अविपत्तिकर चूर्ण के फायदे , प्रयोग, खुराक और नुकसान | Avipattikar Churna ke fayde

अविपत्तिकर चूर्ण के फायदे , प्रयोग, खुराक और नुकसान | Avipattikar Churna ke fayde | Avipattikar Churna benefits,uses,dosage and disadvantages in hindi

यह अविपत्तिकर चूर्ण(Avipattikar Churna) एक हर्बल दवा है जिसमें अलग अलग प्रकार की जड़ी बूटियां और प्राकृतिक अर्क हैं। यह मुख्य रूप से एसिडिटी, बदहजमी और कब्ज के लिए उपयोग किया जाता है। यह पाचन एंजाइमों के बनने को तेज़ करता है जो पोषक तत्वों को सोखने और आंतों की मूवमेंट में मदद करते हैं। अविपत्तिकर चूर्ण लेकर पाचन संबंधी बीमारी से तुरंत और पक्के तौर पर आराम पा सकते हैं। अविपत्तिकर चूर्ण के सेवन से अम्लपित्त तथा अम्लपित्त से उत्पन्न उदर शूल,अग्निमांद्य, वातनाड़ियों में शूल, अर्श, प्रमेह, मूत्राघात और मूत्राश्मरी का नाश होता है।

तेज मिर्च मसालेदार पदार्थ, चाट पकौड़ी, कचौरी, समोसे का सेवन करने में अति करने, ज्यादा चाय पीने, मद्य, मांस और तम्बाकू का सेवन करने आदि कारणों से अम्लपित्त (Hyperacidity) नामक व्याधि होती है। यदि लगातार लम्बे समय तक यह व्याधि बनी ही रहे तो अन्न नली (Esophagus), आमाशय (Stomach) या ग्रहणी Duodenum) में अलसर (Ulcer) हो जाता है जो कि एक जीर्ण एवं दुष्ट रोग होता है अतः इस व्याधि को पहले तो उत्पन्न ही नहीं होने देना चाहिए और यदि हो जाए तो इसे दूर करने में आलस्य तथा विलम्ब नहीं करना चाहिए। अविपत्तिकर चूर्ण इस विपत्ति को दूर करने में सक्षम एवं सफल सिद्ध योग है।

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अविपत्तिकर चूर्ण के घटक द्रव्य :

  1. सोंठ – 10 ग्राम

  2. पीपल – 10 ग्राम

  3. काली मिर्च (त्रिकुट) – 10 ग्राम

  4. हरड़, बहेड़ा ,आंवला (त्रिफला) – 10 ग्राम

  5. नागर मोथा – 10 ग्राम

  6. बायविडंग – 10 ग्राम

  7. छोटी इलायची के दाने – 10 ग्राम

  8. तेजपात – 10 ग्राम

  9. लौंग – 100 ग्राम

  10. निशोथ की जड़ – 400 ग्राम

  11. मिश्री – 600 ग्राम

अविपत्तिकर चूर्ण बनाने की विधि :

सब द्रव्यों को कूट पीस कर महीन कपड़छन चूर्ण कर मिला लें। इसमें विड नमक या नौसादर मिलाने का विधान भी पढ़ने को मिलता है। 1200 ग्राम चूर्ण में इसकी मात्रा 10 ग्राम मिलानी चाहिए। इसका प्रभाव वातनाड़ियों पर पड़ता है।

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अविपत्तिकर चूर्ण के फायदे और उपयोग : Avipattikar Churna benefits and Uses (labh) in Hindi

1.पित्त दूर करने में लाभकारी अविपत्तिकर चूर्ण का प्रयोग

इस चूर्ण में निसोत मिलाया है, जिससे यह कुछ विरेचन गुण भी दर्शाता है और आमाशय के भीतर संगृहीत पित्त को फेंक देता है। यदि विरेचन गुण को अति कम कराना हो, तो आचार्यों के कहे अनुसार चूर्ण भोजन के पहले और भोजन के अन्त में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में घी और शहद के साथ देना चाहिए।

