बाबची के फायदे और नुकसान | Bakuchi ke fayde | health benefits of Bakuchi in hindi

बाबची के फायदे और नुकसान | Bakuchi ke fayde | health benefits of Bakuchi in hindi

बाकुची परिचय :-

आयुर्वेदिक किताबों में बाकुची के बारे में अनेक फायदेमंद (babchi benefits) बातें बताई गई हैं। बावची के औषधीय गुण से खांसी, डायबिटीज, बुखार, पेट के कीड़े, उल्टी में लाभ मिलता है। इतना ही नहीं, त्वचा की बीमारी, कुष्ठ रोग सहित अन्य रोगों में भी बाकुची के औषधीय गुण से फायदा (babchi ke fayde) मिलता है। आइए जानते हैं कि आप किस-किस रोग में बाकुची से लाभ ले सकते हैं।

बाबची क्या है? (What is Bakuchi?)

बाकुची का पौधा एक साल तक जिंदा रहता है। सही देखभाल करने पर पौधा 4-5 वर्ष तक जीवित रह सकता है। बाकुची के बीजों (babchi ke beej) से तेल बनाया जाता है। पौधे और तेल को चिकित्सा के लिए प्रयोग में लाया जाता है। ठंड के मौसम में बाकुची (babchi) के पौधों में फूल आते हैं, और गर्मी में फलों में बदल जाते हैं।

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अनेक भाषाओं में बाबची के नाम (Bakuchi Called in Different Languages)

  • हिंदी :– बाकुची, बावची ;

  • संस्कृत नाम :– सोमराजि, कृष्णफला, कुष्ठनाशिनी, सोमवल्ली, कालमेषिका, चन्द्रलेखा, सुप्रभा, कुष्ठ हंब्री, कांबोजि, पूतिगन्धा, चन्द्र राजी ;

  • English :– मलाया टी (Malaya tea), मलायाटी (Malayati) सोरेलिया सीड (Psoralea seed) ;

  • Scientific Names :– Psoralea Corlifolia ( सोरेलिया कीरिलीफोलिया )

  • Urdu :– बाबेची (Babechi)

  • Oriya :– बाकुची (Bakuchi)

  • Kannada :– बवनचीगिडा (Bavanchigida), वाउचिगु (Vauchigu)

  • Gujarati :– बाबची (Babachi), बाकुची (Bacuchi)

  • Telugu :– भवचि (Bhavachi), कालागिंजा (Kalaginja)

  • Tamil :– कर्पोकरषि (Karpokarashi), कारवोर्गम (Karvorgam)

  • Nepali :– वाकुची (Vakuchi)

  • Punjabi :– बाकुची (Bacuchi)

  • Bengali :– हाकुच (Hakuch), बवची (Bavachi)

  • Marathi :– बवची (Bavachi), बाकुची (Baavachi)

  • Malayalam :– करपोक्करी (Karpokkari), कोट्टम (Cottam), कोरकोकील (Korkokil)

  • Arabic :– बाकुची (Bakuchi), बाकुसी (Bakusi)

  • Persian :– बावकुचि (Bavkuchi), वाग्ची (Waghchi)

आयुर्वेदिक मतानुसार बाबची के औषधीय गुण :

  1.  बाबची मधुर, कड़वी, पचने में चरपरी होती है ।

  2. यह धातु परिवर्तक, कब्जियत को दूर करने वाली है ।

  3. बाकुची  शीतक, रुचिकारक, सारक, कफ और रक्तपित्त को नाश करने वाली है ।

  4. यह रूखी, हृदय के लिये हितकारी तथा श्वास, कुष्ठ, प्रमेह, ज्वर और कृमियों का विनाश करने वाली होती है।

  5. बाबची का फल पित्त जनक, कुष्ठनाशक, कफ और वात को दूर करने वाला है ।

  6. बाकुची  का फल कड़वा, केशों को उत्तम करने वाला, कांतिवर्धक तथा वमन नाशक होता है ।

  7. इसका फल श्वास, मूत्रकृच्छ्र, बवासीर, खांसी, सूजन, आम और पांडुरोग का नाश करने वाला होता है।

  8. बाबची की एक दूसरी जाति और होती है जिसको संस्कृत में श्वित्रारि कहते हैं । यह जाति कुष्ठ, त्रिदोष, रक्त विकार, वातरक्त और श्वेत कुष्ठ को दूर करती है ।

