भाँग के फायदे और नुकसान | Bhang ke fayde | health benefits of Bhang in hindi

भाँग के फायदे और नुकसान | Bhang ke fayde | health benefits of Bhang in hindi

(Bhang )भाँग परिचय :-

शिवप्रिया (भांग ) का पौधा स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी गुणकारी होता है। इसमें कई औषधीय गुण मौजूद होते है जिसके सेवन से कई बड़ी बीमारियों से शरीर का बचाव किया जा सकता है। अधिकतर लोग भांग के पौधों से नशे के लिए सामग्री निकालते है। भांग का मादा पौधा होता है उसकी जो मंजरिया होती है उससे गांजा तैयार किया जाता है। इन पौधों में केनाबिनोल नाम का रसायन मौजूद होता है जिसके शारीरिक रूप से कई तरह के चमत्कारी फायदे भी है।

भाँग क्या है (What is Bhang ?)

भारतवर्ष में भांग के अपने आप पैदा हुए पौधे सभी जगह पाये जाते हैं। भांग विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार एवं पश्चिम बंगाल में प्रचुरता से पाया जाता है। भांग के पौधे 3-8 फुट ऊंचे होते हैं। इसके पत्ते एकान्तर क्रम में व्यवस्थित होते हैं। भांग के ऊपर की पत्तियां 1-3 खंडों से युक्त तथा निचली पत्तियां 3-8 खंडों से युक्त होती हैं। निचली पत्तियों में इसके पत्रवृन्त लम्बे होते हैं।

भांग के नर पौधे के पत्तों को सुखाकर भांग तैयार की जाती है। भांग के मादा पौधों की रालीय पुष्प मंजरियों को सुखाकर गांजा तैयार किया जाता है। भांग की शाखाओं और पत्तों पर जमे राल के समान पदार्थ को चरस कहते हैं। भांग की खेती प्राचीन समय में पणिकहे जानेवाले लोगों द्वारा की जाती थी।

अनेक भाषाओं में भाँग के नाम (Bhang  Called in Different Languages)

  • हिंदी :– भाँग, मादिनी, विजया, जया, त्रैलोक्य-विजया, आनन्दा, हर्षिणी, मोहिनी, मनोहरा, हरप्रिया, शिवप्रिया, ज्ञान-वल्लिका, कामाग्नि, तन्द्रारुचि-वर्द्धिनी प्रभृति।

  • संस्कृत नाम :– भङ्गा

  • English :– Bhang

  • Scientific Names :– Cannabis indica

भाँग  के द्रव्यगुण

  • रस (taste on tongue):- कड़वी,

  • गुण (Pharmacological Action): गुरु/भारी,

  • वीर्य (Potency): गरम

  • विपाक (transformed state after digestion):- पाचक, हल्की

भाँग के गुण : Properties of Bhang

  •  शिवप्रिया (भाँग) कफनाशक, कड़वी, ग्राही–काबिज, पाचक, हल्की, तीक्ष्ण, गरम, पित्तकारक तथा मोह, मद, वजन और अग्नि को बढ़ाने वाली है

  •  भाँग कोढ़ और कफनाशिनी, बलवृद्धेिनी, बुढ़ापे का नाश करने वाली, मेधाजनक और अग्निकारिणी है।

  • शिवप्रिया (भाँग) से अग्नि-दीपन होती, रुचि होती, मल रुकता, नींद आती और स्त्री-प्रसंग की इच्छा होती है।

  •  किसी-किसी ने इसे कफ और वात जीतने वाली भी लिखा है।

  • हिकमत के एक निघण्टु में लिखा है- भाँग दूसरे दर्जे की गरम, रूखी और हानि करने वाली है।

  •  इससे सिर में दर्द होता और स्त्री-प्रसंग में स्तम्भन या रुकावट होती है।

  • भाँग पागल करने वाली, नशा लाने वाली, वीर्य को सोखने वाली, मस्तिष्क-सम्बन्धी प्राणों को गदला करने वाली, आमाशय की चिकनाई को खींचने वाली और सूजन का लय करने वाली है।

  • जो व्यक्ति इसके आदी नहीं होते, उन्हें शुरू में उत्तेजना, मति-भ्रम, प्रमाद, अकारण हँसी, बढ़-बढ़ कर निरर्थक बातें करना आदि; फिर चक्कर, झनझनाहट, सनसनाहट, निर्बलता और बेहोशी आती है।

