चित्रक के फायदे और नुकसान | Chitrak ke fayde | health benefits of Chitrak in hindi

चित्रक के फायदे और नुकसान | Chitrak ke fayde | health benefits of Chitrak in hindi

(Chitrak) चित्रक परिचय :-

चित्रक के पौधे (plumbago zeylanica in hindi), पत्तियों और जड़ों का इस्तेमाल बीमारी के उपचार के लिए किया जाता है। हो सकता है कि आपने भी चित्रक के पौधे (chitrak plant) को अपने आसपास देखा हो, लेकिन जानकारी नहीं होने के कारण इसका लाभ नहीं ले पा रहे हों। इस जानकारी के बाद आप चित्रक का पूरा लाभ (chitrak benefits) ले पाएंगे।

चित्रक क्या है (What is Chitrak?)

सफ़ेद चित्रक सम्पूर्ण भारत वर्ष में पैदा होती है। कहीं कहीं इसकी खेती भी की जाती है। यह बंगाल, उत्तर प्रदेश, दक्षिण भारत, श्री लंका में अधिक होती है। यह कई वर्ष जीने वाली, हमेशा हरी रहने वाली 3 से 6 फीट ऊंचाई वाली गुल्म जाती की वनस्पति है। इसका तना बहुत कम होता है। और जड़ के सिर पर से ही पतली पतली कई डालियां निकलती हैं जो चिकनी हरे रंग की होती हैं। इसके पत्ते 3 इंच लम्बे डेढ़ इंच चौड़े अखण्ड, लम्बाई में गोल हरे रंग के होते है जो आगे की ओर कुछ मोटे होते हैं। फूल सफ़ेद रंग के गंधहीन होते है जो शाखायुक्त पूष्प दण्ड के ऊपरी भाग पर आधा से पौन इंच व्यास के गुच्छों के रूप में लगे रहते हैं। इसके बाहरी कोष में चिपचिपी ग्रंथियां सवृत्त होती हैं। फल यव के आकार के लम्बे गोल होते हैं जिसमें एक बीज होता है। इसकी जड़ अंगुली की तरह मोटी है जो सूखने पर तोड़ने पर तत्काल टूटने वाली होती है। इसकी जड़ का स्वाद तीक्ष्ण, कड़वा होता है और इससे एक विचित्र, अच्छी नहीं लगने वाली गंध निकलती है। इसकी जड़ की छाल पर छोटे -छोटे गांठदार उभारहोते हैं।

सितम्बर से नवम्बर के मध्य फूल आते हैं तथा फल को पकने में एक महिना लगता है। इसकी फूलों के आधार पर लाल, काली और सफ़ेद तीन तरह की प्रजाति मिलती है, सामान्यतः सफ़ेद चित्रक का प्रयोग औषधीय उपयोग में किया जाता है।

अनेक भाषाओं में चित्रक के नाम (Chitrak Called in Different Languages)

  • हिंदी :– चीत, चीता, चित्रक, चित्ता, चितरक, चितउर ;

  • संस्कृत नाम :– चित्रक, अग्नि, अग्निमाता, ऊषण, पाठी, वह्नि संज्ञा ;

  • English :– Ceylon leadwort (सिलोन लेडवर्ट), व्हाइट फ्लॉवर्ड लेडवर्ट (White flowered leadwort), व्हाइट लेडवर्ट (White leadwort) ;

  • Scientific Names :– प्लम्बैगो जेलनिका (Plumbago zeylanica ) ;

  • Urdu – चितालकड़ी (Chitalakri) ;

  • Oriya – चितामूला (Chitamula), चितापारू (Chitaparu) ;

  • Kannada – चित्रकमूल (Chitrakmoola), वाहिनी (Vaahini) ;

  • Gujarati – चित्रो (Chitro), चित्रा (Chitra) ;

  • Telugu – तेल्लाचित्रमूलामू (Tellachitramulamu), चित्रमूलमु (Chitramulamu) ;

  • Bengali – चिता (Chita), चित्रुक (Chitruk) ;

