बिच्छू बूटी  के फायदे और नुकसान | Bichu Buti ke fayde | health benefits of Bichu Buti in hindi

बिच्छू बूटी  के फायदे और नुकसान | Bichu Buti ke fayde | health benefits of Bichu Buti in hindi

बिच्छू बूटी  परिचय :-

बिच्छू बूटी को लोग डंक मारने वाले पौधे के रूप में जानते हैं। इसलिए इसे बिच्छू बूटी कहा जाता है। इस जड़ी बूटी को कई लोग झुंझलाहट के रूप में जानते हैं। क्योंकि इसको छूने पर त्वचा में झनझनी (जलन) फैल जाती है। इसका वैज्ञानिक नाम अर्टिका डाइओका (Urtica dioica) है। इसकी सबसे अधिक खेती अफ्रीका, यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका में की जाती है।
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बिच्छू बूटी  क्या है (What is Bichu Buti?)

समस्त भारत में लगभग 1600 मी की ऊँचाई तक पाई जाती है। इसकी शाक पर तीक्ष्ण रोम होते हैं जिनके शरीर पर लग जाने से बिच्छू के डंक मारने जैसी तीव्र पीड़ा होती है। इसलिये इसको बिच्छू बूटी के नाम से जाना जाता है। पहाड़ी लोग इसके पत्रों का शाक बनाकर खाते हैं। यह बूटी छोटी व बड़ी दो प्रकार की होती है।

अनेक भाषाओं में बिच्छू बूटी  के नाम (Bichu Buti Called in Different Languages)

  • हिंदी :– बिच्छूबूटी, अल्ला, आवा, बिचुआ ;

  • संस्कृत नाम :– वृश्चिका (वृश्चियाक) , नखपर्णी;

  • English :– हिमालयन नेट्टल (Himalayan nettle), नीलगिरी नेट्टल (Nilgiri nettle), इचिंग प्लान्ट (Itching plant), नेपालीज नेट्टल (Nepalese nettle)

  • Scientific Names :– जिरार्डीनिया डाइवर्सीफोलिया ( Girardinia diversifolia )

  • उत्तराखण्ड- जुरकुनकुनदलु (Jurkunkundalu), काली (Kali), कफबरा (Kubra), कुन्डालु (Kundalu), अवबीचच्चु (Awabichchu), शिशुना (Shishuna);

  • असमिया-  होरुसुरत (Horusurat);

  • कन्नड़- तुरीके (Turike);

  • तेलुगु- गड्डनेल्ली (Gaddanelli);

  • नेपाली- उल्लो (Ullo);

  • पंजाबी- भाबर (Bhabar), ईन (Ein);

  • मराठी- मोतीखजती (Motikhajati);

  • मलयालम- अनाचचोरयानम (Anachchoriyanam);

  • मणिपुरी- सन्थक (Santhak);

  • राजस्थानी- घोराकीमेश (Ghora-keemesh)

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बिच्छू बूटी का पौधा कैसा होता है ?

इस बूटी के पौधे 4-6 फुट ऊंचे होते हैं। इसके सर्वाग पर तीक्ष्ण कठोर रोम होते हैं। यह 1.2-2.0 मी तक ऊँचा, एकलिंगाश्रयी, बहुवर्षायु, शाकीय क्षुप है। इसकी शाखाएं विसरित एवं फैली हुई होती हैं। सम्पूर्ण पौधे पर पाए जाने वाले रोमों में formic acid पाया जाता है;

जिसकी वजह से यह तीव्र क्षोभक होते हैं। शरीर के किसी भाग पर इन रोमों का स्पर्श होने से वेदना, शोथ, क्षोभ, दाह, कण्डू तथा लालिमा उत्पन्न होती है।

बिच्छू बूटी के पत्ते पत्र 4-5 इंच चौड़े एवं 4-12 इंच लम्बे होते हैं। इनके अधः पृष्ठ चिकने होते हैं।