  •  जो इसके आदी होते हैं, उन्हें अन्त में भोजन में अरुचि हो जाती, शरीर कृश हो जाता, हाथ-पाँवों में कम्पन आता, और नपुंसकता तथा बुद्धि-हीनता आती है।

  •  भाँग के बीजों को संस्कृत में भङ्गबीज, फारसी में तुख्म बंग और अरबी में बजरुल-कनब कहते हैं। इनकी प्रकृति गरम और रूखी होती है। ये आमाशय के लिये हानिकारक, पेशाब लाने वाले, स्तम्भन करने वाले, वीर्य सोखने वाले, आँखों की रोशनी को मन्दी करने वाले और पेट में विष्टंभताप्रद हैं।

  •  बीज निर्विषैले होते हैं। भाँग में भी विष नहीं है, पर कितने ही इसे विष मानते हैं। मानना भी चाहिये; क्योंकि यह अगर बेकायदे और बहुत ही ज्यादा खा ली जाती है, तो आदमी को सदा को पागल बना देती और कितनी ही बार मार भी डालती है। हमने आँखों से देखा है, कि जयपुर में एक मनुष्य ने एक अमीर जौहरी भंगड़ के बढावे देने से, एक दिन अनाप-शनाप भाँग पी ली। बस, उसी दिन से वह पागल हो गया। अनेक इलाज होने पर भी आराम न हुआ।

  •  गाँजा भी भाँग का ही एक मद है।

भाँग दो तरह की होती है—

(१) पुरुष के नाम से, और (२) स्त्री के नाम से। पुरुष जाति के क्षुप से भाँग के पत्ते लिये जाते हैं। उन्हें लोग घोट कर पीते और भाँग कहते हैं। स्त्री-जाति के पत्तों से गाँजा होता है।

भाँग से विभिन्न रोगों का सफल उपचार : Bhang benefits and Uses (labh) in Hindi

(1) भाँग 1 तोले और अफीम 1 माशे-दोनों को पानी में पीस, कपड़े पर लेप कर, जरा गरम करके गुदा-द्वार पर बाँध देने से बवासीर की पीड़ा तत्काल शान्त होती है। परीक्षित है।

(2) भाँग, इमली, नीम, बकायन, सम्हालू और नील—इनमें से हरेक की पत्तियाँ पाँच-पाँच तोले ले कर, सवा सेर पानी में डाल, हाँड़ी में काढ़ा करो। जब तीन-पाव पानी रह जाय, चूल्हे से उतार लो। इस काढ़े का बफारा बवासीर वाले की गुदा को देने से मस्से नष्ट हो जाते हैं।

(3) शिवप्रिया (भाँग) को भून कर पीस लो। फिर उसे शहद में मिला कर, रात को सोते समय, चाट लो। इस उपाय से घोर अतिसार, पतले दस्त, नींद न आना, संग्रहणी और मन्दाग्नि रोग नष्ट हो जाते हैं। परीक्षित है।

(4) भाँग को बकरी के दूध में पीस कर पाँवों पर लेप करने से निद्रा-नाश रोग आराम हो कर नींद आती है।

(5) छह माशे भाँग और छह माशे काली मिर्च दोनों को सुखी ही पीस कर खाने और इसी दवा को सरसों के तेल में मिला कर मलने से पक्षाघात रोग नष्ट हो जाता है।

(6) भाँग को जल में पीस कर, लुगदी बना लो, घी में सान कर गरम करो। फिर टिकिया बना कर गुदा पर बाँध दो और लँगोट कस लो। इस उपाय से बवासीर का दर्द, खुजली और सूजन नष्ट हो जाती है। परीक्षित है।

(7) भाँग और अफ़ीम मिला कर खाने से ज्वरातिसार नष्ट हो जाता है। कहा-

ज्वरस्यैवातिसारे च योगो भंगाहिफेनयोः।

(8) वात-व्याधि में बच और भाँग को एकत्र मिला कर सेवन करना हितकारी है। पर साथ ही तेल की मालिश और पसीने लेने की भी दरकार है।

(9) भांग के रस को कान में डालने से कान के कीड़े खत्म हो जाते हैं।

(10) भांग का एक पूरा पेड़ पीसकर नए घाव में लगाने से घाव ठीक होता है। चोट के दर्द को दूर करने के लिए इसका लेप बहुत ही लाभकारी होता है।

भाँग के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Bhang?)

