चन्द्रशूर (हलीम) के फायदे और नुकसान | Chandrashur ke fayde | health benefits of Chandrashur in hindi

चन्द्रशूर (हलीम) के फायदे और नुकसान | Chandrashur ke fayde | health benefits of Chandrashur in hindi

चन्द्रशूर (हलीम) परिचय :-

आपने चंद्रशूर (CHANDRACHUR) के पौधे को बाग-बगीचे आदि में जरूर देखा होगा, लेकिन कभी गौर नहीं किया होगा। चंद्रशूर को हलीम भी कहा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, बेकार-सा दिखाई देने वाला चंद्रशूर (हलीम) का पौधा एक बहुत ही उत्तम औषधी है, और चंद्रशूर (हलीम) के फायदे से रोगों का इलाज किया जा सकता है।आयुर्वेदिक किताबों में चंद्रशूर के सेवन या उपयोग से संबंधित अनेक उत्तम बातें बताई गई हैं।

हिचकी की परेशानी, दस्त, शूल, चर्म रोग, आंखों की बीमारी में चंद्रशूर से लाभ मिलता है। चंद्रशूर के औषधीय गुण से दर्द से रहात मिल सकता है। आइए जानते हैं कि आप चंद्रशूर (CHANDRASHOOR) से और क्या-क्या लाभ ले सकते हैं।

चन्द्रशूर क्या है (What is Chandrashur ?)

हलीम (चन्द्रशूर ) के छोटे छोटे, कोमल, चिकने एक दो फुट ऊँचे एकवर्षायु पौधे होते हैं। मूल के पास से निकलने वाले पत्र द्विपक्षवत् खण्डित से होते हैं। इनका वृन्त (शाखा) दीर्घ होता है। काण्ड से निकलने वाले पत्र प्रायः अखण्ड, रेखाकारभालाकार होते हैं।

पुष्पछोटे सफेद रंग के, लम्बी मंजरियों में होते हैं। फली चक्राकारलट्वाकार तथा आगे के भाग से कुछ अन्दर की ओर दबी हुयी होती है। फली के प्रत्येक कोष्ठ में एकएक बीज होता है। ये बीज लाल रंग के नौकाकार होते हैं, जिनको जल में भिगोने से लुआब उत्पन्न होता है। ताजा पत्तों का साग बनाकर खाया जाता है। इसलिये सर्दियों में सोआ की भांति इसके शाखाओं के साथ पत्ते कभी कभी बिकने आते हैं।

अनेक भाषाओं में चन्द्रशूर के नाम (Chandrachur Called in Different Languages)

  • हिंदी :– हर्फ अलकालम, हालों, हालिम, चनसुर, चन्दसूर, चन्द्रशूर

  • संस्कृत नाम :– चन्द्रिका, चर्महत्री, पशुमेहनकारिका, नन्दिनी, कारवी, भद्रा, वासपुष्पा, सुवासरा, चंद्रसूर, चंद्रसूरा,

  • English :– कॉमन गार्डन क्रेस (Common garden cress), पेप्र ग्रास (Pepper grass), पेप्र वर्ट क्रेस, (Pepper wort cress), नास्टर्शियम क्रेस (Nasturtium cress), Common cress (कॉमन क्रेस), chamsur,

  • Scientific Names :– लैपिडियम सैटाइवम (Lepidium sativum)

  • Urdu :– हालिम (Halim)

  • Oriya :– चंदसारा (Chandsara), चंदसूरा (Chandsura)

  • Kannada :– अलिबीज (Allibija), कुरूटीग (Kurutige)

  • Gujarati :– अशेहीओ (Asahio), अशेरिया (Asheriya)

  • Tamil :– अलिविराई (Aliverai)

  • Telugu :– अदितयलु (Adityalu)

  • Bengali :– हालिम (Halim), हालिमा (Halima)

  • Nepali :– चम्सुर (Chamsur)

  • Punjabi :– तेजक (Tezak)

  • Marathi :– आलीव (Ahliva), हलिम (Halim)

  • Malayalam :– असली (Asali)

  • Arabic :– हल्फ (Half), हब्बे अल रसद (Habb el-rashad) हरफुलावाज (Harfulawaj)

  • Persian :– रूखमीस्पान्दा (Rukhmi-ispanda)

चन्द्रशूर  के द्रव्यगुण

  • रस (taste on tongue):- कटु, तिक्त

  • गुण (Pharmacological Action): लघु, स्निग्ध, पिच्छिल

  • वीर्य (Potency): उष्ण

  • विपाक (transformed state after digestion):- कटु

चन्द्रशूर (chandrachur) प्रशमन द्रव्य होने के साथ ही दीपन, वातानुलोमन, ग्राही, कृमिघ्न, रक्त शोधक, वेदनास्थापन, कफनि:सारक, हिक्कानिग्रहण, आर्त्तव (मासिक धर्म) जनन ,स्तन्य जनन, मूत्रल, वृष्य एवं बल्य है।

