बला के फायदे और नुकसान | Bala ke fayde | health benefits of Bala in hindi

बला के फायदे और नुकसान | Bala ke fayde | health benefits of Bala in hindi

बला परिचय :-

खरैठी का पौधा बहुत ही गुणकारी है, क्योंकि यह एक जड़ीबूटी है। लोग बला को बरियार, खरेठी आदि कई नामों से जानते हैं। आयुर्वेद में बला के पौधे (bala plant) के अनेक औषधीय गुण बताए गए हैं।

बला क्या है (What is Bala?)

खरैठी (बला )चार प्रकार की होती है इसलिए इसे बलाचतुष्टयकहते हैं। इस की और भी कई जातियां हैं पर बला, अतिबला, नागबला और महाबला- ये चार जातियां ही ज्यादा प्रसिद्ध और प्रचलित हैं। बलाद्वय में बला और अतिबला तथा इनमें नागबला मिलाने पर बलात्रय होता है। भाव प्रकाश में महाबला मिला कर बलाचतुष्टय किया गया। इसमें राजबला मिला कर बलापंचक कहा जाता है। मुख्यतः इसकी जड़ और बीज को उपयोग में लिया जाता है ।

यह झाड़ीनुमा 2 से 4 फ़ीट ऊंचा क्षुप होता है जिसका मूल और काण्ड (तना) सुदृढ़ होता है। पत्ते हृदय के आकार के आयताकार, लट्वाकार, गोल दन्तुर, रोमश, अकेले, 7-9 शिराओं से युक्त, 1 से 2 इंच लम्बे और आधे से डेढ़ इंच चौड़े होते हैं। फूल छोटे पीले या सफ़ेद तथा 7 से 10 स्त्रीकेसर युक्त होते हैं। बीज छोटे छोटे, दानेदार, गहरे भूरे रंग के या काले होते हैं उन्हें बीजबन्दकहते हैं।

आवश्यकता के अनुसार चिकित्सा में, इसके पत्ते, बीज, जड़, छाल और पंचांग का भी उपयोग किया जाता है लेकिन ज्यादातर जड़ और बीज का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है।

यह देश के सभी प्रान्तों में वर्ष भर तक पाया जाता है पर वर्षां ऋतु में यह खेतों और खेतों की मेड़ों पर अधिकतर होता है। इसकी जड़ व डण्डी बहत मज़बूत होती है जो आसानी से नहीं टूटती। इसकी चारों जातियों में गुणों की दृष्टि से विशेष अन्तर नहीं होता इसलिए किसी भी जाति की बला का उपयोग किया जा सकता है।

आयुर्वेद ने इनके विभिन्न नाम बताये हैं जो इस प्रकार हैं- बला, को खरैटी, वाट्यालिका, वाट्या, महाबला को पीत पुष्पा और सहदेवी या सहदेना, अतिबला को कंघी, ऋष्य प्रोक्ता और कंकतिका, नाग बला को गांगेरुकी, गुलसकरी और गंगेरन आदि नाम दिये गये हैं। ये सभी किस्में, गुण और प्रभाव की दृष्टि से लगभग एक समान ही हैं।

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अनेक भाषाओं में बला के नाम (Bala Called in Different Languages)

  • हिंदी :– बला , बरियार, बरियारा, बरियाल, खरेठी, खरैठी, बीजबन्द ;

  • संस्कृत नाम :– बला, वाटयलिका, वाट्या, वाट्यालका, भद्रा, बलभद्रा, भद्रौदनी, वाटी, समङ्गा, खरयष्टिका, महासमङ्गा, ओदनिका, शीतपाकी, वाटयपुष्पी, समांशा, विल्ला, वलिनी, कल्याणिनी, भद्रबला, मोटावाटी, बलाढ्या, निलया, रक्ततन्दुला, क्रूरा, फणिजिह्विका ;

  • English :– Country mallow (कन्ट्री मेलो), हार्टलीफ साईडा (Heartleaf sida), व्हाइट बर्र (White burr) ;

  • Scientific Names :– साइडा कॉर्डिफोलिआ (Sidacordifolia)

  • Oriya – बड़ीयानान्ला (Badiananla

  • Kannada– किसंगी (Kisangi), चित्तूहारालू (Chittuharalu)

