अतीस के फायदे और नुकसान | Atish ke fayde | health benefits of Atees in hindi

अतीस के फायदे और नुकसान | Atish ke fayde | health benefits of Atees in hindi

(Atish )अतीस परिचय :-

अतीस वनौषधि का ज्ञान हमारे आचार्यों को अत्यन्त प्राचीनकाल से था। प्राय: समस्त रोग को दूर करने वाली होने से यह विश्वा या अतिविश्वा के नाम से वेदों में प्रसिद्ध है। यजुर्वेद अ. 12 मत्र 84 अतिविश्वा परिष्ठास्तेनइत्यादि जो ऋचा है, उसमें अतिविश्वाशब्द अतीस के लिए लिया गया है। चरक संहिता के लेखनीय, अर्शोघ्न इत्यादि प्रकरणों में तथा आमातिसार के प्रयोगों में इसका उल्लेख पाया जाता है। सुश्रुत के शिरोविरेचन अध्याय तथा वचादि, पिप्पल्यादि व मुस्तादिगण में भी इसका उल्लेख है।

इस बूटी की विशेषता यह है कि यह विष वर्ग वत्सनाभ कुल की होने पर भी विषैली नहीं है। इसके ताजे पौधों का जहरीला अंश केवल छोटे जीव जन्तुओं के लिए प्राणघातक है। यह विषैला प्रभाव भी इसके सूख जाने पर  ज्यादातर उड़ जाता है। छोटे-छोटे बालकों को भी दिया जा सकता है। परन्तु इसमें एक दोष है कि उसमें दो महीने बाद ही घुन लग जाता है।

अतीस क्या है (What is Atish?)

इसके पौधे हिमालय में कुमायू से हसोरा तक, शिमला और उसके आस-पास तथा चम्बा में बहुत होते हैं । इसका पौधा एक से तीन फुट तक ऊँचा होता हैं। उसकी डण्डी सीधी और पत्तेदार होती है, इसके पत्ते दो से चार इञ्च तक चौड़े और नोकदार होते हैं । डण्डों की जड़ से शाखाएँ निकलती हैं। इसके पुष्प बहुत लगते हैं। वे एक या डेढ़ इञ्च लम्बे, चमकदार, नीले या पीले, कुछ हरे रङ्ग के बैगनी धारी वाले होते हैं। इसके बीज चिकने-छाल वाले और नोकदार होते हैं। इसके नीचे डेढ़ दो इञ्च लम्बा और प्रायः आधा इञ्च मोटा कन्द निकलता है । इसी को अतीत कहते हैं ।

इसका आकार हाथी की सूड़ के सदृश होता है जो ऊपर से मोटा और नीचे की ओर से पतला होता चला आता है । यह बाहर से खाकी और भीतर से सफेद रङ्ग का होता है । इसका स्वाद कसेला होता है । अतीस सफेद, काला और लान तीन प्रकार का होता है । इसमें से सफेद अधिक गुणकारी होता है ।

अनेक भाषाओं में अतीस के नाम (Atish Called in Different Languages)

  • हिंदी :– अतीस

  • संस्कृत नाम :– विषा, अतिविषा,

  • English :– Atees

  • Scientific Names :– इण्डियन अतीस (Indian Atees)

  • Urdu :– अतीस (Atis);

  • Uttrakhand :– अतीस (Atis);

  • Kannada :– अतिविषा (Ativisha), अतिबजे (Atibaje);

  • Gujrati :– अतिवखानी कले (Ativakhanikali);

  • Tamil :– अतिविदायम (Atividayam);

  • Telegu :– अतिवसा (Ativasa);

  • Bengali :– अताइच (Ataich);

  • Nepali :– विषा (Visha), बिख (Bikh);

  • Panjabi :– चितिजारी (Chitijari), बोंगा (Bonga), पतीस (Patis);

  • Malayalam :– अतिविषा (Ativisha), अतिविदायम (Atividayam);

  • Marathi :– अतीविष (Ativisha)

  • Arbi :– अतीस (Atis);

  • Persian :– वाजे-तुर्की (Vajje-turki), वज तुर्की (Vaj-turki)