  • Nepali – चितु (Chitu) ;

  • Punjabi – चित्रक (Chitrak) ;

  • Marathi – चित्रक (Chitraka), चित्तमूला (Chitramula) ;

  • Arabic – शीतराज (Shitaraj), चीता लकड़ी (Chita lakri) ;

  • Persian – बेख बरंदा (Bekh baranda), सितारक (Shitarak), सितीरक (Shitirak) ;

 

चित्रक  के द्रव्यगुण

  • रस (taste on tongue):- कड़वी, चरपरी;

  • गुण (Pharmacological Action): गुरु

  • वीर्य (Potency): अति उष्ण

  • विपाक (transformed state after digestion):- चरपरी
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चित्रक के गुण : Properties of Chitrak

आयुर्वेद के मतानुसार चित्रक भोजन को पचाने वाली, रूखी, हल्की, भूख को बढ़ाकर रस रक्तादि सप्तधातुओं की अग्नि को जागृत करने वाली है।

चित्रक कड़वी, गरम, रसायन, त्वचारोग, संग्रहणी, बवासीर, पेट के कीड़े व यकृत तथा उदर रोग को दूर करने वाली औषधि है।

साधारणतः चित्रक से सफेद चित्रक (plumbago zeylanica in hindi)ही ग्रहण किया जाता है। सफेद चित्रक वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को शान्त करता है। यह तीखा, कड़वा और पेट के लिए गरम होने के कारण कफ को शान्त करता है। भूख बढ़ाता है, भोजन को पचाता है, उल्टी को रोकता है, पेट के कीड़ों को खत्म करता है। यह खून तथा माता के दूध को शुद्ध करता है। यह सूजन को ठीक करता है।

यह टॉयफायड बुखार को समाप्त करता है। चित्रक की जड़ (plumbago zeylanica root) घावों और कुष्ठ रोग को ठीक करती है। यह पेचिश, प्लीहा यानी तिल्ली की वृद्धि, अपच, खुजली आदि विभिन्न चर्मरोगों, बुखार, मिर्गी, तंत्रिकाविकार यानी न्यूरोडीजिज और मोटापा आदि को भी समाप्त करता है। सफेद चित्रक गर्भाशय को बल प्रदान करता है, बैक्टीरिया और कवकों को नष्ट करता है, कैंसररोधी यानी एंटीकैंसर है, लीवर के घाव को ठीक करता है।

रंग-भेद से इसकी तीन जातियां पाई जाती हैं, जो ये हैं:-

सफेद चित्रक (Plumbago zeylanica Linn.)

लाल चित्रक (Plumbago indica Linn.)

नीला चित्रक (Plumbago auriculata Lam.)

यह एक सीधा और लंबे समय तक हरा-भरा रहने वाला पौधा (chitrak plant) होता है। इसका तना कठोर, फैला हुआ, गोलाकार, सीधा तथा रोमरहित होता है। इसके पत्ते लगभग 3.8-7.5 सेमी तक लम्बे एवं 2.2-3.8 सेमी तक चौड़े होते हैं। इसके फूल नीले-बैंगनी अथवा हल्के सफेद रंग के होते हैं।

रासायनिक संगठन :

इसकी जड़ में तीखा पीले रंग का तत्व होता है जिसे प्लम्बेजिन (PLUMBAGIN) कहते हैं। यह अधिकतम 0.9% होता है। इसके अलावा स्वतन्त्र द्राक्षशर्करा, फलशर्करा तथा प्रोटिएज एन्जाइम होते हैं। प्लेम्बेजिन शरीर के

स्नायुमण्डल को उत्तेजित करता है तथा अधिक मात्रा में यह निष्क्रियता लाकर रक्तभार में कमी भी कर सकता है। यह तेज जलन करने वाला तथा कृमि एवं जीवाणु नाशक तत्व है। ज्यादा मात्रा में यह हृदय को भी नुकसान पहुंचा सकता है। यह मूत्र, पित्त और पसीने की क्रिया को भी उत्तेजित करता है।