  • Gujarati – बलदाणा (Baladana), खरेटी (Khareti)

  • Tamil (sida cordifolia in tamil) – मनैपुण्डु (Manepundu), नीलातुत्ती (Nilatutti)

  • Telugu – चिरिबेण्डा (Chiribenda), अंतीसा (Antisa)

  • Bengali – बरीला (Barila), बला (Bala)

  • Nepali – बरियार (Bariyar), बालू (Balu)

  • Punjabi – खरैहठी (Khereihati), सिमक (Simak), खारेन्ट (Kharent)

  • Malayalam – कत्तुरम (Katturam)

  • Marathi – चिकणा (Chikana), खिरान्टी (Khiranti)

  • Persian – बीज बन्द (Beej band)

बला  के द्रव्यगुण

  • रस (taste on tongue):- मधुर

  • गुण (Pharmacological Action): स्निग्ध एवं ग्राही

  • वीर्य (Potency): शीतवीर्य

  • विपाक (transformed state after digestion):- मधुर

बला के गुण : Properties of Bala

चारों प्रकार की बला शीतवीर्य, मधुर रस युक्त, बलकारक, कान्तिवर्द्धक, स्निग्ध एवं ग्राही तथा वात रक्त पित्त, रक्त विकार और व्रण (घाव) को दूर करने वाली होती है।

बला से विभिन्न रोगों का सफल उपचार : Bala benefits and Uses (labh) in Hindi

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खरैठी (बला) के सेवन से गर्भवती महिलाओं को लाभ (Bala Root Beneficial for Pregnant Women in Hindi)

  • बला की जड़ का पेस्‍ट बना लें। इसे घी में पका कर सेवन करें। इससे गर्भ के दौरान होने वाला दर्द दूर हो जाता है। इससे गर्भस्थ शिशु एवं गर्भवती महिला का स्वास्थ्य ठीक (kurunthotti root for pregnancy) रहता है।dcgyan

  • खरैठी (बला) की जड़ का काढ़ा बना लें। इसे घी में पका लें। घी को सुबह-शाम दो बार पिलाएं। इससे प्रसव पीड़ा में लाभ होता है।

  • बला की जड़ के चूर्ण में अतिबला का चूर्ण, मिश्री और मुलेठी चूर्ण बराबर भाग में मिला लें। इस चूर्ण की 3-6 ग्राम की मात्रा में लेकर शहद और घी मिलाकर सेवन करें। ऊपर से दूध पीने से गर्भधारण में सहयोग मिलता है। इस चूर्ण में बड़ के अंकुर तथा नागकेसर को भी मिलाएं तो और भी लाभदायक होता है।

मासिक धर्म विकार में बला से लाभ (Bala Powder Helps in Menstrual Disorder in Hindi)dcgyan

  • बरियार (sida cordifolia) पौधा के चूर्ण को दूध में पकाकर पिलाएं। इससे मासिक धर्म विकार में लाभ होता है।

  • बला तेल की मालिश करने से भी मासिक धर्म विकारों में लाभ होता है।

महिलाओं के रोग में बला का पौधा लाभदायक (Bala Benefits in Women Related Disease in Hindi)

  • बला की जड़ और पत्तों को चावल के धोवन के साथ पीसकर छान लें। इसका सेवन करने से खूनी प्रदर (Metrorrhagia) की शिकायत दूर होती है।

  • 3 ग्राम बला बरियार (balaa) के चूर्ण में बराबर भाग मिश्री या खांड मिला कर प्रयोग करें।

  • 5 ग्राम बला की जड़, 7 दाना काली मिर्च लें। दोनों को 50 मिलीग्राम पानी में पीसकर छान लें। सुबह-शाम सात दिन तक इसका प्रयोग करने से महिलाओं में योनी से सफेद पानी आने (श्‍वेत प्रदर या ल्यूकोरिया) की समस्‍या में बहुत लाभ होता है। इस दौरान मैथुन तथा चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।

  • 3 ग्राम बला की जड़ के चूर्ण में मिश्री मिला लें। इसे गाय के दूध के साथ दिन में 3 बार सेवन करें। इससे श्‍वेत प्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ होता है।