चन्द्रशूर (हलीम) का रासायनिक विश्लेषण : Chandrachur Chemical Constituents

हलीम (चन्द्रशूर) (chandrachur) के पंचांग में आयोडीन, फास्फोरस, लौह आदि खनिज लवण, एक तिक्त सत्व तथा पर्याप्त गंधक आदि होते हैं। बीजों में एक उड़नशील सुगन्धित तैल तथा एक स्थिर तैल पाया जाता है।

चन्द्रशूर से विभिन्न रोगों का सफल उपचार : Chandrashur  benefits and Uses (labh) in Hindi

चंद्रशूर के औषधीय गुणों से स्तनों में दूध की वृद्धि (Chandrachur Benefits in Increasing Breast Milk in Hindi)

  • स्तनपान कराने वाली किसी महिला को दूध की कमी हो रही है तो हलीम के बीज के फायदे ले सकती हैं। चंद्रशूर के बीज से बने 10-20 मिली काढ़े में एक चम्मच शहद मिला लें। इसे पीने से स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।

  • 5-10 ग्राम बीजों को 100 मिली दूध में खूब गर्म कर लें। इसे पिलाने से स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।

  • चन्द्रसूर की बीजों को घी में भूनकर शर्करा मिला लें। इसका सेवन करने से स्तनों में दूध बढ़ता है।

शारीरिक कमजोरी होने पर चंद्रशूर के फायदे (Benefits of Chandrashur to Cure Body Weakness in Hindi)

चन्द्रसूर (chandrashoor) के बीजों को घी में भूनकर शर्करा मिला लें। इसका सेवन करने से प्रसव के बाद होने वाली शारीरिक कमजोरी ठीक होती है।

चंद्रशूर के औषधीय गुण से गठिया का इलाज (Uses of Chandrashur in Arthritis Treatment in Hindi)dcgyan

हलीम के बीजों तो तिल के तेल में पका लें। इसे लगाने से वातरक्त तथा गठिया की बीमारी में लाभ होता है।

मोच आने पर चंद्रशूर से लाभ (Benefits of Chandrashur in Sprain Problem in Hindi)

चन्द्रसूर (chandrashoor) के बीजों को पीसकर लगाने से मोच में बहुत लाभ होता है।

सूजन की समस्या में चंद्रशूर से लाभ (Benefits of Chandrachur in Reducing Swelling in Hindi)

  • चन्द्रसूर के बीजों को पीसकर लगाने से शरीर के सभी अंगों की सूजन ठीक हो जाती है।

  • हलीम के बीजों को कूट लें। इसमें नीबू का रस मिलाकर लगाने से सूजन कम हो जाती है।

हिचकी की परेशानी में चंद्रशूर के फायदे (Benefits of Chandrashur in Hiccup Problem in Hindi)

10 ग्राम चन्द्रसूर (हलीम) के बीज को 8 गुने जल में पकाएं। इसे गाढ़ा हो जाने पर कपड़े से छान लें। इस जल को 50 मिली की मात्रा में बार-बार पीने से हिचकी की परेशानी ठीक होती है।

सर्दी में चंद्रशूर के फायदे (Chandrashur Benefits to Treat Cold in Hindi)

चन्द्रसूर (हलीम) के बीजों का काढ़ा बनाएं। इसे 10-15 मिली मात्रा में पिलाने से सर्दी की वजह से होने वाली परेशानियों में लाभ होता है।

चंद्रशूर के औषधीय गुण से सूखी खांसी का इलाज (Chandrashur Uses in Fighting with Cough Hindi)

हलीम की टहनियों का काढ़ा बना लें। इसे 5-10 मिली मात्रा में पिलाने से सूखी खांसी में लाभ होता है। बेहतर परिणाम के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर परामर्श लें।

शरीर के दर्द में चंद्रशूर का सेवन लाभदायक (Chandrashur Uses in Relief from Body Pain in Hindi)dcgyan

  • चन्द्रसूर को पानी में पीसकर पीने तथा लेप करने से खून से संबंधित विकारों तथा शरीर के दर्द से आराम मिलता है।

  • हलीम के 50 ग्राम बीजों को 200 मिली तिल के तेल में पका लें। तेल को छानकर लगाने से शरीर का दर्द ठीक होता है।

दस्त में चंद्रशूर के सेवन से लाभ (Uses of  to Stop Diarrhea in Hindi)

  • आप हलीम के बीज के फायदे दस्त में भी ले सकते हैं। 1 चम्मच चन्द्रसूर (chandrashoor) की बीज के रस में 1 गिलास नारियल पानी मिला लें। इसे पीने से दस्त और पेचिश में लाभ होता है।

