रकृति वाला शुद्ध तिल के साथ सेवन करें और कफ प्रकृति का व्‍यक्ति गुनगुने जल के साथ एक साल तक सेवन करें। इससे शारीरिक कमोजरी दूर (ashwagandha ke fayde) होती है और सभी रोगों से मुक्ति मिलती है।

  • 20 ग्राम असगंधा चूर्ण, तिल 40 ग्राम और उड़द 160 ग्राम लें। इन तीनों को महीन पीसकर इसके बड़े बनाकर ताजे-ताजे एक महीने तक सेवन करने से शरीर की दुर्बलता खत्‍म हो जाती है।

  • असगंधा की जड़ और चिरायता को बराबर भाग में लेकर अच्‍छी तरह से कूट कर मिला लें। इस चूर्ण को 2-4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से शरीर की दुर्बलता खत्‍म (ashwagandha ke fayde) हो जाती है।

  • एक ग्राम असगंधा चूर्ण में 125 मिग्रा मिश्री डालकर, गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से वीर्य विकार दूर होकर वीर्य मजबूत होता है तथा बल बढ़ता है।   

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अश्‍वगंधा के प्रयोग से त्‍वचा रोग का इलाज (Benefits of Ashwagandha in Treating Skin Diseases in Hindi)

अश्‍वगंधा के पत्‍तों का पेस्‍ट तैयार लें। इसका लेप या पत्‍तों के काढ़े से धोने से त्वचा में लगने वाले कीड़े ठीक होते है। इससे मधुमेह से होने वाले घाव तथा अन्‍य प्रकार के घावों का इलाज होता है। यह सूजन को दूर करने में लाभप्रद होता है।

अश्‍वगंधा की जड़ को पीसकर, गुनगुना करके लेप करने से विसर्प रोग की समस्‍या में लाभ (ashwagandha ke fayde) होता है।

बुखार उतारने के लिए करें अश्‍वगंधा का प्रयोग (Uses of Ashwagandha in Fighting with Fever in Hindi)

2 ग्राम अश्‍वगंधा चूर्ण तथा 1 ग्राम गिलोय सत् (जूस) को मिला लें। इसे हर दिन शाम को गुनगुने पानी या शहद के साथ खाने से पुराना बुखार ठीक होता है।

रक्त विकार में अश्‍वगंधा के चूर्ण से लाभ (Benefits of Ashwagandha in Blood Related Disorder in Hindi)

अश्वगंधा पाउडर में बराबर मात्रा में चोपचीनी चूर्ण या चिरायता का चूर्ण मिला लें। इसे 3-5 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम सेवन करने से खून में होने वाली समस्‍याएं ठीक होती हैं। 

 

अश्वगंधा का उपयोगी भाग : Beneficial Part of Ashwagandha Plant in Hindi

अश्वगंधा की जड़ प्रयोग की जाती है।

अश्वगंधा के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Ashwagandha

  • अश्वगन्धा के चूर्ण को आधे से एक चम्मच (3 ग्राम से 6 ग्राम)

  • इसके काढ़े की मात्रा 4-4 चम्मच सुबह शाम लेना चाहिए।

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अश्वगंधा के सेवन का तरीका (How to Use Ashwagandha?)

  • अश्वगन्धा विविध हेतुओं के लिए कई व्याधियों को दूर करने के अलावा स्वास्थ्य की रक्षा और शरीर को सबल, पुष्ट और सुडौल बनाने के लिए बहुत गुणकारी सिद्ध होता है।

  • इसके उपयोग का विवरण सुश्रुत संहिता, चरक संहिता आदि आयर्वेदिक शास्त्रों में कई जगह पढने को मिलता है।

  • आयुर्वेद ने अश्वगन्धा का उपयोग वीर्यवर्द्धक, मांसवर्द्धक, स्तन्यवर्द्धक, गर्भधारण में सहायक, वात रोग नाशक, शूल नाशक तथा यौन शक्ति वर्द्धक माना है।

  • यहां अश्वगन्धा के परीक्षित, सफल सिद्ध और लाभकारी चुनिन्दा प्रयोग प्रस्तुत किये जा रहे हैं।

अश्वगंधा के नुकसान :Side Effects of Ashwagandha

आयुर्वेद मतानुसार, अश्वगंधा के ये नुकसान भी हो सकते है –

जिनकी प्रकृति गर्म है उनके लिए अश्वगंधा का अधिक मात्रा में सेवन करना हानिकारक होता है।

दोषों को दूर करने के लिए : इसके दोषों को दूर करने के लिए घी ,कतीरा व गोंद का उपयोग करना चाहिये ।

(दवा ,उपाय व नुस्खों को वैद्यकीय सलाहनुसार उपयोग करें)

अश्वगंधा कहाँ पे पाया या उगाया जाता है (Where is Ashwagandha Found or Grown?)

अश्वगंधा का पौधा आम तौर पर देश के सभी भागों में पैदा होता है पर मध्यप्रदेश के मन्दसौर जिले की मनासा तहसील क्षेत्र में इसकी इतनी पैदावार होती है कि इसकी सारी मांग की पूर्ति इसी क्षेत्र की फसल से होती है।

इसके बीज वर्षा काल में बोये जाते हैं, शरद ऋतु में फूल आते हैं और शीतकाल में फल आते हैं। इसकी फसल शीतकाल में निकाल ली जाती है।

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