अण्डकोष विकार में बला का पौधा फायदेमंद (Bala Uses in Hydrocele Disorder in Hindi)

 बरियार का पौधा  (bariyar ka paudha) अंडकोष विकार में भी लाभदायक होता है। बला के 10 मिलीग्राम काढ़ा में 10 मिलीग्राम तक शुद्ध अरंडी का तेल मिला लें। इसे दिन में दो बार पिलाने से लाभ होता है।

पेशाब के साथ वीर्य आने की समस्‍या (शुक्रमेह) में बला की जड़ से लाभ (Benefits of Bala Root to Treat Sukrameh in Hindi)

  • पेशाब के साथ यदि धातु आता तो 10 ग्राम बला (balaa) की जड़ और 5 ग्राम महुआ के पेड़ की छाल लें। इसे 250 मिलीग्राम पानी में पीसकर छान लें। उसमें 25 ग्राम मिश्री या शक्‍कर मिला लें। सुबह-शाम इसका सेवन कराने से लाभ होता है।

  • 10 ग्राम बला के बीज चूर्ण में इतनी ही काली मिर्च का चूर्ण मिला लें। इसकी 6 ग्राम मात्रा सुबह-शाम मिश्री या शक्‍कर के साथ सेवन करें। इसके ऊपर से 250 मिलीग्राम गाय के दूध में शक्‍कर मिला कर पिएं। यह शुक्रमेह में अत्‍यंत लाभप्रद होता है।

  • बरियार की ताजी जड़ को पानी के साथ पीसकर छान लें। इसमें थोड़ी शक्‍कर मिलाकर सुबह में पिलाने से शुक्रमेह में लाभ होता है।

घाव सुखाने के लिए बला का पौधा फायदेमंद (Bala Uses for Healing Wound in Hindi)

बला (sida cordifolia) के पत्‍ते, छाल, जड़ आदि पांचों भाग से पेस्‍ट तैयार करें या इनका रस निकालें। इसे लगाने से हथियार के प्रहार से होने वाले घाव तुरंत भर जाते हैं। 

मैनिया में फायदेमंद सफेद बला का सेवन (Benefits of White Flower Bala in Mania in Hindi)

सफेद फूल वाले बला (balaa) की जड़ का 10 ग्राम चूर्ण बना लें। इसमें अपामार्ग चूर्ण 5 ग्राम, दूध 500 मिलीग्राम लें। इतना ही पानी मिला लें। इन सबको मिलाकर उबालें। जब केवल दूध बच जाए तब इसे ठंडा कर छान लें। इसे सुबह के समय सेवन करने से उन्माद (Mania) की बीमारी में लाभ होता है।

मूत्र रोग (पेशाब संबंधी समस्याएं) में बला के सेवन से लाभ (Bala Leaves Benefits to Treat Urinary Problem in Hindi)

  • बला के 10 ग्राम पत्तों को काली मिर्च के साथ घोटकर छान लें। इसे सुबह-शाम मिश्री के साथ पिलाने से पेशाब में जलन और मूत्र संबंधी अन्य रोग ठीक होते हैं।

  • बरियार की 10-15 ग्राम ताजी जड़ को दूध में पीसकर पिलाएं। भोजन में चावल, घी तथा दूध मिलाकर सेवन करें। इससे लाभ होता है।

  • खरैठी (बला) के पौधे के 10 ग्राम पत्‍तों को आधा लीटर पानी में भिगोकर छान लें। इसका लुआब निकाल लें। इसमें मिश्री मिलाकर सुबह-शाम पिलाने से पेशाब खुलकर आता है। इसका सेवन मधुमेह में भी लाभदायक (sida cordifolia medicinal uses) होता है।

  • बला के बीजों के 1 ग्राम चूर्ण में 2 ग्राम मिश्री मिला लें। दूध के साथ सुबह-शाम इसका सेवन करने से पेशाब से जुड़ी बीमारी ठीक होती है।

  • बरियार  की जड़, गोखरू, भटकटैया की जड़ 1-1 ग्राम, सोंठ 1/2 ग्राम और 3 ग्राम गुड़ को पानी में पका लें। इसे पीने से मल-मूत्र की रुकावट दूर होती है। इसके सेवन से बुखार से होने वाले सूजन भी ठीक होता है।