चित्रक से विभिन्न रोगों का सफल उपचार : Chitrak benefits and Uses (labh) in Hindi

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यकृत और प्लीहा के रोग में चित्रक के फायदे :-

चित्रक, यवक्षार, इमलीक्षार, भुनी हींग और पांचों नमक- सभी समान मात्रा में मिलाकर नींबू के साथ मिलाकर पीस कर रख लें। इसकी आधा से एक ग्राम मात्रा सुबह-शाम लेने से यकृतप्लीहा के रोगों में लाभ होता है।

 अतिसार में चित्रक के फायदे :-dast

चित्रक की जड़ का चूर्ण आधा ग्राम छाछ या गरम पानी के साथ दिन में तीन बार लेने से अतिसार और ग्रहणी का रोग नष्ट होते हैं।

अपच में चित्रक के फायदे :-

चित्रकमूल, अजवाइन, सौंठ, काली मिर्च और सेन्धानमक समान मात्रा में लेकर महीन चूर्ण कर लें। इस चूर्ण की आधे से एक ग्राम मात्रा छाछ (मट्ठा) के साथ लेने से अपच दूर होता है। मन्दाग्नि दूर होकर पाचन शक्ति बढ़ती है।

पाचन शक्तिवर्धक में चित्रक के फायदे :-

  • सेन्धा नमक, हरड़, पिप्पली और चित्रक इन्हें समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें। आधा से एक ग्राम मात्रा गरम पानी के साथ सुबह-शाम लेने से पाचन शक्ति बढ़ कर अजीर्ण, अरुचि व अग्निमांद्य रोग में लाभ मिलता है।

  • चित्रक की जड़ के चूर्ण को बायविडंग और नागरमोथा के साथ समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनाकर लेने से आम दोष का पाचन होकर पाचन शक्ति बढ़ती है।

बवासीर (अर्श) में चित्रक के फायदे :-

  • चित्रक की जड़ को पीस कर पानी में गलाकर मिट्टी के बरतन में लेप कर दें। फिर इस मिट्टी के बरतन में दूध का दही जमा कर और दही जम जाने के बाद उसे मथ कर मक्खन निकाल कर जो मटठा या छाछ बचे उसे पीने से बवासीर रोग में लाभ होता है।

  • (Chitrak )चित्रक की जड़ की छाल के 2 ग्राम चूर्ण को छाछ के साथ सुबह-शाम भोजन से पहले पीने से भी बवासीर में लाभ होता है।

  • चित्रक की जड़, कनेर की जड़, दन्तीमूल, सेन्धानमक- सभी बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। फिर इसमें आक (मदार) का दूध मिलाकर गीला कर लें। इसमें तिल्ली का तैल मिलाकर गरम कर ठण्डा कर लेप बना लें। इस अर्शहर लेप को बाहर निकले बादी के मस्सों पर लगाने से वे सूख जाते हैं।

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चर्म रोगों के लिए रामबाण है चित्रक की छाल (Uses of Chitrak for Skin Disease in Hindi)कील, मुंहासे , रामबाण ,घरेलु ,उपचार,Surprising, Home, Remedies, Acne,

चित्रक (plumbago zeylanica)  की छाल को दूध या जल के साथ पीसकर कुष्ठ और त्वचा के दूसरे प्रकार के रोगों में लेप करने से आराम मिलता है। इन्हीं चीजों को एक साथ पीसकर पुल्टिस (पट्टी) बनाकर बाँध दें। छाला उठने तक बाँधे रखें। इस छाले के आराम होने पर सफेद कुष्ठ के दाग मिट जाते हैं।

लाल चित्रक की जड़ को पीसकर, तेल के साथ मिलाकर पकाकर, छानकर लगाने से सूजन, कुष्ठ, दाद, खुजली आदि त्वचा की बीमारियों में लाभ होता है। लाल चित्रक की जड़ को पीसकर लगाने से मण्डल कुष्ठ में लाभ होता है।