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अतीस  के द्रव्यगुण

  • रस (taste on tongue):- चरपरा, कड़वा,

  • गुण (Pharmacological Action): गुरु/भारी,

  • वीर्य (Potency): गरम,

  • विपाक (transformed state after digestion):- पाचक, जठराग्नि को दीपन करने वाला

अतीस के गुण : Properties of Atish

रासायनिक विश्लेषण इसके अन्दर अतिसीन ( Atisine ) और एकोनाइटिक एसिड ( Aconitic Acid ) तथा टेनिन एसिड नामक क्षार और आलीइक, पामीटिक, स्टीयरिक, ग्लिसराइट्स सुगर और वानस्पतिक लुआब इत्यादि द्रव्य होते हैं ।

आयुर्वेदिक मत भावप्रकाश के मतानुसार अतीस गरम, चरपरा, कड़वा, पाचक, जठराग्नि को दीपन करने वाला तथा कफ, पित्त, अतिसार, आम, विष, खांसी और कृमिरोग को नष्ट करने वाला है।

निघण्टु रत्नाकर के मतानुसार अतीस किञ्चित् उष्ण, कड़वा, अग्निदीपक, ग्राही, त्रिदोष-पाचक तथा कफ, पित्त, ज्वर, आमातिसार, खांसी, विष, यकृत, वमन, तृषा, कृमि, बवासीर, पीनस, पित्तोदर और सर्व प्रकार की व्याधि को नष्ट करने वाला है ।

यूनानी मत यूनानी मत के अनुसार यह दूसरी कक्षा में गर्म और पहली कक्षा में रूक्ष है।

 यह काबिज और अमाशय के लिए हानिकारक है ।

इसके अतिरिक्त यह कामोद्दीपक, क्षुधावर्धक, ज्वरप्रतिरोधक, कफ तथा पित्तजन्य विकारों को नाश करने वाला तथा बवासीर, जलोदर, वमन और अतिसार में लाभ करने वाला है ।

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अतीस से विभिन्न रोगों का सफल उपचार : ATISH benefits and Uses (labh) in Hindi

उल्टी में फायदेमंद अतीस (Ativisha to Relieves Vomiting in Hindi)

अगर मसालेदार खाना खाने या किसी बीमारी के साइड इफेक्ट के वजह से उल्टी हो रही है तो अतीस (Atees)का सेवन इस तरह से करने पर फायदा (ativisha benefits in hindi) मिलता है।aalubukhara

2 ग्राम नागकेशर और 1 ग्राम अतीस के चूर्ण को खाने से उल्टी बंद होती है।

लाल चंदन, खस, नेत्रवाला, कुटज की छाल, पाठा, कमल, धनिया, गिलोय, चिरायता, नागरमोथा, कच्चाबेल, अतीस तथा सोंठ इन औषधियों से बनाए काढ़े में मधु मिलाकर पीने से उल्टी से जल्दी आराम मिलता है।

हजम शक्ति बढ़ाये अतीस (Ativisha boost Digestion in Hindi)

अगर खाना हजम करने में असुविधा होती है और बार-बार एसिडिटी की समस्या हो रही है तो अतीस का सेवन पाचन शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। 2 ग्राम अतीस-जड़ के चूर्ण को 1 ग्राम सोंठ या 1 ग्राम पीपल के चूर्ण के साथ मिलाकर मधु के साथ चटाने से पाचन शक्ति बढ़ती है।

ज्वर ठीक करे अतीस का प्रयोग (Atees Benefits in Cures Fever in Hindi)

  • अगर ज्वर आने के पहले इसके दो माशे की फंकी चार २ घण्टे के अन्तर से देने से ज्वर उतर जाता है ।

  • बड़ी आयु वाले स्त्री-पुरुष या प्रसूता स्त्री को ज्वर हो तो विषम ज्वर में, ज्वर को रोकने और बढ़े हुए ज्वर को उतारने के लिए अतीस का चूर्ण 1-1 रत्ती, गर्म पानी के साथ सुबह शाम दें।

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाये अतीस (Ativisha Benefits to Boost Immunity in Hindi)dcgyan

अगर आप बार-बार बीमार पड़ रहे हैं तो प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अतीस बहुत लाभकारी होता है। नागरमोथा, अतीस, काकड़ा सिंगी और करंज के भुने हुए बीज, चारों द्रव्यों को समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनाकर, इन्द्रयव की छाल के काढ़े में 12 घण्टे रखने के बाद 65 मिग्रा की गोलियां बना लें। दिन में दो बार सुबह-शाम 1-2 गोली देने से बच्चों के सब रोगों से शांती मिलती है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है।

रक्तार्श (खूनी बवासीर) से दिलाये राहत अतीस (Athividayam to Treat Hemorrhoids in Hindi)