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बला के औषधीय गुण से फाइलेरिया (श्‍लीपद) का इलाज (Bala Plant Root is Beneficial in Elephantiasis in Hindi)

फाइलेरिया में भी बरियार का पौधा बरियार का पौधा (bariyar ka paudha) लाभदायक होता है। बरियार और अतिबला की जड़ का बराबर मात्रा में चूर्ण लें। इसे 3 ग्राम की मात्रा में लेकर दूध के साथ सुबह-शाम सेवन कराएं।

लकवा में बला की जड़ फायदेमंद (Bala Root Benefits in Paralysis in Hindi)

  • बला की जड़ को पानी में उबालकर 1 माह तक सेवन करने से लकवा में लाभ होता है।

  • बरियार की जड़ को तेल में पका कर भी मालिश करनी चाहिए।

बांह की जकड़न में बला का पौधा फायदेमंद (Bala Benefits in Getting Relief from Frozen Shoulder in Hindi)

  • अवबाहुक नामक वात विकार में 2 ग्राम बरियार की जड़, या 1 ग्राम फरहद (पारिभद्र) की छाल का काढ़ा बना लें। सुबह-शाम इस काढ़ा को पीने से बहुत लाभ होता है।

  • 10-20 मिलीग्राम बला की जड़ के काढ़ा में सेंधा नमक मिलाकर पिलाने से बांह के जकड़न में लाभ होता है।

  • 2 ग्राम बला की जड़ के साथ 2 ग्राम नीम की छाल मिलाकर काढ़ा तैयार करें। इसे सुबह-शाम पिलाने से एक माह में मन्यास्तम्भ (Cervical spondylitis) में लाभ होने लगता है।

बला के सेवन से गठिया में आराम (Benefit of Bala to Get Relief from Arthritis in Hindi)

  • 5-10 मिलीग्राम बरियार की जड़ से काढ़ा तैयार करें। इस काढ़ा को दिन में 3 बार पिलाने से गठिया में लाभ होता है।

  • अंगुली के पोरों की गांठ में होने वाले घावों पर बला (bala herb) के कोमल पत्तों को पीसकर टिकिया बनाकर बांध दें। उसके ऊपर ठंडा पानी डालते रहें। इस प्रकार दिन में 2-3 बार करने से तुरंत आराम मिलता है।

  • बंद गांठ को फोड़ने के लिए बला के कोमल पत्तों को पीसकर पुल्टिस (पट्टी) बनाकर बांधें। इसके बाद ऊपर से जल छिड़कते रहें। गांठ शीघ्र फूट जाती है।

शारीरिक कमजोरी दूर करने के लिए बला का सेवन (Bala Treats Body Weakness in Hindi)

  • बरियार का पौधा शारीरिक कमजोरी दूर करने में भी  लाभदायक होता है। बला की जड़ की छाल के चूर्ण में बराबर भाग में मिश्री मिला लें। इसका लगभग 3-5 ग्राम चूर्ण को दूध के साथ सुबह और शाम सेवन करें।

  • बला के पत्‍ते, छाल, जड़ आदि पंचांग का काढ़ा बना लें। इसे 3 मिलीग्राम मात्रा में पिलाएं।

  • 50 ग्राम बला पंचांग को 3-4 लीटर पानी में पकाकर स्नान कराने से सूखा रोग में लाभ होता है।

  • बला को मिलाकर मयूर घी तैयार करें। इसकी बूंदों को नाक में रखने, तथा उबटन के तौर पर इस्‍तेमाल करने सिर दर्द, कंठ के दर्द, पीठ दर्द, मासिक धर्म विकार, कान की बीमारी, नाक की बीमारी, आंख की बीमारी तथा जीभ से जुड़ी बीमारियों में लाभ (sida cordifolia medicinal uses) होता है।

पागलपन के इलाज में मददगार बला (Bala Beneficial to Treat Mental Disorder in Hindi)

बला में वात शामक गुण होने के कारण यह इसके लक्षणों को कम करने में मदद करता है। पागलपन का मुख्य कारण वात दोष का असंतुलित होना होता है।

अंडकोष के सूजन को कम करने में बला फायदेमंद (Bala Beneficial to Treat Testicles in Hindi)