  9. बाकुची  की जड़ दांतों की सड़न को दूर करती है।

  10. इसके पत्ते अतिसार को रोकने में उपयोगी है।

  11. बाकुची  फल कड़वे, मूत्रल, पित्त को पैदा करने वाले है।

  12. इसके फल गलित कुष्ठ को दूर करने वाले तथा चर्मरोग, कफ, वात, वमन, श्वास, कुष्ठ, बवासीर ब्रोकाइटीज, सूजन और पाण्डु रोग में लाभदायक है।

  13. बाकुची  बीज कड़वे, ज्वर और तृषा को मिटाने वाले, धातु परिवर्तक, मृदुविरेचक, कृमिनाशक और ज्वरनाशक होते हैं।

  14. इसके बीज कफ और रक्तपित्त को दूर करते हैं और हृदयरोग, दमा, श्वेत कुष्ठ तथा अनैच्छिक वीर्यस्राव में लाभदायक है।

  15. बाकुची बीज जख्म, चर्म रोग और गीली खुजलीमें ये फायदा पहुंचाते हैं ।

  16. इनका तेल हाथी पांव में उपयोगी होता है।

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यूनानी मत के अनुसार बाबची के औषधीय गुण :

  1.  यह दूसरे दर्जे में गरम और खुश्क होती है।

  2. वायु को बिखेरती है। दिल और मेदे को कूबत देती है ।

  3. बावची भूख पैदा करती है ।

  4. यह आमाशय के कीड़ों को नष्ट करती है ।

  5. श्वेत कुष्ठ, स्याह कुष्ठ, खुजली, कोढ़ और रक्त के उपद्रव को मिटाती है। इन बीमारियों में इसका खाना और लगाना दोनों मुफीद है ।

  6. बावची के बीज गाढ़े कफ को पतला करते हैं ।

  7. बाकुची के बीज खांसी को मिटाते हैं ।

  8. बावची के बीज मसूड़ों को मजबूत करते हैं ।

  9. इसके बीज प्राणवायु को उत्तेजित करते हैं ।

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बाबची से विभिन्न रोगों का सफल उपचार : Bakuchi benefits and Uses (labh) in Hindi

 

सफेद दाग के इलाज में बाकुची का औषधीय गुण फायदेमंद (Benefits of Bakuchi to Treat Leucoderma in Hindi)

  1.  चार भाग बाकुची के बीज (babchi ke beej) चार भाग और एक भाग तबकिया हरताल का चूर्ण बना लें। इसे गोमूत्र में मिलाकर सफेद दागों पर लगाएं। इससे सफेद दाग दूर हो जाते हैं।

  2. बाकुची (babchi) और पवाड़ को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर सिरके में पीसकर सफेद दागों पर लगाएं। इससे सफेद दाग में लाभ होता है।

  3. (babchi ke beej) बावची, गंधक व गुड्मार को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर तीनों का चूर्ण (Bakuchi Churna) बना लें। 12 ग्राम चूर्ण को रात भर के लिए जल में भिगो दें। सुबह जल को साफ करके सेवन कर लें। इसके बाद नीचे के तल में जमा पदार्थ को सफेद दागों पर लगाएं। इससे सफेद दाग खत्म हो जाते हैं।

  4. सफेद दागा का उपचार करने के लिए 10-20 ग्राम शुद्ध बाकुची चूर्ण में एक ग्राम आंवला मिलाएं। इसे खैर तने के 10-20 मिली काढ़ा के साथ सेवन करें। इससे सफेद दाग की बीमारी ठीक हो जाती है।

  5. बाकुची, कलौंजी और धतूरे के बीजों को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर आक के पत्तों के रस में पीस लें। इसे सफेद दागों पर लगाएँ। इससे सफेद कुष्ठ में लाभ होता है।

  6. बावची, इमली, सुहागा और अंजीर के जड़ की छाल को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर जल में पीस लें। इसे सफेद दागों पर लेप करने से सफेद दाग की बीमारी ठीक होती है।

  7. सफेद दाग का इलाज करने के लिए लोग बाकुची (babchi), पवांड़ और गेरू को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। इसे अदरक के रस में पीसकर सफेद दागों पर लगाकर धूप में सेकें। इससे सफेद दाग की बीमारी में फायदा होता है।