अगर ज्यादा मसालेदार, तीखा खाने के आदि है तो पाइल्स के बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। अगर समय रहते खान-पान में सुधार नहीं किया तो रक्तार्श में परिवर्तित हो सकता है।

-अतीस में राल और कपूर मिलाकर इसके धूँएं से सेंकने पर बवासीर के ब्लीडिंग से राहत मिलती है।

-इद्रजौ, अतीस, कटुत्रिक, बिल्व, नागरमोथा तथा धाय के फूल, इनका चूर्ण बनाकर 1-2 ग्राम चूर्ण में शहद मिलाकर खिलाने से रक्तप्रदर (Metrorrhagia) में लाभ होता है।

फोड़े-फून्सी को करे ठीक अतीस (Ativisha to Treat Furuncles in Hindi)

Atish  फोड़ा-फून्सी अगर सूख नहीं रहा है तो अतीस का इस तरह से प्रयोग करने पर जल्दी सूख जाता है। अतीस के 5 ग्राम चूर्ण को खाकर ऊपर से चिरायते का अर्क पीने से फोड़े-फुन्सी आदि त्वचा रोगों से जल्दी छुटकारा मिलता है।

मुख रोग में फायदेमंद अतीस (Ativisha Beneficial to Treat Mouth Ulcer in Hindi)

इस अवस्था में अतीस का प्रयोग फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें दीपन -पाचन का गुण पाया  जाता है।

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सेक्चुअल स्टैमिना बढ़ाये अतीस (Aconitum heterophyllum Help to Deal with Sexual Stamina in Hindi)

आजकल की भाग-दौड़ और तनाव भरी जिंदगी ऐसी हो गई है कि न खाने का नियम और न ही सोने  का। इसका सारा असर सेक्स लाइफ पर पड़ता है।  5 ग्राम अतीस के चूर्ण को शक्कर और दूध के साथ मिलाकर पीने से वाजीकरण गुणों (काम शक्ति) की वृद्धि होती है।

अतिसार रोग में अतीस से फायदा (Atees Benefits to Cure Diarrhea in Hindi)

इसका अतिसार और आमातिसार में दो माशे चूर्ण को फंकी देकर आठ पहर की भिगी पई दो माशे सोंठ को पीसकर पिलाना चाहिए ।

विषम ज्वर में अतीस के प्रयोग से लाभ (Atees Benefits in Asymmetric fever Treatment in Hindi)

जूड़ी बुखार ,विषमज्वर, और पाली के बुखार में इसके चूर्ण को छोटी इलायची और वंशः लोचन के चूर्ण में मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है ।

अतीस का चूर्ण 1-1 रत्ती (1 रत्ती = 0.1215 ग्राम) , दिन में तीन बार शहद में मिला कर चटाएं। शिशु को माता के दूध में मिला कर दें। ज्वर के साथ जुकाम, उलटी और बार-बार पतले दस्त लगना आदि शिकायतें भी ठीक होती हैं।

कृमिरोग में अतीस का उपयोग फायदेमंद (Atees Uses to Cure Worm Disease in Hindi)

  • इसके चूर्ण में वायविडंग का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से कृमिरोग दूर होता है ।

  • बच्चों के पेट में छोटे-छोटे कृमि हो गये हों तो अतीस और वायविडंग का महीन पिसा चूर्ण मिला कर शीशी में भर लें। यह चूर्ण 22 रत्ती सुबह शाम शहद में मिला कर या दूध के साथ बच्चे को दें। तीन दिन यह प्रयोग करने के बाद चौथे दिन सोते समय एक कप गरम दूध में एक चम्मच एरण्ड तैल (Castor oil) डाल कर पिलाने से कृमि मल के साथ निकल जाते हैं।

कृमि के कारण यदि बच्चे को बुखार खांसी और रक्त की कमी की भी शिकायत हो तो ये व्याधियां भी समाप्त हो जाती हैं।

संग्रहणी में अतीस के इस्तेमाल से फायदा (Atees Benefits to Cure Diarrhea in Hindi)

पाचनशक्ति बिल्कुल काम न करती हो, बार-बार पतले और बदबूदार दस्त लगते हों और मल के साथ, आहार पदार्थों के टुकड़े निकलते हों तो अतीस, सोंठ और इन्द्र जौ- इन तीनों को 20-20 ग्राम लेकर खूब बारीक चूर्ण कर लें। यह चूर्ण 3 ग्राम एक गिलास चावल के धोवन के साथ सुबह शाम दें।