बला का अंडकोष की सूजन को कम करने में  प्रयोग फायदेमंद होता है इसके लिए बला को  एरण्ड तेल के साथ प्रयोग करते है। 

स्वरभंग के इलाज में फायदेमंद बला (Benefit of Bala to Get Relief from Sore Throat or Hoars of Voice in Hindi)

स्वरभंग या गले का बैठने जैसी समस्या में बला का उपयोग फायदेमंद होता है क्योंकि बला में एंटीइंफ्लामेटरी गुण होता है जोकि गले को आराम देकर स्वरभंग के लक्षणों में को कम करता है।

हाथीपांव के इलाज में फायदेमंद बला (Benefit of Bala to Treat Filaria in Hindi)

हाथीपाँव एक ऐसी व्याधि है जिसमें मुख्य रूप से कफ और साथ में वात की दुष्टि है। बला में वात और कफ शामक गुण पाए जाने के कारण यह इसके लक्षणों को कम करने में मदद करता है।

खूनी बवासीर के इलाज में लाभकारी बला (Bala Beneficial to Treat Hemorrhoids in Hindi)

बला में ग्राही एवं शीतल गुण के कारण यह खुनी बवासीर से खून को रोक कर उस स्थान पर शीतलता प्रदान करता है साथ हि खून को आने से रोकता है। 

बिच्छू के काटने पर खरैटी फायदेमंद (Bala Beneficial to Treat Scorpian Bite in Hindi)

बिच्छू आदि किसी विषैले प्राणी के काटने पर उस स्थान पर वात के दुष्टि के कारण दर्द आदि लक्षण दिखते हैं। ऐसे में बला की वात शामक गुण होने के कारण यह इसके लक्षणों को कम करने में मदद करता है।

खुजली (चकत्ते) में बला के फायदे (Bala Leaves Benefits in Itching in Hindi)

बला के पत्तों को पीसकर रस निचोड़ लें। इससे मालिश करने से कफ दोष के कारण होने वाली खुजली और चकत्‍ते की समस्या ठीक होती हैं। बेहतर परिणाम के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर परामर्श लें।

सिर के रोग में बला से लाभ (Benefits of Bala to Get Relief from Head Disease in Hindi)

बला पौधा (bala plant) की जड़ तथा बेल में पाया जाने वाला द्रव्य से काढ़ा बना लें। इसमें दूध एवं घी मिला कर पका लें। इसे ठंडा करने के बाद इसकी बूंद नाक में डालें। इससे सिर में होने वाले वात रोग का उपचार होता है।

आंखों की बीमारी में बला के फायदे (Bala Benefits to Treat Eye Disease in Hindi)

  • खरैठी (बला)  तथा बबूल के पत्‍तों को पीसकर आंखों के बाहर लगाएं। इससे आंख आने की समस्या ठीक होती है।

  • बला के पत्तों के साथ बबूल के पत्तों को पीसकर टिकियां बना लें। इसे आंखों के ऊपर रखें। ऊपर से साफ कपड़े से लपेट देें। इससे लाभ होता है।

छाती की सूजन में बला के फायदे (Benefits of Bala Root to Treat Chest Swelling in Hindi)

 इसकी जड़ (bala root) का रस 10-15 मिलीग्राम निकाल लें। इसमें 60 मिलीग्राम हींग मिलाकर पीने से सीने की सूजन की समस्या ठीक होती है।

बला के औषधीय गुण से खांसी का इलाज (kurunthotti Plant Benefits in Fighting with Cough in Hindi)

बराबर भाग में बला, छोटी कटेरी, बड़ी कटेरी, अडूसा तथा अंगूर को मिलाकर काढ़ा तैयार करें। इसकी 10-30 मिलीग्राम की मात्रा में शहद मिलाकर पीने से पित्‍त के कारण होने वाली खांसी ठीक होती है। 

बला के औषधीय गुण से गले की बीमारी का इलाज (Bala Benefits to Treat Throat Disorder in Hindi)

  • इसकी जड़ का 1-2 ग्राम चूर्ण बना लें। इसमें मिश्री, शहद तथा घी मिलाकर सेवन करें। इससे आवाज से संबंंधित समस्‍या ठीक हो जाती है।