  8.  बाकुची, गेरू और गन्धक को बराबर-बराबर मात्रा में लें। इसे पीसकर अदरक के रस में खरल कर लें। इसकी 10-10 ग्राम की टिकिया बना लें। एक टिकिया को रात भर के लिए 30 मिग्रा जल में डाल दें। सुबह ऊपर का साफ जल पी लें। नीचे की बची हुई औषधि को सफेद दागों पर मालिश करें। इसके बाद धूप सेकने से सफेद दाद की बीमारी में लाभ होता है। 
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  9. बावची, अजमोदा, पवांड और कमल गट्टा को समान भाग लेकर पीस लें। इसमें मधु मिलाकर गोलियां बना लें। इसके बाद अंजीर की जड़ की छाल का काढ़ा बना लें। एक से दो गोली तक सुबह-शाम काढ़ा के साथ सेवन करने से सफेद दाग में लाभ होता है।

  10. सफेद दाग के उपचार के लिए 1 ग्राम शुद्ध बाकुची और 3 ग्राम काले तिल के चूर्ण में 2 चम्मच मधु मिला लें। इसे सुबह और शाम सेवन करने से सफेद दाग की बीमारी में लाभ होता है।

  11. शुद्ध बाकुची (babchi), अंजीर के पेड़ ती जड़ की छाल, नीम की छाल और पत्ते का बराबर-बराबर भाग लेकर कूट लें। इसे खैर की छाल के काढ़ा में मिला लें। इसे पीस कर दो से पांच ग्राम तक की मात्रा में जल के साथ सेवन करें। इससे सफेद दाग मिट जाता है।

  12. बाकुची पांच ग्राम और केसर एक भाग लेकर पीस लें। इसे गोमूत्र में खरल कर गोली बना लें। इस गोली को जल में घिसकर लगाने से सफेद दाग में लाभ होता है।

  13. सफेद दाग का उपचार करने के लिए 100 ग्राम बाकुची, 25 ग्राम गेरू और 50 ग्राम पंवाड़ के बीज लेकर कूट पीस लें। इसे कपड़े से छानकर चूर्ण कर लें। इसे भांगरे के रस में मिला लें। सुबह और शाम गोमूत्र में घिसकर लगाने से सफेद दाग ठीक होता है।

  14. बाकुची चूर्ण को अदरक के रस में घिसकर लेप करने से सफेद रोग में लाभ होता है।

  15. सफेद दाग का उपचार करने के लिए बाकुची दो भाग, नीलाथोथा और सुहागा एक-एक भाग लेकर चूर्ण कर लें। एक सप्ताह के लिए भांगरे के रस में घोंटकर रख लें। इसके बाद कपड़े से छान लें। इसको नींबू के रस में मिलाकर सफेद दाग पर लगाएं। इससे सफेद दाग नष्ट होते हैं। यह प्रयोग थोड़ा जोखिम भरा होता है। इसलिए यह प्रयोग करने पर अगर छाला होने लगे तो प्रयोग बंद कर दें।

  16. शुद्ध बाकुची (bauchi) के चूर्ण की एक ग्राम मात्रा को बहेड़े की छाल और जंगली अंजीर की जड़ की छाल के काढ़े में मिला लें। इसे रोजाना सेवन करते रहने से सफेद दाग और पुंडरीक (एक प्रकार का कोढ़) में लाभ होता है।

  17. सफेद दाग का इलाज करने के लिए बाकुची, हल्दी और आक की जड़ की छाल को समान भाग में लें। इसे महीन चूर्ण कर कपड़े से छान लें। इस चूर्ण को गोमूत्र या सिरका में पीसकर सफेद दागों पर लगाएं। इससे सफेद दाग नष्ट हो जाते हैं। यदि लेप उतारने पर जलन हो तो तुवरकादि तेल (Bakuchi Oil) लगाएं।

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  1. 1 किग्रा बावची को जल में भिगोकर छिलके उतार लें। इसे पीसकर 8 लीटर गाय के दूध और 16 लीटर जल में पकाएं। दूध बच जाने पर दही जमा लें। इसके बाद मक्खन निकालकर घी बना लें। एक चम्मच घी में 2 चम्मच मधु मिलाकर चाटने से सफेद दाग की बीमारी में लाभ होता है।