 2.अम्लपित्त रोग में लाभदायक अविपत्तिकर चूर्ण

यह चूर्ण अम्लपित्त रोग में विशेष व्यवहृत होता है। अम्लपित्त होने पर छाती में जलन होती रहती है, रोग अधिक बढ़ने पर उबाक और वमन भी होती रहती है, वमन खट्टी और जलती हुई होती है। वमन होने पर कण्ठ में दाह होता है और नेत्रों में जल आ जाता है। इस विकार में अपचन होने या रोग जीर्ण होने पर आमाशय पित्त अत्यधिक बढ़ जाने से सुबह भी खट्टी डकारें आती रहें और वमन होती रहें, तब अविपत्तिकर चूर्ण का सेवन शीतल जल या नारियल के जल के साथ कराया जाता है, जिससे आमाशय का पित्त ऑतों में चला जाता है।

 3.वातनाड़ियों की शुद्धि में अविपत्तिकर चूर्ण लाभकारीdcgyan

अम्लपित्त रोग बढ़ने पर आमाशयस्थ पित्त का अम्ल प्रभाव रक्त पर पहुँचता है। फिर कई रोगियों की वातनाड़ियां भी खिंचती रहती है। ऐसी अवस्था में उनको लाभ पहुँचाने की दृष्टि से आचार्यों के मूलपाठ में “बीजञ्चैव विडङ्गकम्” के स्थान पर “विडञ्चैव विडङ्गकम्” भी पाठ मिलता है। इस पाठ को मानकर 120 तोले चूर्ण के साथ 1 तोला बिड़नमक (नौसादर) मिला देना चाहिए। अर्थात् 4 माशे चूर्ण की मात्रा देनी हो तो उसमें 1 रत्ती बिड़नमक मिलाकर देने से रक्त और वातनाड़ियों को पहुँची हुई अम्लता का ह्रास होता है।

 4.मंदाग्नि दूर करे अविपत्तिकर चूर्ण

पाचन शक्ति को मजबूत कर भूख को बढ़ाने में अविपत्तिकर चूर्ण मदद करता है ।

इसके अतिरिक्त आमवात और रक्त की प्रतिक्रिया अम्ल होने से उत्पन्न संधिवात, पक्षाघात, उदरशूल, पित्तप्रकोप उन्माद, रक्तदबाव वृद्धि .. आदि रोगों में विरेचन की आवश्यकता होने पर भी इस चूर्ण का उपयोग किया जाता है।

5. पेट की शुद्धि करने में अविपत्तिकर चूर्ण फायदेमंद

वृक्क दाह होने पर रक्त में मूत्र-विष की वृद्धि होती है। फिर नेत्र और मुखमण्डलपर शोथ उत्पन्न होता है। देह कुश और निस्तेज हो जाती है, आलस्य की वृद्धि होती है। दृष्टि मन्द होती है, रक्त की प्रतिक्रिया अम्ल होती है। आमाशय में पित्त तेज हो जाता है। ऐसी स्थिति में प्रायः मलावरोध भी दुःख देता रहता है, इस मलावरोध को दूरकर उदर को शुद्ध करने के लिये बिड़नमक मिश्रित इस चूर्ण का उपयोग किया जाता है।

6. क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस को कम करता है

पेट की लाइनिंग की सूजन को गैस्ट्रिटिस कहा जाता है। अविपत्तिकर चूर्ण होने से पेट से एसिड को हटाने, सूजन को ठीक करने और पेट में म्यूकस लाइन्ड रूकावट के दोबारा बनने में मदद मिलती है।

 7.गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स बीमारी को रोकता है

गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स रोग एसिड रिफ्लक्स का एक पुराना रूप है जो तब होता है जब पेट की चीज़ें भोजन की नली में वापस आ जाती है। यह भोजन की नली की लाइनिंग को परेशान करती है, जिससे सीने की जलन, गले में जलन, सीने में दर्द, खट्टा स्वाद आदि होता है। अविपत्तिकर चूर्ण इस रिफ्लक्स को रोकने में मदद करता है।

 8.पेशाब को पास करने में कठिनाई की समस्या में मदद करता है

पेशाब को पास करने में कठिनाई कई वजहों से हो सकती है। यदि कारण प्रोस्टेट ना हो तो अविपत्तिकर चूर्ण अपने डियूरेटिक्स गुणों के कारण मदद करता है। यह पेशाब को पास होने को आसान करता है और पेशाब के उचित बहाव को तय करता है।