  • बला, शालपर्णी, विदारी तथा मधूक को घी में पका लें। इसमें नमक मिलाकर प्रयोग करने से आवाज बैठने (गला बैठने) की परेशानी ठीक होती है।

बला के गुण से घेंघा का इलाज (Kurunthotti Plant Benefits to Treat Goiter in Hindi)

  • गिलोय, नीम, हंसपदी, कुटज, पिप्पली, बला, अतिबला तथा देवदारु को तेल में पका लें। इसे नियमित पीने से घेंघा में लाभ (country mallow) होता है।

  • बला के रस, अतिबला के रस और देवदारु से तेल को पका लें। इसे लगाने से घेंघा में लाभ होता है।

हर्निया में बला से लाभ (Benefits of Kurunthotti Plant in Hernia Treatment in Hindi)

बरियार (बला) का पौधा लें। इसकी जड़ (bala root) के पेस्‍ट को दूध में पका (या क्षीरपाक) लें। इसमें बराबर भाग में अरंडी का तेल मिला लें। इसे पीने से पेट की गैस और हार्निया में लाभ होता है।

बला के औषधीय गुण से दस्‍त पर रोक (Benefits of Kurunthotti Plant to Stop Diarrhea in Hindi)dast

बरियार का पौधा (bariyar ka paudha) लें। इसकी जड़ से 5 ग्राम काढ़ा बना लें। इसमें 1 ग्राम जायफल घिसकर पिलाने से दस्‍त पर रोक लगती है।

बला तथा सोंठ को दूध में पका लें। इस दूध में गुड़ तथा तिल का तेल मिला कर पीने से दस्‍त बंद हो जाता है।

वृषण वृद्धि दूर करने में बला करता है मदद

अण्डकोष के बढ़ जाने को वृषण वृद्धि कहते हैं। इस व्याधि को दूर करने के लिए खरैटी की जड़ का ऊपर बताई गई विधि से क्वाथ (काढ़ा) बना लें। चार चम्मच क्वाथ में 2 चम्मच एरण्ड तैल (Castor Oil) पीने से वृषण वृद्धि दूर हो जाती है।

गांठ में बला के इस्तेमाल से फायदा

बद, गांठ या अनपके फोड़े को फोड़ने के लिए खरैटी के कोमल पत्तों को पीस कर इसकी पुल्टिस बांध दें और ऊपर से थोड़ी थोड़ी देर से पानी के छींटे मारते रहें। इससे बद या गांठ पक कर फूट जाती है और चीरा लगाने की नौबत नहीं आती।

श्वेत प्रदर में बला चूर्ण के प्रयोग से लाभ

शारीरिक निर्बलता के कारण महिला को प्रदर रोग हो तो बला के बीजों का बारीक पिसा छना चूर्ण 1-1 चम्मच सुबह शाम, शहद में मिला कर लें और ऊपर से मीठा कुनकुना दूध पी लें। इस प्रयोग से दुर्बलताजन्य प्रदर रोग दूर हो जाता है।

शुक्रमेह बंद करने में बला करता है मदद

मूत्र मार्ग से धातु स्त्राव होने को शुक्रमेह या जरयान रोग कहते हैं। खरेंटी (बला) की ताज़ी जड़ का छोटा टुकड़ा (लगभग 5-6 ग्राम) एक कप पानी के साथ कूटपीस और घोंट छान कर सुबह खाली पेट पीने से कुछ दिनों में शुक्रधातु गाढ़ी हो जाती है और शुक्रमेह होना बन्द हो जाता है।

स्वर भेद मिटाए बला का उपयोग

ठण्ड, गर्मी या वात प्रकोप के असर से, ज्यादा देर तक चिल्लाने या ज़ोर लगा कर गाने आदि कारणों से आवाज़ खराब हो जाती है, गला बैठ जाता है और कभी कभी लम्बे समय तक आवाज़ ठीक नहीं होती। बला की जड़ का महीन पिसा छना चूर्ण आधा चम्मच, थोड़े से शहद में मिला कर सुबह-शाम चाटने से कुछ दिनों में आवाज़ ठीक हो जाती है।