  2. सफेद दाग की बीमारी का इलाज करने के लिए बाकुची (bauchi) तेल की 10 बूंदों को बताशा में डालकर रोजाना कुछ दिनों तक सेवन करें। इससे सफेद कुष्ठ रोग (Bakuchi Oil) में लाभ होता है।

  3. बाकुची को गोमूत्र में भिगोकर रखें। तीन-तीन दिन बाद गोमूत्र बदलते रहें। इस तरह कम से कम 7 बार करने के बाद इसे छाया में सुखाकर पीसकर रखें। भोजन करने से एक घंटा पहले इसमें से 1-1 ग्राम सुबह-शाम ताजे पानी से खाएं। इससे श्वित्र (सफेद दाग) में निश्चित रूप से लाभ होता है।

गांठ होने पर बावची का औषधीय गुण फायदेमंद (Bakuchi Benefits for Lipoma Treatment in Hindi)

चर्बी के कारण शरीर के किसी अंग में गांठ हो गई हो तो बावची का औषधीय गुण लाभदायक सिद्ध होता है। एक रिसर्च के अनुसार, ये गांठ को बढ़ने से रोकता है। इसके उपाय की जानकारी के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्स से सलाह लें।

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बावची के औषधीय गुण से कुष्ठ रोग का इलाज (Uses of Bakuchi to Treat Leprosy in Hindi)

  • बाकुची 1 ग्राम बाकुची और 3 ग्राम काले तिल को मिला लें। एक साल तक दिन में दो बार इसका सेवन करें। इससे कुष्ठ रोग में लाभ (babchi benefits) होता है।

  • बावची के बीजों को पीसकर गांठ पर बांधते रहने से कुष्ठ रोग के कारण होने वाली गांठ बैठ जाती है।

बहरेपन की बीमारी में बाकुची का सेवन फायदेमंद (Bakuchi is Beneficial for Deafness Disease in Hindi)

रोजाना मूसली और 1-3 ग्राम बाकुची के चूर्ण का सेवन करें। इससे बहरेपन (बाधिर्य) की बीमारी में लाभ (babchi ke fayde) होता है।

सांसों से जुड़ी बीमारियों में बाकुची (बावची) के सेवन से लाभ (Benefits of Bakuchi in Fighting with Respiratory Disease in Hindi)

आधा ग्राम बाकुची बीज चूर्ण (Bakuchi Churna) को अदरक के रस के साथ दिन में 2-3 बार सेवन करें। इससे सांसों से जुड़ी बीमारियों में लाभ होता है।

बाकुची (बावची) के सेवन से कफ वाली खांसी का इलाज (Uses of Bakuchi in Fighting With Cough in Hindi)

आधा ग्राम बाकुची (bauchi) के बीज के चूर्ण को अदरक के रस के साथ दिन में 2-3 बार सेवन करें। इससे कफ ढीला होकर निकल जाता है।

त्वचा रोग के इलाज की आयुर्वेदिक दवा है बाकुची (Bakuchi Benefits for Skin Disease in Hindi)कील, मुंहासे , रामबाण ,घरेलु ,उपचार,Surprising, Home, Remedies, Acne,

बावची के औषधीय गुण से त्वचा रोग का इलाज किया जा सकता है। त्वचा रोग में लाभ लेने के लिए दो भाग बाकुची तेल, दो भाग तुवरक तेल और एक भाग चंदन तेल मिलाएं। इस तेल को लगाने से त्वचा की साधारण बीमारी तो ठीक होती ही है, साथ ही सफेद कुष्ठ रोग में भी फायदा (babchi oil uses) होता है।

गर्भनिरोधक (गर्भधारण रोकने के लिए) के रूप में बाकुची का इस्तेमाल फायदेमंद (Bakuchi works like a Contraceptive in Hindi)

बाकुची (babchi) का उपयोग गर्भधारण रोकने के लिए किया जा सकता है। जो महिलाएं गर्भधारण नहीं करना चाहती हैं वे मासिक धर्म खत्म होने के बाद बाकुची के बीजों को तेल (Bakuchi Oil) में पीसकर योनि में रखें। इससे गर्भधारण पर रोक लगती है।

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बावची के औषधीय गुण से फाइलेरिया का इलाज (Bakuchi Uses for Filariasis Treatment in Hindi)