(नेट्टल) बिच्छू बूटी के फूल पुष्प- छोटे, वृन्तरहित, पुष्प- मंजरी शहतूत जैसी 6 इंच लम्बी और सघन रोमों से आवृत होती है।

बिच्छू बूटी के प्रकार :

कविराज श्री योगेश्वर प्रसाद वैद्य वाचस्पति ने इस बूटी के बारे में लिखा है कि – यह बूटी छोटी और बड़ी भेद से दो प्रकार की होती है। दोनों प्रकार की बूटियां प्राय: वर्षा काल के पहले पैदा होती हैं।

छोटी बूटी के पौधे 2-6 फुट ऊंचे होते हैं। इसके पत्र 8 इंच लम्बे और 4-5 इंच चौड़े होते हैं। पत्तों तथा शाखाओं पर सफेद रोम सदृश बारीक कांटे से होते हैं। सावन-भादवे में इस पर बीच-बीच की ग्रन्थि स्थानों पर शहतूत के समान पुष्पमंजरी निकलती है।

बड़ी बूटी का पौधा दस फुट से भी कहीं-कहीं अधिक ऊंचा पाया जाता है। पत्र 5-10 इंच लम्बे और 3-5 इंच चौड़े होते हैं। इन रोमों के स्पर्श से बिच्छू के डंक मारने जैसी वेदना होती है।

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बिच्छू बूटी   के द्रव्यगुण

  • रस (taste on tongue):- मधुर

  • गुण (Pharmacological Action): स्निग्ध

  • वीर्य (Potency): उष्ण वीर्य

  • विपाक (transformed state after digestion):- मधुर 

बिच्छू बूटी  के गुण : Properties of Bichu Buti

  • बिच्छूबूटी अम्ल, पिच्छिल, शोथरोधी, ज्वरघ्न तथा आंत्रवृद्धि शामक होती है।

  • इसका ऐथेनॉल सार शोथहर एवं वेदनाशामक प्रभाव प्रदर्शित करता है।

  • बड़ी बिच्छूबूटी शोथहर, वेदनाशामक, क्षोभक, आमवातरोधी, स्तम्भक, मूत्रल, स्तन्यवर्धक, रक्तस्तम्भक, बलकारक, अरूंषिकारोधी तथा अल्परक्तचापकारक होती है।

  • इसका पञ्चाङ्ग रक्ताल्पता, मासिक-विकार, आमवात, संधिवात, अर्श, त्वचा-विकार तथा पामा की चिकित्सा में उपयोगी है।

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बिच्छू बूटी  से विभिन्न रोगों का सफल उपचार : Bichu Buti benefits and Uses (labh) in Hindi

1-प्रमेह रोग ठीक करे बिच्छू बूटी का प्रयोग :- लगभग आधा ग्राम बिच्छू बूटी के बीज को 6 ग्राम मिश्री के साथ पीसकर ताजे गाय के दूध के साथ प्रात: – साय सेवन करने से लाभ मिलता है। विशेष रूप से यह कफ से उत्पन्न प्रमेह में अधिक लाभदायक होता है। इससे शारीरिक शक्ति भी बढ़ती है।

2-दाद मिटाए बिच्छू बूटी का उपयोग  :-   बिच्छू बूटी के पौधे को जलाकर प्राप्त राख को दाद(ringworm) पर लगाने से रोग में लाभ होता है।

3-सरदर्द में बिच्छू बूटी का उपयोग फायदेमंद  :-   बिच्छू बूटी के पत्तों के रस को सिर में लगाने से सरदर्द में लाभ होता है।

4-आमाशय के रोग में बिच्छू बूटी के इस्तेमाल से फायदा  :-   बिच्छू बूटी की जड़ और मण्डूकपर्णी को उबालकर काढा बनाकर सेवन कराने से आमाशय के रोग में लाभ होता है।

5-पथरी में बिच्छू बूटी के इस्तेमाल से लाभ  :-   बिच्छू बूटी के पत्तों का क्वाथ बनाकर पीने से पथरी टूट-टूट का निकल जाती है तथा सुजाक रोग का शमन होता है।