आमातिसार में अतीस का उपयोग लाभदायक (Atees Uses to Cures Bische in Hindi)

अतीस कटु और पौष्टिक होती है अतः आमातिसार रोग के लिए उपयोगी सिद्ध होती है। दस्त में आम (आंव) जाता हो, पतला दुर्गन्धयुक्त दस्त बार-बार होता हो, मल का रंग सफेद हो तो अतीस और सोंठ का महीन पिसा चूर्ण 2-2 ग्राम, अतीस की फाण्ट के साथ दिन में तीन बार लेना चाहिए। बालकों को ऐसी व्याधि हो तो अतीस का सेवन 1-1 रत्ती मात्रा में देने से मल का रंग पीला हो जाता है आम का पाचन होने लगता है जिससे मल विसर्जन ठीक समय पर और ठीक तरह से होने लगता है और अतिसार होना बन्द हो जाता है, दस्तों की दुर्गन्ध दूर हो जाती है।

बच्चों में अग्निमांद्य रोग में अतीस से फायदा (Benefits of Atees in Indigestion Disease Treatment in Hindi)

अक्सर बच्चों को मन्दाग्नि होने पर वे दूध कम पीते हैं, पतला दुर्गन्ध युक्त दस्त होता है, बच्चे सुस्त बने रहते हैं, पेट में दर्द होता रहता है जिससे बच्चा अक्सर रोता रहता है। इस व्याधि को दूर करने के लिए अति विषादि वटी 1-1 गोली सुबह शाम पानी के साथ देते रहने से बच्चा फुर्तीला, सशक्त और स्वस्थ हो जाता है।

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बालरोग मिटाए अतीस का उपयोग (Atees Cures Child Disease in Hindi)

  1. अकेली अतीस को पीसकर चूर्ण कर शीशी में भरकर रखना चाहिए । बालकों के तमाम रोगों के ऊपर आंख मीचकर इसका व्यवहार करना चाहिये । इससे बहुत लाभ होता है । बालक की उम्र को देखकर इसे एक से चार रत्ती तक शहद के साथ चाटना चाहिए ।

  2. अतीस, काकडासिंगी, नागरमोथा और बच्छ चारो औषधियों का चूर्ण बनाकर ढाई रत्ती से १० रत्ती तक की खुराक में शहद के साथ चटाने से बालकों की खांसी, बुखार, उल्टी, अतिसार वगैरह दूर होता है ।

  3. नागरमोथा,अतीस,  पीपर, काकड़ासिगी और मुलेठी इन सब को समान भाग लेकर चूर्ण करके ४ रत्ती से ६ रत्ती की मात्रा में शहद के साथ चटाने से बच्चों की खांसी, बुखार व अतिसार बन्द होता है ।

  4. अतीस और वायबिडङ्ग का समान भाग चूर्ण शहद के साथ चटाने से बच्चों के कृमि नष्ट होते हैं ।

अतीस के निर्मित आयुर्वेदिक दवा (योग) :

जिन प्रसिद्ध आयुर्वेदिक योगों के घटक द्रव्यों में अतीस भी शामिल है उन योगों का संक्षिप्त परिचय आपकी ज्ञानवृद्धि के लिए यहां प्रस्तुत कर रहे हैं।

अतिविषादि वटी

अतीस, नागरमोथा, काकड़ासिंगी, करंज 10-10 ग्राम लेकर कूट पीस कर खूब महीन चूर्ण बना लें। कूड़ा की छाल का काढ़ा बना कर , यह चूर्ण डाल कर खरल में घुटाई करके, एक-एक रत्ती की गोली बना लें। आधी-आधी गोली दिन में तीन बार पानी या दूध के साथ दें। बच्चों के उदर विकारों के लिए यह योग उत्तम है।

चन्द्रप्रभावटी विशेष नं.1 –

यह आयुर्वेद का सुप्रसिद्ध योग है जिसमें अतीस के साथ शुद्ध शिलाजीत, नागरमोथा, कबाब चीनी आदि घटक द्रव्यों के अलावा अन्य गुणकारी द्रव्य भी मिलाये जाते हैं। यह योग मूत्र और वीर्य सम्बन्धी रोगियों के लिए बहुत गुणकारी सिद्ध हुआ है। यह प्रमेह और मधुमेह के रोगी के लिए भी अति लाभप्रद सिद्ध हुआ है। इस वटी का लगातार 2-3 मास तक सेवन करने से शरीर पुष्ट होता है, पौरुष शक्ति बढ़ती है, नपुंसकता, स्वप्नदोष, शीघ्रपतन, इन्द्रिय शिथिलता आदि शिकायतें दूर होती हैं।