फाइलेरिया रोग में बावची के इस्तेमाल से फायदा होता है। बाकुची के रस और पेस्ट को फाइलेरिया (हाथी पांव) वाले अंग पर करें। इससे फाइलेरिया में लाभ होता है।

बाकुची के औषधीय गुण से पीलिया का इलाज (Benefits of Bakuchi in Fighting with Jaundice in Hindi)

पीलिया में भी बावची के फायदे ले सकते हैं। 10 मिली पुनर्नवा के रस में आधा ग्राम पीसी हुई बावची के बीज का चूर्ण (Bakuchi Churna) मिला लें। सुबह-शाम रोजाना सेवन करने से पीलिया में लाभ होता है।

बाकुची के औषधीय गुण से बवासीर का इलाज (Bakuchi Benefits for Piles Treatment in Hindi)

बवासीर में भी बावची के औषधीय गुण से फायदा होता है। 2 ग्राम हरड़, 2 ग्राम सोंठ और 1 ग्राम बाकुची के बीज (babchi ke beej) लेकर पीस लें। इसे आधी चम्मच की मात्रा में गुड़ के साथ सुबह-शाम सेवन करें। इससे बवासीर में लाभ होता है।

पेट में कीड़े होने पर बावची (बावची) के फायदे (Benefits of Bakuchi to Treat Abdominal Bugs in Hindi)

(Bakuchi Benefits)

पेट के रोग में भी बाकुची खाने से फायदा होता है। पेट में कीड़े होने पर बावची चूर्ण का सेवन करें। इसमें एन्टीवर्म गुण होता है जिससे कीड़े मर जाते हैं।

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दस्त में बाकुची (बावची) के सेवन से लाभ (Bakuchi Uses to Stop Diarrhea in Hindi)

आप दस्त को रोकने के लिए बावची के औषधीय गुण से लाभ ले सकते हैंं। बाकुची के पत्ते का साग सुबह-शाम नियमित रूप से खाएं। कुछ हफ्ते खाने से दस्त की समस्या में बहुत लाभ होता है।

दांत के रोग में बाकुची (बावची) के सेवन से लाभ (Bakuchi Benefit to Get Relieve from Dental Disease in Hindi)

  •  बिजौरा नीम्बू की जड़ और बाकुची की जड़ को पीसकर बत्ती बना लें। इससे दांतों के बीच में दबाकर रखें। इससे कीड़ों के कारण होने वाले दांत के दर्द से आराम मिलता है

  • बाकुची (babchi) के पौधे की जड़ को पीस लें। इसमें थोड़ी मात्रा में साफ फिटकरी मिला लें। रोज सुबह-शाम इससे दांतों पर मंजन करें। इससे दांतों में होने वाला संक्रमण ठीक हो जाता है। इससे कीड़े भी खत्म होते हैं।

बाबची से निर्मित आयुर्वेदिक दवा :

माप  :-

1 तोला = 12 ग्राम, 1 सेर = 932 ग्राम

1- श्वेत कुष्ठ हर लेप-

बाबची के बीज 4 तोला,हरताल 4 तोला , सफेद चिरमी के बोज 4 तोला, चित्रक की जड़ की ताजी छाल 4 तोला, मेंसिल 2 तोला और काला भांगरा 2 तोला।

लाभ- इन सबको लेकर बारीक पीसकर कुछ दिनों तक गोमूत्र में खरल करना चाहिये । फिर सफेद कुष्ठ के दागों को कुछ रगड़ कर उन पर इस लेप को लगाने से लाभ होता है।

2- श्वेत कुष्ठ नाशक तेल-

बावची के बीज 25 तोला, पवांर के बीज 5 तोला, सफेद चिरमी के बीज 2 तोला, काली मिरची 2 तोला, में सिल 3 तोला, हरताल 4 तोला और चित्रक की जड़ की ताजी छाल २ तोला ।

लाभ इन सब चीजों को कूटकर आतशी शीशी में भरकर बालुका गर्भ यन्त्र से मंदाग्नि के द्वारा तेल निकालना चाहिये । इस तेल को नियमित रूप से लगाने से श्वेत कुष्ठ, दाद, छाजन इत्यादि रोग नष्ट होते हैं ।