6-मूत्र संबंधित रोग में बिच्छू बूटी का उपयोग लाभदायक :-    बिच्छू बूटी के पञ्चाङ्ग का काढा बनाकर पीने से वृक्क-संक्रमण, वृक्कशूल तथा पेशाब मे जलन आदि मूत्र-विकारों में तथा विषम ज्वर में लाभ होता है।

7-पौरुषग्रन्थि वृद्धि में लाभकारी है बिच्छू बूटी का प्रयोग  :-   बिच्छू बूटी की जड़ का काढा बनाकर पिलाने से पौरुष-ग्रन्थि की वृद्धि का शमन होता है।dcgyan

8-जोड़ों का दर्द दूर करे बिच्छू बूटी का प्रयोग  :-   बिच्छू बूटी के पत्तों का काढा बनाकर पीने से जोड़ों का दर्द तथा सूजन का शमन होता है।

9-बिछुआ पत्ती है हृदय के लिए लाभकारी ( Nettle Leaf for Heart in Hindi) :-   यह जड़ी बूटी भी हृदय को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने में सक्षम होती है। बिच्छू बूटी का ह्रदय स्वास्थ्य पर बहुत ही अच्छा प्रभाव पड़ता है। बिच्छू बूटी से बनी चाय का नियमित रूप से सेवन लोअर सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद कर सकता है और कार्डियोवास्कुलर सिस्टम पर तनाव को दूर कर सकता है।

10-बिच्छू बूटी के फायदे डिटॉक्सिफिकेशन के लिए ( Nettle Leaf for Detoxification in Hindi) :-   बिच्छू बूटी में पाए जाने वाले फायदेमंद पोषक तत्वों की वजह से यह शरीर के लिए एक बहुत ही अच्छा डेटोक्सिफायर है और इसे विषाक्त पदार्थों को शरीर से साफ करने के लिए भी जाना जाता है। एक मूत्रवर्धक पदार्थ के रूप में जाना जाता है।

बिच्छू बूटी से पाचन प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती है जिससे शरीर में खतरनाक विषाक्त पदार्थों के संचय को रोकने से बचाया जा सकता है। यह लसीका प्रणाली को भी उत्तेजित करता है, जो कि गुर्दे में अतिरिक्त विषाक्त पदार्थों से छुटकारा दिलाने में मदद करता है।dcgyan

11प्रेगनेंसी में सहायक  ( Nettle Leaf for Pregnancy in Hindi) :-   बिच्छू बूटी से बनी चाय को अक्सर उन गर्भवती महिलाओं को पीने का सुझाव दिया जाता है जो अत्यधिक लेबर पेन से गुजर रही होती हैं और यह बहुत अधिक ब्लीडिंग से भी रक्षा में मदद कर सकता है, क्योंकि यह एक कोऐग्यलन्ट (coagulant; पदार्थ जिसके कारण रक्त जम जाता है) के रूप में कार्य कर सकता है। इसके अलावा, स्तनपान कर रही महलाओं में बिच्छू बूटी मान के दूध के बनाने में मदद करती है।dcgyan

12-मासिक धर्म के दौरान करे बिच्छू बूटी का उपयोग ( Nettle Leaf for Menstruation in Hindi ) :-  बिच्छू बूटी में कई सक्रिय घटक होते हैं जो स्त्री स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। यह दर्दनाक प्रीमेंस्ट्रुअल के लक्षणों, ऐंठन और सूजन को कम करने में मदद कर सकती है। इसके एस्ट्रिंजेंट गुणों के कारण मासिक धर्म के दौरान रक्त के प्रवाह को कम किया जा सकता है।

जो महिलाएं रजोनिवृत्ति से गुजर रही है, यह उनके लिए भी उपयोगी होती हैं क्योंकि यह रजोनिवृत्ति के बाद होने वाले बदलाव को सामान्य रखने में मदद करता है।

13-ब्लड सर्कुलेशन में मदद (Nettle Leaf Benefits for Blood Circulation in Hindi) :-  