  • 1-2 ग्राम चंद्रशूर की जड़ के चूर्ण का सेवन करने से दस्त की परेशानी ठीक होती है।

पेट दर्द में चंद्रशूर के सेवन से लाभ (Chandrachur Benefits in Getting Relief from Abdominal Pain in Hindi)

चन्द्रसूर की बीजों का काढ़ा बना लें। इसे 10-15 मिली मात्रा में पीने से पेट के दर्द से राहत मिलती है।

कब्ज़ में हलीम के फायदे (Chandrachur Benefits to Get Relief from Constipation in Hindi)

कब्ज की समस्या में आप हलीम का उपयोग कर सकते है, क्योंकि इसमें पाए जाने वाला कफ जैसा पदार्थ लैक्सटिव के गुण वाला होता है, जो की कब्ज को दूर करने में मदद करता है।

धातुपुष्टि में हलीम के फायदे  (Chandrachur Beneficial in Dhatupushti in Hindi)

यदि आप कमजोरी महसूस करते है, और साथ ही आपका वजन भी आपकी लम्बाई के अनुरूप नहीं है तो आप हलीम का उपयोग कर सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार ये बल और पुष्टिवर्धक होता है। 

आम अतिसार में हलीम के फायदे ( Chandrachur Beneficial in Diarrhoea in Hindi)

आम अतिसार में भी हलीम का उपयोग कर सकते है, ये अतिसार के लक्षणों को कम करता है। इसके लिए आप इसके बीजों का पेस्ट बनाकर सेवन कर सकते हैं।

पेट के रोग में हलीम के फायदे (Benefits of Chandrachur in Abdominal Diseases in Hindi)

उदर संबंधी रोग में चम्सुर का उपयोग फायदेमंद होता है, क्योंकि हलीम में गैस्ट्रोप्रोटेक्टिव की क्रियाशीलता पायी जाती है। जिस कारण ये उदर संबंधी विकारों को दूर करने में सहायता करता है।

कमर दर्द और सायटिका में हलीम के फायदे (Chandrachur Beneficial in Back Pain and Sciatica Pain in Hindi)

आयुर्वेद के अनुसार, गर्म तासीर होने ये वात दोष और सूजन को कम करने में मदद करता है। कमर दर्द और सायटिका में हलीम का सेवन फायदेमंद हो सकता हैं, क्योंकि इसमें एंटीइंफ्लामेट्री गुण होता है।

चंद्रशूर के औषधीय गुण से खूनी बवासीर का इलाज (Benefits of Chandrachur in Piles Treatment in Hindi)

हलीम के बीज के फायदे से खूनी बवासीर के इलाज में मदद मिलती है। 5 मिली चन्द्रसूर के बीज के रस लें। इसे पानी या नारियल का पानी मिलाकर पीने से रक्तार्श (खूनी बवासीर) में लाभ होता है।

सिफलिस (उपदंश) रोग में चंद्रशूर के सेवन से फायदा (Chandrachur Benefits to Treat Syphilis in Hindi)

चन्द्रसूर पंचांग का काढ़ा बनाकर 10-15 मिली मात्रा में पिलाने से उपदंश (सिफलिस) रोग में लाभ होता है।

लीवर रोग में चंद्रशूर के सेवन से लाभ (Chandrachur Benefits to Treat Lever Disease in Hindi)

हलीम के बीज के फायदे से लिवर से जुड़े रोगों में भी लाभ मिलता है। 10-15 मिली चंद्रसूर की बीज का काढ़ा पीने से लिवर संबंधित विकारों में लाभ होता है।

प्रमेह रोग दूर करने में चन्द्रशूर फायदेमंद :

इसका फांट बनाकर सेवन कराने से दस्त साफ आता है तथा मूत्र खुलकर आता है। इससे मूत्र का गंदलापन, वातज कफज प्रमेह दूर होते हैं।

विधि चन्द्रशूर (हलीम) 10 ग्राम, काली अनन्तमूल 5 ग्राम को जौकुट कर 20 मि.लि. उबलते हुये पानी में मिलाकर 20-25 मिनट तक ढक्कन लगाकर रख दें। इसके बाद छानकर रोगी को पिला दें। आवश्यकतानुसार इसमें शक्कर मिलायी जा सकती है।

संग्रहणी में चन्द्रशूर का उपयोग लाभदायक :

चन्द्रशूर (chandrachur) बीज 25 ग्राम, कलौंजी 25 ग्राम, घी में भुने हुये मेंथी के बीज 25 ग्राम और काली मिर्च 12 ग्राम सबको पीसकर बारीक चूर्ण बनालें। इसे 3-3 ग्राम की मात्रा में सेवन कराते रहें।

प्रसूता स्त्रियों के लिये फायदेमंद चन्द्रशूर के औषधीय गुण :