 9.गुर्दे की पथरी को निकालता है

हाजिपोल याहूद भस्म के साथ-साथ अविपत्तिकर चूर्ण का उपयोग करने से गुर्दे की पथरी को हटाने में मदद मिलती है।

10. नेफ्राइटिस और नेफ्रोटिक सिंड्रोम के इलाज के लिए प्रभावी है

अविपत्तिकर चूर्ण नेफ्रैटिस और नेफ्रोटिक सिंड्रोम जैसे गुर्दे की बीमारियों के इलाज में मदद करता है। यह किडनी, ग्लोमेरुली, टयूब्लस और इंटेस्टिनल टिश्यू की सूजन को कम करता है। यह खून में यूरिया के स्तर को भी कम करता है और इसे कण्ट्रोल में रखता है।

11. भूख बढ़ाने वाला

अविपत्तिकर चूर्ण एक बेहतरीन भूख बढ़ाने वाला एजेंट है। अविपत्तिकर चूर्ण को नियमित रूप से लेने पर भूख को बढ़ाने में मदद मिलती है।

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अविपत्तिकर चूर्ण के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Avipattikar Churna?)

बच्चे – दिन में 1 से 3 ग्रा.

वयस्क –  दिन में 3 से 6 ग्रा.

वयस्क 60 साल से ऊपर  – दिन में 3 ग्रा.

✔   इस खुराक को दो भागों में बांटकर और दिन में दो बार सेवन लिया जा सकता है|

अविपत्तिकर चूर्ण के सेवन का तरीका (How to Use Avipattikar Churna?)

(Avipattikar Churna) अविपत्तिकर चूर्ण का उपयोग अलग अलग पाचन, मूत्र और गुर्दे की बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है। अविपत्तिकर चूर्ण की ज्यादा से ज्यादा खुराक दिन में 12 ग्रा. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसे ठंडे पानी, नारियल पानी, घी या शहद के साथ लिया जा सकता है।

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अविपत्तिकर चूर्ण के नुकसान (Side Effects of Avipattikar Churna):-

1.आंतों में सूजन (Colitis) हो, पेट दबाने से पीड़ा होती हो तो इस चूर्ण का सेवन नहीं करना चाहिए।

2. अविपत्तिकर चूर्ण को डॉक्टर की सलाह अनुसार ,सटीक खुराक के रूप में समय की सीमित अवधि के लिए लें।

3. इसे ज्यादा मात्रा में और ज्यादा बार नहीं लेना चाहिए।

4. अविपत्तिकर चूर्ण लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें ।

5. अविपत्तिकर चूर्ण(Avipattikar Churna) कुछ दवाओं के साथ आपसी प्रभाव डाल सकता है। इसलिए यदि आप कोई दवा ले रहे हैं तो आपको इस दवा को लेने और अविपत्तिकर चूर्ण लेने के बीच आधे घंटे का अंतर रखना होगा।

6. स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अविपत्तिकर चूर्ण लेने से बचना चाहिए। यह सूजन और गैसट्रिटिस का कारण हो सकता है जो बच्चे को प्रभावित कर सकता है।

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अविपत्तिकर चूर्ण कैसे प्राप्त करें ? ( How to get Avipattikar Churna)

यह योग इसी नाम से बना बनाया आयुर्वेदिक औषधि विक्रेता के यहां मिलता है।

कहाँ से खरीदें  :-  अमेज़ॉन,नायका,स्नैपडील,हेल्थ कार्ट,1mg Offers,Medlife Offers,Netmeds Promo Codes,Pharmeasy Offers,

ध्यान दें :- Dcgyan.com के इस लेख (आर्टिकल) में आपको अविपत्तिकर चूर्ण के फायदे, प्रयोग, खुराक और नुकसान के विषय में जानकारी दी गई है,यह केवल जानकारी मात्र है | किसी व्यक्ति विशेष के उपयोग करने से पहले चिकित्सक से परामर्श करना आवश्यक है |

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