बिच्छू बूटी में मौजूद विटामिन सी और लौह की उच्च मात्रा का संयोजन लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को उत्तेजित करने के लिए बहुत ही अच्छा होता है। यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या को बढ़ाने, रक्त परिसंचरण को बढ़ाने, घावों को ठीक करना और शरीर के ऊपरी हिस्से में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन प्रदान करने में मदद करता है।

इसी कारण से, बिच्छू बूटी अक्सर थकान या एनीमिया से राहत दिलाने के लिए उपयोग करने की सलाह दी जाती है, जिसे सामान्य मांसपेशियों की कमजोरी, थकावट, संज्ञानात्मक कठिनाइयों और सिरदर्द से जोड़ा जाता है।dcgyan

14-ऑस्टियोपोरोसिस के लिए ( Nettle Leaf for Osteoporosis in Hindi) :-   शायद आपने बोरान के बारे में ज्यादा नहीं सुना होगा लेकिन यह हमारे शरीर में एक महत्वपूर्ण खनिज तत्व होता है जो बिच्छू बूटी में पाया जा सकता है। बोरान को हमारी हड्डियों को ठीक रखने वाले कैल्शियम सामग्री से वैज्ञानिक रूप से लिंक किया गया है, जिसका अर्थ है कि बिच्छू बूटी ऑस्टियोपोरोसिस की शुरुआत धीमी कर सकती है। बिच्छू बूटी हड्डियों के स्वास्थ्य को नियमित और मॉनिटर करने में मदद करती है।

15-अस्थमा ( Nettle Leaf for Asthma in Hindi) :-   बिच्छू बूटी विभिन्न प्रकार की श्वसन समस्याओं के उपचार में मदद कर सकता है, जिनमें अस्थमा और अन्य मौसमी एलर्जी शामिल होती हैं। अध्ययनों से पता चला है कि बिच्छू बूटी से प्राप्त अरक को अन्य जड़ी बूटियों के संयोजन में मिलाकर देने से एलर्जी की प्रतिक्रियाओं को कम कर सकते हैं।

बिच्छू बूटी से बनी चाय का नियमित उपयोग ऑस्ट्रेलिया में, पीढ़ियों से अस्थमा के इलाज के लिए किया जाता है।

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16-प्रोस्टेट स्वास्थ्य के लिए बिच्छू बूटी का इस्तेमाल ( Bichu Buti for Prostate Health in Hindi) :-   बढे हुए प्रोस्टेट और प्रोस्टेट कैंसर दोनों गंभीर बीमारियां होती हैं लेकिन बिच्छू बूटी प्रोस्टेट के विकास को रोकने के एक प्रभावी इलाज साबित हुई हैं। हालांकि बिच्छू बूटी केवल इनके विकास को रोक सकती है।

बिच्छू बूटी की खुराक को मितली और दस्त को कम करने के लिए उपयोग करने की सलाह दी जाती है और यह अल्सर और बवासीर को भी ठीक करने में मदद कर सकती है।dcgyan

17-बिछुआ पत्ती है बालों के लिए लाभकारी ( Nettle Leaf for Hair in Hindi) :-   बिच्छू बूटी का उपयोग बाल झड़ने का मुकाबला करने के लिए सबसे पुराना उपचार है। बिच्छू बूटी कैप्सूल और चाय को आंतरिक रूप से बालों के झड़ने का इलाज करने के लिए उपयोग किया जा सकता है जबकि बिछुआ तेल का उपयोग करके बालों के झड़ने को रोका जा सकता है।

नारियल या सरसों के तेल के साथ बिच्छू बूटी के पत्तों का रस निकालकर अपने बालो पर लगाएं। यह रूसी के लिए एक बहुत प्रभावी उपचार है।

18- नेटल लीफ फॉर लिबिडो (Nettle Leaf for Libido in Hindi) :-   बिच्छू बूटी एक लिबिडो उत्तेजक के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाता है और शरीर को लंबे समय तक बनाए रखने में भी मदद करता है। यह सेक्स ड्राइव में सुधार के लिए एक प्रभावी उपाय है।