3- बृहत् सोमराजि तेल-

बावची के बीज 5 सेर, पवांर के बीज 5 सेर ।

इन दोनों को कूटकर 40 सेर पानी के साथ उबालना चाहिये। जब 10 सेर(1 सेर = 932 ग्राम ) पानी शेष रह जाय तब उसको छानकर उस काढ़े में 256 तोला गोमूत्र और 64 तोला सरसों का तेल मिलाकर नीचे लिखी औषधियों की लुग्दी उसमें रखकर मंदाग्नि से औटाना चाहिये । जब पानी का भाग जलकर सिर्फ तेल का भाग शेष रह जाय तब उसको उतार कर छान लेना चाहिये ।

लुग्दी की औषधियां- चित्रक की जड़, कलिहारी की जड़, सोंठ, हलदी, करंज के बीज, हरताल, मेंसिल अनन्त मूल, आकड़े की जड़, कनेर की जड़, सप्तपर्ण की छाल, गाय का गोबर, खैर सार, नीम के पत्ते, काली मिर्च और कसोंदी के बीज । इन सब चीजों को एक २ तोला लेकर पानी के साथ खरल खरके इनकी लुगदी बनाकर उसमें रख देना चाहिये ।

लाभ- इस तेल का मालिश करने से श्वेत कुष्ठ, खाज, चित्रकुष्ठ, इत्यादि अनेक रोग दूर होते हैं।

रोगी के शरीर का अगर बहुत हिस्सा सफेद हो गया हो तो सारे भाग पर एक ही साथ दवा नहीं लगाना चाहिये । क्योंकि बावची के बीजों से बनाई हुई औषधियां बहुत प्रदाहक होती हैं और इनको लगाने से बहुत जलन होती है। इसलिये थोड़े-थोड़े भाग पर ऐसो औषधियों को लगाना चाहिये । जब वह भाग अच्छा हो जाय तब दूसरें भाग पर औषधि लगाना चाहिये ।

बाकुची के बीज कुछ अंशों में मिलाने का स्वभाव रखते हैं । इसलिये नाजुक प्रकृति वाले रोगियों को खिलाने से या उनके रोगग्रस्त अङ्ग पर लगाने से रोगग्रस्त अङ्ग पर जलन पैदा होकर छोटी २ फुन्सियां पैदा हो जाती हैं । इन फुन्सियों के फूटने और उनके अच्छा होने के साथ ही चमड़ी का रङ्ग बदल जाता है। अगर किसी व्यक्ति को इसकी जलन सहन न हो तो तिल और खोपर के पानी के साथ पीस कर लेप वाली जगह पर लगाने से और तिल तथा खोपरे को खिलाने से उपद्रव की शान्ति हो जाती है।

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बाबची के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Bakuchi?)

बाकुची के इस्तेमाल की मात्रा ये होनी चाहिएः-

चूर्ण – 0.5-2 ग्राम

काढ़े को 10-12 ग्राम

अधिक लाभ के लिए चिकित्सक के परामर्श लेकर ही बाकुची का इस्तेमाल करें।

बावची के उपयोगी भाग (Useful Parts of Bakuchi in Hindi)

बाकुची (bavachi) के निम्न भागों का उपयोग कर सकते हैंः-

  • बीज

  • बीज से बना तेल

  • पत्ते

  • जड़

  • फली

बाबची के नुकसान :Side Effects of Bakuchi

  • बाकुची के सेवन से पेट से संबंधित विकार हो सकते हैं।

  • ज्यादा बाकुची के सेवन से उल्टी हो सकती है।

  • ऐसी परेशानी होने पर दही का सेवन करना चाहिए।

  • इसका अधिक सेवन पित्त को बढ़ाता है और बुखार में नुकसान पहुंचाता है। कोई – कोई कहते हैं कि बाबची आंख की रोशनी को कम करती है। धातु को सुखाती है और खांसी में नुकसान पहुंचाती है।

बाबची कहाँ पे पाया या उगाया जाता है (Where is Bakuchi Found or Grown?)

बाकुची (bavachi) के छोटे-छोटे पौधे वर्षा-ऋतु में अपने आप उगते हैं। इसकी खेती कई स्थानों पर भी की जाती है। भारत में बाकुची  विशेषतः राजस्थान, कर्नाटक और पंजाब में कंकरीली भूमि और जंगली झाड़ियों में मिलता है।

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