शारीरिक दुर्बलता में बला का उपयोग फायदेमंद

शारीरिक, स्नायविक और यौनदुर्बलता दूर करने में बला रसायन का काम करती है अतः व्याधियों और वृद्धावस्था के लक्षणों को दूर रखने में सक्षम है। आधा चम्मच मात्रा में इसकी जड़ का महीन पिसा हुआ चूर्ण सुबह शाम मीठे कुन कुने दूध के साथ लेने और भोजन में दूध चावल की खीर शामिल कर खाने से शरीर का दुबलापन दूर होता है, शरीर सुडौल बनता है, सातों धातुएं पुष्ट व बलवान होती हैं तथा बल, वीर्य तथा ओज की खूब वृद्धि होती है।

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बला से निर्मित अन्य आयुर्वेदिक योग (दवा) :

बलाद्य घृत निर्माण विधि और लाभ

खरैटी की जड़ गंगेरन की छाल और अर्जुन की छाल-तीनों 500-500 ग्राम ले कर मोटा मोटा (जौ कुट) कूट लें और 8 लिटर पानी में डाल कर इतना उबालें कि पानी 2 लिटर बचे। इसमें 750 ग्राम गोघृत डाल कर मन्दी आंच पर पकाएं। जब सब पानी जल जाए सिर्फ़ गोघृत बचे तब उतार कर ठण्डा कर लें। यह बलाद्य घृत है।

इस घृत को 1-1 चम्मच, सुबह शाम, मिश्री मिला कर, खा कर ऊपर से दूध पिएं। यह बलाद्य – घृत हद्रोग, हृदयशूल उरःक्षस, रक्त पित्त, वातज सूखी खांसी, वातरक्त, पित्त प्रकोप जन्य रोगों को दूर करता है। यह घृत बाज़ार में नहीं मिलता अतः किसी स्थानीय वैद्य से बनवा लें।

गोक्षरादि चूर्ण निर्माण विधि और लाभ

नाग बला, अति बला, कौंच के शुद्ध (छिलकारहित) बीज, शतावर, तालमखाना और गोखरू-सब द्रव्य बराबर बज़न में ले कर कूट पीस छान कर महीन चूर्ण करके मिला लें और छन्नी से तीन बार छान लें ताकि सब द्रव्य अच्छी तरह मिल कर एक जान हो जाएं।

यह चूर्ण एक एक चम्मच, सुबह शाम या रात को सोते समय मिश्री मिले कुनकुने गर्म दूध के साथ पीने से बलवीर्य और पौरुष शक्ति की वृद्धि होती है। शीघ्र पतन के रोगी पुरुषों के लिए यह योग आयुर्वेद के वरदान के समान है। सहवास से एक घण्टे पहले एक खुराक का सेवन करना बहुत वाजीकारक होता है। इसमें कोई मादक द्रव्य नहीं है फिर भी यह योग श्रेष्ठ वाजीकरण करने वाला उत्तम योग है।

इसे नियमित रूप से 3-4 माह तक सुबह शाम सेवन करें, खटाई का सेवन न करें और इसका चमत्कार स्वयं देख लें। इसके नियमित सेवन से वीर्य पुष्ट व गाढ़ा होता है जिससे स्वप्नदोष और शीघ्रपतन रोग समूल नष्ट हो जाते हैं। यह एक कामोत्तेजक और अत्यन्त वाजीकारक योग है इसलिए इस योग का सेवन अविवाहित युवकों को नहीं करना चाहिए। यह योग बना बनाया बाज़ार में आयुर्वेदिक दवा विक्रेता के यहां मिलता हैं।

बला चूर्ण : Bala Churna  in Hindi

  • तनसुख बला चूर्ण – 300 ग्राम 

  • Naturmed’s Bala Powder – 200 ग्राम 

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बला के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Bala?)

इसकी जड़ के चूर्ण को आधा चम्मच (3-4 ग्राम) और काढ़े के लिए पंचांग को 10 ग्राम मात्रा में लिया जाता है।

बला के नुकसान :Side Effects of Bala

खरैठी (बला)  के सेवन से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें ।

बला कहाँ पे पाया या उगाया जाता है (Where is Bala Found or Grown?)

खरैठी (बला)  (balaa) के पौधे सूखे स्‍थानों पर पाए जाते हैं। यह वनों में भी पाया जाता है।

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