19-एंटी-अल्सर गुण के साथ बिच्छू बूटी  :-   पेट की समस्या जैसे – एसिडिटी, पेट दर्द और ऐसी अन्य कई परेशानियां आम हैं और उन्हीं में से एक है अल्सर की समस्या। यह समस्या गलत खान-पान के कारण होती है, जो कई बार गंभीर रूप ले लेती है। इस स्थिति में नेटल लीफ के सेवन से कुछ हद तक आराम मिल सकता है।

बिच्छू बूटी में एंटी-अल्सर गुण मौजूद होते हैं, इसके अलावा यह एसिडिटी से भी राहत दिला सकता है। इतना ही नहीं इसमें दर्दनाशक गुण (analgesic) भी है, जिससे दर्द संबंधी समस्या से राहत मिल सकती हैdcgyan

20- त्वचा के लिए बिच्छू बूटी  :-   जब बिच्छू बूटी के पत्ते त्वचा के संपर्क में आते हैं, तो इससे त्वचा पर जलन, रैशेज, चुभन या खुजली की समस्या हो सकती है। आपको सुनकर आश्चर्य हो सकता है कि इसके बावजूद नेटल लीफ को त्वचा संबंधी परेशानियां जैसे – एक्जिमा व दाद में भी उपयोग किया जा सकता है। फिर इसे उपयोग करने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें, क्योंकि हर किसी की त्वचा एक जैसी नहीं होती है। जरूर नहीं कि यह किसी को त्वचा को सूट करे।

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बिच्छू बूटी  के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Bichu Buti?)

चिकित्सक के परामर्शानुसार।

प्रयोज्याङ्ग  :  मूल एवं पत्र।

बिच्छू बूटी  के नुकसान :Side Effects of Bichu Buti

  1. बिच्छू बूटी में रक्त को पतले करने वाले गुण होते हैं, जो शरीर के रक्त के थक्के (blood clotting) की क्षमता को प्रभावित करती है।

  2. यह रक्त शर्करा के स्तर को कम कर सकती है। इसलिए यदि आप मधुमेह को कम करने के लिए दवाएं ले रहे हैं तो इसका उपयोग आपके रक्त स्तर को कम करने के जोखिम को बढ़ा सकता है। इसलिए इसके उपयोग से पहले अपने रक्त शर्करा के स्तर की जांच करवाएं।

  3. बिछुआ का उपयोग रक्तचाप के स्तर को कम करता है। इसलिए यदि आप उच्च रक्तचाप को कम करने वाली दवाओं का सेवन कर रहे हैं तो इस जड़ी बूटी का सेवन न करें। क्योंकि इससे रक्तचाप का स्तर और भी कम हो सकता है।

  4. यह बहुत अधिक नींद आने का कारण हो सकता है। बिछुआ सहित किसी भी प्रकार की शामक दवा खाने के बाद ड्राइव न करें।

  5. यह एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक है और यह मूत्र उत्पादन को बढ़ाता है। यदि आप किसी भी प्रकार की किडनी समस्या से पीड़ित हैं, तो इस दवा का उपयोग न करें।

  6. बिच्छू बूटी में कई प्रकार के रसायन होते हैं इसलिए इसका अधिक उपयोग पुरुषों में वीर्यस्खलन को कम कर देता है। अरोमातासेस (aromatases) नामक एंजाइम के उत्पादन को रोकता है जो शुक्राणु उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण होता है।

बिच्छू बूटी  कहाँ पे पाया या उगाया जाता है (Where is Bichu Buti Found or Grown?)

ये पौधे मुख्य रूप से मैक्सिको, इटली, नेपाल, भारत, चीन, रूस, नीदरलैंड, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में पाए जाते हैं। बिछुआ की कुछ प्रजातियां, विशेष रूप से चुभने वाली बिछुआ (उर्टिका डियोका) के पत्तों और एरियल भाग पर नुकीले बाल होते हैं। इनमें से कुछ डंक भी होते हैं, जिस कारण इसका नाम बिच्छू बूटी रखा गया है

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