मन्मथ रस

आयुर्वेद के इस सुप्रसिद्ध बल वीर्य शक्तिवर्द्धक और वाजीकारक योग में भी अतीस का उपयोग किया जाता है। यह योग धातु पौष्टिक, स्तम्भन शक्ति बढ़ाने वाला और नपुंसकता का नाश करने के लिए प्रसिद्ध है।

इन सुप्रसिद्ध श्रेष्ठ आयुर्वेदिक योगों के अतिरिक्त पंचतिक्तघृत गुग्गुलु, पंचनिम्बादि वटी, रक्त शोधान्तक आदि रक्त विकार, फोड़े, फुसी नाशक योग, कृमिनाशक कृमिनोल सीरप और टेबलेट, वातरोगनाशक योगराज गुग्गुलु, महायोगराज गुग्गुलु और ज्वरनाशक ज्वरान्तक वटी जैसे प्रसिद्ध योगों में अतीस को एक प्रमुख घटक द्रव्य के रूप में शामिल किया गया है।

अतिविषादि अर्क

अतीश, नागरमोथा, मुलेठी, काकड़ासिगी, पीपर, वच, बायबिडङ्ग, जायपत्री, जायफर, केशर ये सब वस्तुएँ एक एक रुपये भर लेकर चूर्ण कर उसमें 3 माशे कस्तूरी मिलाकर उस चूर्ण को कांच के काग वाली स्टॉपर्ड बाटली में भरकर उसमें 40 रूपये भर रेक्टीफाइड स्पिरिट डाल कर काग लगाकर 7 दिन तक धूप में रखना चाहिये । आठवें दिन दवा को मसल कर ब्लाटिंग पेपर में छान लेना चाहिये । इस दवा में से 1 बूंद से लेकर 10 बूंद तक अवस्थानुसार पानी या मां के दूध में मिलाकर देने से बच्चों को होने वाली सर्दी, बुखार, खांसी कफ निमोनिया, कमजोरी, बेहोशी तथा शीतकाल में बालकों के ऊपर होने वाले अनेक भयंकर रोग आराम होते हैं ।

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अतीस का उपयोग (Useful Parts of Ativisha)

आयुर्वेद में अतीस के जड़ का प्रयोग औषधि के लिए सबसे ज्यादा किया जाता है।

अतीस के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Atish?)

बीमारी के लिए अतीस (atees herb) के सेवन और इस्तेमाल का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए अतीस का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

इसकी मात्रा 1 या 2 रत्ती की है। इसे सुबह शाम शहद में मिला कर या दूध के साथ लेना चाहिए। इसका फाण्ट भी बनाया जाता है। आमातिसार होने पर इसका फाण्ट 2-2 चम्मच दिन में तीन बार लेना चाहिए।

चिकित्सक के परामर्श के अनुसार-   1-2 ग्राम चूर्ण का सेवन कर सकते हैं

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अतीस के सेवन का तरीका (How to Use Atish?)

फाण्ट बनाने की विधि एक चम्मच (5 ग्राम) अतीस आधा गिलास उबलते पानी में डाल कर घोल दें और ढक्कन से ढक दें। इसमें चाय पत्ती डालना चाहें तो डाल सकते हैं और शक्कर भी डाल दें। 20-25 मिनिट बाद इसे उतार कर थोड़ा ठण्डा करके छान लें और बराबर वजन में दूध मिला लें। यह फाण्ट है।

अतीस के नुकसान :Side Effects of Atish

इसे  केवल चिकित्सक की देखरेख में लिया जाना चाहिए।

अतीस का अधिक मात्रा में उपयोग करना आमाशय और आंतों के लिए हानिकारक होता है, अत: इसके हानिकारक प्रभाव को नष्ट करने हेतु शीतल वस्तुओं का सेवन करना चाहिए।

अतीस कहाँ पे पाया या उगाया जाता है (Where is Atish Found or Grown?)

(ativisha herb) अतीस का पौधा  भारत में हिमालय प्रदेश के पश्चिमोत्तर भाग में 2000-5000 मी की ऊंचाई तक उच्च पर्वतीय शिखरों पर पाया जाता है।

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