इसे 1 ग्राम से 2 ग्राम तक सेवन करना चाहिए।

भाँग का नशा उतारने के उपाय : bhang ka nasha utarne ka tarika

 (1) भाँग का नशा बहुत ही तेज़ हो, रोगी सोना चाहे तो सो जाने दो। सोने से अक्सर नशा उतर जाता है। अगर भाँग खाने वाले के गले में खुश्की बहुत हो, गला सूखा जाता है, तो उसके गले पर घी चुपड़ो। अरहर की दाल पानी में धो कर वही धोवन या पानी पिला दो। परीक्षित है।

(2) पेड़ा पानी में घोल कर पिलाने से भाँग का नशा उतर जाता है।

(3) बिनौले की गिरी दूध के साथ पिलाने से भाँग का नशा उतर जाता है।

(4) अगर गाँजा पीने से बहुत नशा हो गया हो, तो दूध पिलाओ अथवा घी और मिश्री मिला कर चटाओ। खटाई खिलाने से भी भाँग और गाँजे का नशा उतर जाता

(5) इमली का सत्त खिलाने से भाँग का नशा उतर जाता है। कई बार परीक्षा की है।

(6) कहते हैं, बहुत-सा दही खा लेने से भाँग का नशा उतर जाता है। पुराने अचार के नीबू खाने से कई बार नशा उतरते देखा है।

(7) अगर भाँग की वजह से गला सूखा जाता हो, तो घी, दूध और मिश्री मिला कर निवाया-निवाया पिलाओ और गले में घी चुपड़ो। कई बार फायदा देखा है।

(8) भाँग के नशे की गफलत में एमोनिया हुँघाना भी लाभदायक है। अगर एमोनिया न हो, तो चूना और नौसादर ले कर, जरा-से जल के साथ हथेलियों में मल कर सुंघाओ। यह घरू (घर का ही यानी गृहस्थी-सम्बन्धी) एमोनिया है।

(9) सोंठ का चूर्ण गाय के दही के साथ खाने से भाँग का विष शान्त हो जाता है।

नोट :- ऊपर बताये गए उपाय और नुस्खे आपकी जानकारी के लिए है। कोई भी उपाय और दवा प्रयोग करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरुर ले और उपचार का तरीका विस्तार में जाने।

भाँग के नुकसान : Side Effects of Bhang

विधिपूर्वक और युक्ति के साथ, उचित मात्रा में खाया हुआ विष जिस तरह अमृत का काम करता है, भाँग को भी वैसे ही समझिये। जो लोग बेकायदे, गाय-भैंस की तरह इसे खाते हैं, वे निश्चय ही नाना प्रकार के रोगों के पंजों में फँसते और अनेक तरह के दिल-दिमाग सम्बन्धी उन्मादादि रोगों के शिकार हो कर बुरी मौत मरते हैं।

इसके बहुत ही ज्यादा खाने-पीने से सिर में चक्कर आते हैं, जी मिचलाता है, कलेजा धड़कता है, ज़मीन-आसमान चलते दीखते हैं, कंठ सूखता है, अति निद्रा आती, होश-हवास नहीं रहते, मनुष्य बेढंगी बकवाद करता और बेहोश हो जाता है। अगर जल्दी ही उचित चिकित्सा नहीं होती, तो उन्माद रोग हो जाता है। अतः समझदार इसे न खायँ और जो खायँ ही, तो अल्प मात्रा में सेवन करने वालों को घी, दूध, मलाई का हलवा, बादाम का हरीरा या शीतल शर्बत आदि ज़रूर इस्तेमाल करना चाहिए।

भाँग कहाँ पे पाया या उगाया जाता है (Where is Bhang Found or Grown?)

भारतवर्ष में भांग के अपने आप पैदा हुए पौधे सभी जगह पाये जाते हैं। भांग विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार एवं पश्चिम बंगाल में प्रचुरता से पाया जाता है।

Tags:

भांग का पौधा, भांग का नशा कैसा रहता है, भांग का नशा, भांग का नशा छुड़ाने की दवा, शिवप्रिया, Bhang, भाँग के फायदे, भाँग के नुकसान, health benefits of Bhang in hindi, Bhang ke fayde,भाँग क्या है, भाँग  के द्रव्यगुण,भाँग के गुण,भाँग के सेवन की मात्रा, भाँग का नशा उतारने के उपाय,Ayurveda,Ayurved,Health,Health Benefits,Natural Remedies,Home Remedies,Ayurvedic Treatment,Ayurvedic medicine,Maharishi Ayurveda,dcgyan,dcgyan.com
Share this:
0 0 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments