चंदन के फायदे और नुकसान  | Chandan ke fayde | health benefits of Sandalwood in hindi

चंदन के फायदे और नुकसान  | Chandan ke fayde | health benefits of Sandalwood in hindi

चंदन परिचय :-

भारतीय समाज में चंदन का विशिष्ट स्थान है। इसकी महत्ता का पता इसी बात से चल जाता है कि टीपू सुल्तान ने इसे राज वृक्षघोषित किया था। आज भी कर्नाटक में जहाँ भी यह वृक्ष पाया जाता है, सरकारी संपत्ति होता है। वैसे तो चंदन सारे भारत में पाया जाता है, लेकिन इसके वृक्षों की सबसे अधिक संख्या कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में है। नीलगिरि पर्वतमाला से लेकर उ.प्र. कर्नाटक तक इस लंबे चौड़े क्षेत्र में लाखों की संख्या में चंदन वृक्ष पाए जाते हैं। केरल, महाराष्ट्र और उड़ीसा में भी इसके वृक्ष जंगली अवस्था में उगे हुए मिलते हैं। अन्य राज्यों में भी इसे लगाया जा रहा है। भारत के अलावा इंडोनेशिया, मलाया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मलेशिया, चीन आदि में भी चंदन वृक्ष पाए जाते हैं। चंदन के वृक्ष सामान्य वृक्षों की तरह ही होते हैं, लेकिन चंदन के सदाबहार वृक्ष अपने अनूठे गुणों एवं उपयोग के कारण सदा आकर्षण का केंद्र रहे हैं।

चंदन क्या है (What is Sandalwood?)

सैन्डल वुड (चंदन )एक जड़ी-बूटी है। सुगन्धित, तथा शीतल होने से यह लोगों को आनन्द प्रदान करता है, इसलिए इसे चन्दन कहते हैं। चंदन के वृक्ष हरे रंग के और 6 से 9 मीटर ऊंचे होते हैं। इसकी शाखाएं झुकी होती हैं। चंदन के पेड़ की छाल लाल (rakta chandan), या भूरे, या फिर भूरे-काले रंग की होती है। चंदन के पत्ते अण्डाकार, मुलायम होते हैं, और पत्ते के आगे वाला भाग नुकीला होता है। चंदन के फूल भूरे-बैंगनी, या जामुनी रंग होते हैं, जो गंधहीन होते हैं। इसके फल गोलाकार, मांसल होते हैं, जो पकने पर शयामले, या बैंगनी रंग के हो जाते हैं। इसके बीज कठोर, अण्डाकार अथवा गोलाकार होते हैं।

चंदन के वृक्ष प्रायः 20 वर्ष के बाद ही बड़े होते हैं। पेड़ के भीतर का हिस्सा हल्का पीला रंग का, और सुगंधित होता है।  पुराने वृक्षों (chandan tree) की छाल दरार युक्त होती है। चंदन का वृक्ष 40-60 वर्ष की आयु के बाद उत्तम सुगन्ध वाला हो जाता है। चंदन के वृक्ष में फूल जून से सितम्बर के बीच होते हैं, और फल नवम्बर से फरवरी तक होते हैं। ऐसी अवस्था में चंदन पूरी तरह से उपयोग करने लायक हो जाता है।

अनेक भाषाओं में चंदन के नाम (Sandalwood Called in Different Languages)

  • हिंदी :– चंदन, श्वेत चंदन, सफेद चंदन ;

  • संस्कृत नाम :– श्रीखण्ड, चन्दन, भद्रश्री, तेलपर्णिक, गन्धसार, मलयज, चन्द्रद्युति ;

  • English :– सैंनडल ट्री (Sandal tree), व्हाइट सैन्डल ट्री (White sandal tree), ट्रयू सेन्डल वुड (True sandal wood), सैन्डल वुड (Sandal wood) ;

  • Scientific Names :– सैन्टेलम ऐल्बम (Santalum album )

  • Urdu- सन्दल सफेद (Sandal safed)

  • Oriya- चन्दोनो (Chandono)

  • Kannada- श्रीगन्ध (Shrigandha)

  • Gujarati- सुखड़ (Sukhud)

  • Telugu- गंधपु चेकका (Gandhapu chekka), चन्दनामु (Chandnamu)

  • Tamil- चंदनं मरम (Chandanam maram), सन्दनम् (Sandanam), उलोसिडम (Ulosidam)

  • Bengali- चन्दन (Chandan)

  • Punjabi- चन्दन (Chandan)

  • Marathi- चन्दन (Chandan), गंधचकोडा (Gandhchakoda)

  • Malayalam- चन्दनम (Chandanam)

  • Nepali- चंदन (Chandan)

  • Arabic- संदले सफेद (Sandle safed), संदलेबियाज (Sandalabiyaz)

  • Persian- संदल सुफैद (Sandal suphed)

चंदन  के द्रव्यगुण

  • रस (taste on tongue):- तिक्त

  • गुण (Pharmacological Action): गुरु

  • वीर्य (Potency): शीत

  • विपाक (transformed state after digestion):- कटु

चंदन के गुण : Properties of Sandalwood

आयुर्वेद चिकित्सा ग्रंथों में इसे लघु, रूक्ष, तिक्त, विपाक, कटु, मधुर, शीतवीर्य, कफ-पित्तशामक, ग्राही, सौमनस्यजनक, मेध्य, रक्तशोधक, हृद्य, कफनिस्सारक, श्लेष्म-पूतिहर, मूत्रल, स्वेदल, अंगमर्द-प्रशमन, मूत्र मार्ग के लिए शोथ प्रशमन, विषघ्न तथा आमाशय, आँत एवं यकृत के लिए वल्य बताया गया है। यूनानी चिकित्सा में चंदन दस्त-अतिसार शामक, चिड़चिड़ापन एवं मानसिक रोगों में अत्यंत प्रभावकारी ओषधि है।

चंदन से विभिन्न रोगों का सफल उपचार : Sandalwood benefits and Uses (labh) in Hindi

1–मुहाँसे :- चन्दन की सहायता से मुहाँसों की बड़ी कारगर औषधि तैयार की जाती है। इसके लिए चन्दन की लकड़ी का बुरादा, नीम की छाल का बुरादा, बकाइन की छाल का बुरादा, सूखा धनिया, चना मुरदार संग, सफेद काशगिरी सभी बराबर-बराबर लेकर, कूट-पीसकर कपड़छन करके महीन चूर्ण तैयार कर लेते हैं। इस चूर्ण को गाय के दूध में मिलाकर आग पर चढ़ा देते हैं और निरन्तर चलाते रहते हैं। गाढ़ा हो जाने पर इसे ठंडा करके चौड़े मुँह की बोतलों में भरकर सीलबन्द कर देते हैं। इस औषधि को रात में सोते समय मुँह धोकर पूरे चेहरे पर मलें और प्रातःकाल गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। एक माह तक ऐसा करने से मुहाँसे समाप्त हो जाते हैं और चेहरे पर दाग भी नहीं पड़ते।

2-एक्जिमा :-  ( chandan ke fayde eczema me) चन्दन एक्जिमा जैसे गम्भीर रोग में भी उपयोगी है। इसके लिए चन्दन के तेल में नीबू का रस मिलाकर प्रभावित भाग पर लगाते हैं। इससे एक्जिमा ठीक हो जाता है। चन्दन के तेल में चाल मोगरा का तेल मिलाकर लगाने से भी लाभ होता है।dcgyan

3-त्वचा का रूखापन :-  ( twacha ka rukhapan dur karne me chandan ke fayde) चंदन को घिसकर उसमें गुलाब जल मिलाकर त्वचा पर लेप करें। नित्य प्रयोग से त्वचा सुकोमल और चमकदार बन जाएगी।

4-दाग-धब्बे-झाँइयाँ :- (chehre ke daag dhabbe hatane me chandan ke fayde) उबटन में चंदन का बुरादा, हल्दी मिला लें। इसे नित्य चेहरे पर लगाया करें। इसके कुछ दिनों के प्रयोग से दाग-धब्बे मिट जाते हैं और चेहरा खिला-खिला नजर आता

5-होंठों की कमनीयता:- (hotho ko gulabi bnane me chandan ke fayde) चंदन घिसकर उसमें मक्खन या मलाई मिलाकर रात को सोने से पूर्व होंठों पर लगा लिया करें। कोमलता के साथ होंठ चमकीले गुलाबी और मुलायम बन जाएँगे।

6-झुर्रियाँ व कालापन :-  ( chandan ke fayde for skin)चंदन के पाउडर में गुलाब जल मिलाकर चेहरे तथा गरदन पर हलकी मालिश करें। सूखने के आधा घंटे बाद ताजा पानी से धो लें। इसके नित्य प्रयोग से त्वचा में कसावट आएगी, झुर्रियाँ दूर होंगी तथा गरदन पर की काली लकीरें मिट जाएँगी। इससे त्वचा भी कमनीय हो जाएगी।

7-घमोरियाँ :- (chandan ke fayde ghamoriya me) घमोरियों से राहत पाने के लिए चंदन को जल में घिसकर घमोरियों पर लगाएँ अथवा चंदन का पाउडर छिड़क दें। घमोरियाँ शांत होकर गरमी से भी काफी राहत मिलती है।

8-कील-मुंहासे :-( chandan ke fayde kil muhase me )चंदन को घिसकर उसमें भुनी फिटकरी, कालीमिर्च बराबर मात्रा में लेकर लेप बना लें। रात को सोने से पूर्व इसका चेहरे पर लेप करें। प्रातः गुनगुने पानी से धो लें। यह क्रिया एक-दो सप्ताह तक प्रयोग में लाएँ। इसके अलावा चंदन, हल्दी और बेसन अथवा जौ का आटा मिलाकर उसी प्रकार लेप करें और प्रात: धो लें।

  • सैन्डल वुड (चंदन), रसौंत तथा कपूर को घिसकर मुँहासों पर लगाने से ये मिट जाते हैं।

  • चंदन का तेल रात को मुँहासों पर लगा लिया करें, तो वे ठीक हो सकते हैं।

  • लगभग चौथाई चम्मच चंदन का बुरादा तथा इतनी ही पिसी हल्दी और थोड़ा सा पिसा जायफल–तीनों को मिलाकर मुँहासों पर लगाएँ, फिर घंटः भर बाद धो लें।

9-खाज-खुजली :- (chandan ke fayde khaj khujli me)खुजाते-खुजाते त्वचा लाल पड़ जाती है या दाने से उठ आते हैं और खुजली शांत नहीं होती, तब उस स्थान पर चंदन का तेल, यह उपलब्ध न हो तो चंदन का लेप लगाना चाहिए। इससे इन विकारों में बड़ा आराम मिलता है।

रक्त संबंधी विकारों में चंदन को घिसकर शहद और अदरक के रस के साथ प्रातः-सायं नित्य सेवन करना चाहिए। इससे रक्त शुद्ध होता है।

10-सूजाक रोग :- सूजाक से पीड़ित रोगी को चंदन के तेल 10-12 बूंदें दिन में तीन बार दूध या किसी भी तरह सेवन करनी चाहिए। यदि दर्द और जलन ज्यादा हो तो यह मात्रा तीन-तीन घंटे बाद भी ले सकते हैं।

11-घाव भरने-सुखाने :- (chandan ke fayde ghav bharne me)जलने या किसी भी कारण से घाव बन गए हैं और बार-बार भर जाते हैं। तो चंदन की लकड़ी के टुकड़े बारीक पीसकर पाउडर बना लें। पहले घाव पर नारियल या सरसों का तेल लगाकर चंदन-पाउडर बुरक दें। इससे घाव जल्दी भर जाते हैं।dcgyan

12-स्मरणशक्ति मजबूत :- (chandan ke fayde smaran shakti badhane me) नित्य प्रातः स्नान कर ललाट पर चंदन का लेप किया करें, साथ ही दो छोटी इलायची और एक लौंग चबा लिया करें। इसके नित्य प्रयोग से दिमागी की गरमी दूर होगी और स्मरणशक्ति बढ़ेगी।

13-तृषा तथा पाचन :- ( chandan ke fayde pachan me)

गरमी की ऋतु में जब प्यास बार-बार लगती हो, शरीर में दाह तथा गरमी से बेचैनी हो तो चंदन को घिसकर नारियल के पानी में मिलाकर पिलाना चाहिए। इसके नियमित सेवन से पाचन-संबंधी गड़बड़ी भी दूर हो जाती हैं।

14- त्वचा की दुर्गंध :- त्वचा की दुर्गंध मिटाने तथा त्वचा को सुकोमल बनाने के लिए चंदन का उबटन या चंदन-तेल की मालिश करनी चाहिए। स्नान करते समय पानी में चार-छह बूंद नीबू रस की मिला लें। इससे दिन भर ताजगी महसूस होगी।

15- फोड़ा-घाव :-  (chandan ke fayde fode funsi me) चंदन के पत्तों को पीसकर लुगदी जैसी बना लें। अब इसे गाँठ-फोड़ा पर अच्छी तरह बाँध दें। इसके लगातार उपयोग से फोड़ा पककर पीप निकल जाती है। पुराने घावों पर भी बाँधे तो घाव जल्दी भर जाते हैं।

16-लू और दाह :-  (chandan ke fayde lu me ) प्रचंड गरमी के मौसम में झुलसा देनेवाली गरम लू से बचने के लिए हाथपैरों एवं मस्तक पर चंदन का लेप करना चाहिए। इसके अलावा चंदन, पुदीना तथा नीबू का शरबत खाँड़ या शहद मिलाकर पिएँ। इससे शरीर की गरमी, दाह तथा बेचैनी दूर होती है।

17- प्रमेह व रक्तपित्त :-  (chandan ke fayde prameha me) सफेद चंदन को घिसकर शहद और खाँड़ मिला लें। अब इसे चावल के पतले माँड़ के साथ प्रातः-शाम सेवन करें। तेज मसालों एवं गरिष्ठ भोजन से बचें। इससे रक्तातिसार में भी बड़ा आराम मिलता है।

18-दस्त-अतिसार :-  (chandan ke fayde dast me) ज्यादा पतले दस्त हों, चाहे बच्चे हों या बूढ़े, तो चंदन को घिसकर शहद, खाँड़ या मिश्री के साथ घोल बनाकर दिन में तीन बार पिलाएँ। फायदा अवश्य होगा।

19-अत्यधिक छींक की समस्या में चंदन का प्रयोग (Benefit of Chandan in Sneezing Problem in Hindi) महिलाओं या पुरुषों को कभी-कभी छींक की समस्या हो जाती है। ऐसे में चंदन, तथा धनिया की पत्ती को पीस लें। इसे सूंघने से छींक आनी बन्द हो जाती हैं।

20-हिचकी में चंदन के उपयोग से फायदा (Chandan Benefits for Hiccup in Hindi)

हिचकी से परेशान रहते हैं, तो मसूर, पलाण्डु, अथवा गृंजनक, और श्वेत चंदन लें। इसे गाय के दूध के साथ घिस लें। इसे1-2 बूंद नाक में डालें। हिचकी बंद हो जाती है।

21-चंदन के प्रयोग से होती है सूजन कम (Uses of Chandan in Reducing Inflammation in Hindi)

सैन्डल वुड (चंदन की लकड़ी) को जल में घिसकर, तथा तने की छाल को पीसकर शरीर पर लगाएं। इससे सूजन ठीक होती है।

22-आंखों की बीमारी में चंदन का उपयोग (Chandan Benefits in Eye Disease Treatment in Hindi)

आंखों की बीमारी में भी चंदन का इस्तेमाल कर सकते हैं। आंखों के रोग में 10 ग्राम सफेद चंदन के पेस्ट को, 100 मिली दूध में पका लें। इसे ठंडा कर लें। इसे आंखों पर लगाने से आंखों की बीमारी में लाभ होता है।

23-यौन रोग में चंदन का उपयोग लाभदायक (Benefits of Chandan to Treat Sexual Diseases in Hindi)

यौन रोग में भी चंदन का प्रयोग करना फायदेमंद होता है। मंजिष्ठा, और चन्दन के चूर्ण (chandan powder) को बराबर मात्रा में मिला लें। 2-4 ग्राम चूर्ण का लगातार सेवन करने से यौन रोगों में लाभ होता है।

24-चंदन के इस्तेमाल से शुक्राणु रोग में फायदा (Benefits of Chandan for Sperm Disorder in Hindi)

शुक्राणु विकार को ठीक करने के लिए अर्जुन की छाल, और चन्दन को समान मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। इसे 20-40 मिली की मात्रा में सेवन करने से शुक्राणु संबंधी रोगों में लाभ होता है।

25-ल्यूकोरिया को ठीक करने के लिए चंदन का इस्तेमाल (Uses of Chandan to Treat Leukorrhea in Hindi)

  • ल्यूकोरिया महिलाओं को होने वाली बीमारी है। इस बीमारी में महिलाओं के शरीर में इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में सफेद, या लाल चंदन का काढ़ा बना लें। इसे 20-30 मिली मात्रा में पीने से ल्यूकोरिया में लाभ होता है।

  • 2-4 ग्राम चंदन के चूर्ण (chandan powder) को दूध, तथा घी में पका लें। इसे ठंडा करके मधु, और चीनी मिला लें। इसे पीने से ल्यूकोरिया में तुरंत फायदा होता है।

26-मूत्र रोग में चंदन से फायदा (Benefits of Chandan to Treat Urinary Disease in Hindi)

  • 10-20 मिली चावल के धुले हुए पानी में, 2-4 ग्राम बारीक चंदन के चूर्ण, और चीनी को मिला लें। इसे पिएं। इसके साथ ही उबालकर दूध को ठंडा कर लें, और इसके साथ, अन्न का सेवन करें। इससे मूत्र रोग, जैसे- पेशाब का रुक-रुक आने आदि परेशानी में लाभ होता है।

  • पेशाब में जलन की बीमारी से परेशान हैं, तो 50-100 मिली गाय के दूध में 2-4 ग्राम चंदन के चूर्ण को मिला लें। इसे पिने से आराम मिलता है।

27-गुदा विकार में चंदन से लाभ (Chandan Benefits for Anal Disease in Hindi)

गुदा विकार में भी चंदन का लाभ ले सकते हैं। मल त्याग करते समय जलन होती हो, या मल से बहुत अधिक दुर्गंध आता हो, तो 2-4 ग्राम चंदन के चूर्ण (sandal powder) में मधु, तथा मिश्री मिला लें। इसे चावल के धुले हुए पानी के साथ पिएं। इससे गुदा की बीमारी में फायदा होता है।

28-रक्तपित्त (नाक-कान आदि अंगों खून बहने की परेशानी) चंदन से फायदा (Chandan Uses to Stop Bleeding in Hindi)

  • शरीर के भिन्न-भिन्न अंग, जैसे- नाक, गुदा, या योनि से अगर खून आता हो तो बराबर-बराबर भाग में चन्दन, मुलेठी, तथा लोध्र के चूर्ण (2-4 ग्राम) में मधु मिला लें। इसे चावल के धुले हुए पानी के साथ तीन दिनों तक पिएं। इससे रक्तपित्त में लाभ होता है।

  • चंदन के बारीक चूर्ण (sandal powder) को नाक के रास्ते लेने से नाक से खून आना बंद हो जाता है।

29-एसिडिटी में फायदेमंद चंदन का सेवन (Uses of Chandan for Acidity Problem in Hindi)

  • कुछ भी उल्टा-सीधा खाने, या बाहर का भोजन करने पर एसिडिटी की परेशानी आम हो गई है। एसिडिटी से परेशान लोगों को, यदि खाने के बाद सिर, एवं हृदय में दर्द होता है, या आंखों की परेशानी रहती है, तो शिरीष, हल्दी, तथा चंदन के लेप को हृदय में लगाएं। इससे लाभ (chandan benefits) होता है।

30-उल्टी रोकने के लिए चंदन का इस्तेमाल (Chandan Benefits to Stop Vomiting in Hindi)

  • आप उल्टी को रोकने के लिए भी चंदन का इस्तेमाल कर सकते हैं। 500 मिग्रा सफेद चंदन को घिस लें। इसे 10 मिली आंवला के रस में घोल लें। इसमें मधु मिलाकर पीने से उल्टी में लाभ होता है।aalubukhara

  • इसी तरह चंदन के 5-10 ग्राम बारीक चूर्ण (chandan powder) को, चार गुना आंवला के रस में घोल लें। इसमें मधु मिलाकर पीने से उल्टी रुक जाती है।

  • इसके अलावा 10-30 मिली आंवले के रस में, 1-2 ग्राम चन्दन के पेस्ट को मिला लें। इसका सेवन करने से उल्टी पर रोक लगती है।

31-गठिया में फायदा पहुंचाता है चंदन का इस्तेमाल (Chandan Uses for Arthritis in Hindi)

गठिया की परेशानी में चंदन के उपयोग से फायदा हो सकता है। गठिया की बीमारी वाले लोग 20-40 मिली चन्दनादि कषाय में, चीनी, तथा मधु मिलाकर सेवन करें। इससे गठिया में आराम होता है।

32-चंदन का प्रयोग कर कुष्ठ रोग में लाभ (Chandan Uses in Leprosy Treatment in Hindi)

कुष्ठ रोग एक छुआछूत की बीमारी मानी जाती है। कई लोग कुष्ठ रोग से पीड़ित होते हैं। कुष्ठ रोग को ठीक करने के लिए सफेद चंदन, तथा कर्पूर को बराबर मात्रा में लें। इन्हें एक साथ मिलाकर पीस लें। इससे लेप करें। इससे कुष्ठ रोग में लाभ होता है।

चंदन के उपयोगी भाग (Useful Parts of Chandan)

आप चंदन का उपयोग इस तरह कर सकते हैः –

  • आर्द्रावस्था में कटा हुआ चन्दन (chandhan) पित्त रोग को ठीक करता है।

  • सूखे अवस्था में कटा चन्दन वात रोग को ठीक करता है।

  • मध्यमावस्था में कटा चन्दन, कफ को ठीक करता है।

  • चंदन के तेल के प्रयोग से कफ, जलन, त्वचा, पीलिया, सांस रोग, बुखार, कमजोरीर आदि में फायदा (chandan benefits) मिलता है।

चंदन के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Sandalwood?)

  • सैन्डल वुड (चंदन )का चूर्ण (sandal powder)- 3-6 ग्राम

  • चंदन का तेल- 5-20 बूंद

  • काढ़ा- 2-4 मिली

  • चंदन की लड़की तेल- 0.3-1 मिली

  • जड़

चंदन के नुकसान :Side Effects of Sandalwood

उचित मात्रा में चंदन का इस्तेमाल करने से स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन कुछ अवस्था में चंदन के उपयोग से निम्न दुष्प्रभाव हो सकते हैं |

  • अगर किसी को एलर्जी जैसी परेशानी होती है, तो उसकी त्वचा में चंदन से रिएक्शन हो सकता है।

  • इसके अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से पेट से जुड़े विकार, त्वचा-विकार, अवसाद, उल्टी, या यूरीमिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

चंदन कहाँ पे पाया या उगाया जाता है (Where is Sandalwood Found or Grown?)

चंदन (chandhan) की खेती कई स्थानों पर की जाती है। भारत में चंदन की खेती कर्नाटक, तमिलनाडू, केरल, दक्षिण आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश में होती है। मालाबार में 1200 मीटर की ऊंचाई तक, तथा राजस्थान, उत्तर प्रदेश एवं उड़ीसा में भी चंदन पाया जाता है।

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