प्रसव के पश्चात् स्त्रियों को चन्द्रशूर (हलीम) का सेवन कराने से गर्भाशय का संशोधन होता है, वायु के उपद्रव शान्त होते हैं तथा दूध व बल बढ़ता है। इसे दूध में पकाकर खिलाना चाहिये।

विधि पहले दूध गरम करें। दूध उबलने पर 5 से 6 ग्राम बीज मिलाकर उबालते रहें। चन्द्रसुर गल जाने पर गुड़ या शक्कर मिला दें और ठण्डा होने पर खिलावें। इसका प्रयोग 40 से 50 दिनों तक निरन्तर करावें। इसके अतिरिक्त इसके मोदक बनाकर भी खिलाये जा सकते हैं। इनकी एक विधि आगे दी गई है।

चन्द्रशूर क्षीर पाक पुरुषों के लिये भी बलाधान हेतु उपयोगी है। इससे गृध्रसी (एक तरह का वात रोग), कटिशूल (कमरदर्द) आदि वात रोगों में भी लाभ मिलता है।

धातुपुष्टि शक्ति बढ़ाने में लाभकारी चन्द्रशूर :

सर्दियों में चन्द्रशूर के मोदक बनाकर सेवन कराने चाहिये। जिनको कब्ज प्राय: रहता है उन दुर्बल रोगियों के लिये यह अधिक उपयोगी है। ये वातरोगों को भी दूर करते हैं।

निर्माण विधिचन्द्रशूर (हलीम) 200 ग्राम, सूजी 800 ग्राम, उड़द का आटा 200 ग्राम, घृत 800 ग्राम और शक्कर एक किलो 200 ग्राम लेकर पहले उड़द के आटे को 25 मि.लि. दूध का मोमन देवें फिर चनसुर चूर्ण और उड़द के आटे और सूजी को अलग अलग घी में भूनें। इसके बाद शक्कर की चाशनी कर सब मिला दें। इसमें बिहीदाना, चिरोंजी, छोटी इलायची के बीज, जायफल, जावित्री और पीपरामूल इच्छानुसार मिलाकर थाल में जमाकर चक्की बना लें और मोदक बनालें। यह पाक शीत काल में पौष्टिकता के लिये सेवन करने योग्य है।

चन्द्रशूर के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Chandrashur ?)

मात्रा – 2 से 5 ग्राम।

चन्द्रशूर के उपयोगी भाग (Beneficial Part of Chandrashur in Hindi)

आप चंद्रशूर के इन भागों का उपयोग कर सकते हैं

हलीम (चंद्रशूर) के बीज,जड़,पत्ते,पंचांग,

चन्द्रशूर के सेवन का तरीका (How to Use Chandrashur?)

हलीम के बीज का चूर्ण – 1-3 ग्राम

यहां चंद्रशूर (हलीम) से होने वाले सभी फायदे के बारे को बहुत ही आसान शब्दों (chamsur in hindi) में लिखा गया है ताकि आप चंद्रशूर से पूरापूरा लाभ ले पाएं, लेकिन औषधि के रूप में चंद्रशूर का प्रयोग करने के लिए चिकित्सक की सलाह जरूर लें।

चन्द्रशूर के नुकसान :Side Effects of Chandrashur

  1. हलीम की अधिक मात्रा मूत्रपिंडों के लिये हानिकारक है जिसके निवारण हेतु शक्कर एवं खीरा ककड़ी के बीज सेवन करने चाहिये।

  2. उचित मात्रा में सेवन करने से शरीर पर कोई नुकसान नहीं होता है, लेकिन अधिक मात्रा में सेवन करने से यह पेट में गड़बड़ी कर सकता है।

  3. चन्द्रशूर को डॉक्टर की सलाह अनुसार ,सटीक खुराक के रूप में समय की सीमित अवधि के लिए लें।

  4. गर्भवती महिलाओं को चंद्रशूर (chandrachur) का सेवन नहीं करना चाहिए।

चन्द्रशूर कहाँ पे पाया या उगाया जाता है (Where is Chandrashur Found or Grown?)

तिब्बत तथा भारत में चन्द्रशूर (हलीम) की खेती होती है। भारत में विशेषतः महाराष्ट्र में इसकी खेती होती है। यह औषधि के अतिरिक्त सलाद के रूप में भी उपयोग में लाया जाता है। यह घोड़े, ऊँट आदि पशुओं को भी खिलाया जाता है। इसके बीजों का आयात फारस से भी होता है। यह मूलतः इथोपिया का है। विश्व में यूरोप, पश्चिमी एशिया, मिश्र, सूडान, सउदी अरब, तुर्की, ईरान, ईराक, पाकिस्तान एवं तिब्बत में चंद्रशूर पाया जाता है।

 

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