नीले चित्रक की जड़ को पीसकर चर्मकील में लगाने से चर्मकील (Wart) का शमन होता है।

श्लीपद (हाथी पांव) में चित्रक के फायदे :-

चित्रक की जड़ और देवदारु समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना कर इसमें गौमूत्र मिलाकर हाथीपांव के रोग में बाहर से लेप करने से आराम मिलता है |

खांसी-सर्दी में चित्रक के फायदे :-

चित्रक की जड़ के चूर्ण की आधा ग्राम मात्रा शहद और अदरक के रस में मिलाकर सुबह शाम चाटने से नई सर्दीखांसी में लाभ होता है।

ज्वर में चित्रक के फायदे :-

चित्रक की जड़ का चूर्ण आधा ग्राम और त्रिकटू चूर्ण (सोंठ, काली मिर्च,पीपल) की एक ग्राम मात्रा गरम पानी के साथ देने से पसीना आकर ज्वर का वेग कम होता है। बुखार में जब रक्त संचार की क्रिया मन्द हो जाती है और रोगी अन्न नहीं खा पा रहा होता है तब चित्रक की जड़ के छोटे टुकड़े चबाने को देने से लाभ होता है।

आधाशीशी (माइग्रेन) में चित्रक के फायदे :-

चित्रक, पुष्कर मूल और सोंठ- सभी 10-10 ग्राम लेकर बारीक चूर्ण बना लें। लगभग एक ग्राम चूर्ण को प्रातःकाल मिठाई के साथ खाने से सिरदर्द में लाभ होता है।

गठिया-आमवात में चित्रक के फायदे :-dcgyan

  • चित्रकमूल, आंवला, हरड़, पीपल, रेवदचीनी और कालानमक- सभी समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इसकी 2 ग्राम मात्रा रात को सोते समय गरम पानी के साथ लेने से सन्धिवात, गठिया और वायु के रोग में लाभ होता है।

  • चित्रक मूल के चूर्ण को गरम पानी के साथ मिलाकर जोड़ के स्थान पर लेप करने से वृद्धावस्था के जोड़ों के दर्द में लाभ होता है।

योषापस्मार (हिस्टीरिया) में चित्रक के फायदे :-

(Chitrak )चित्रक की जड़, ब्राह्मी और वच के बराबर मात्रा के चूर्ण मिलाकर उसकी 1 से 2 ग्राम मात्रा दिन में तीन बार गाय के दूध और घी में मिलाकर देने से लाभ होता है।

हृदयशूल में चित्रक के फायदे :-dcgyan

जब रोगी को सीने में दर्द हो तो चित्रक की जड़ 2 ग्राम, त्रिकटू चूर्ण 6 ग्राम और पीपरामूल 2 ग्राम लेकर 200 मि. लि. पानी में उबाल कर 100 मि.लि. रहने तक मन्द आंच पर उकालें। फिर छानकर एक से दो बार लेने से हृदयशूल में लाभ होता है।

बहुमूत्र रोग में चित्रक के फायदे :-

5 ग्राम चित्रक की छाल 5 ग्राम के चूर्ण को 200 मि.लि. पानी में डाल कर मन्द आंच पर उबालें। जब आधा शेष रह जाए तब उतार कर छानकर तीन सप्ताह तक रोज पीने से बार-बार पेशाब जाने की समस्या में लाभ होता है।

सुखपूर्वक प्रसव में चित्रक के फायदे :-

लगभग 5 ग्राम चित्रक की जड़ के चूर्ण को शहद के साथ चाटने से प्रसव सुखपूर्वक होता है और डिलेवरी के बाद प्लेसेन्टा आसानी से बाहर आ जाता है।

चित्रक की जड़ का गर्भाशय पर बहुत तीव्र संकोचक प्रभाव होता है अतः गर्भावस्था में इसका प्रयोग नवे माह के बाद ही करना चाहिए। 2 ग्राम मात्रा में आंतरिक सेवन करने से या गर्भाशय में प्रविष्ट कराने से गर्भपात हो सकता है परन्तु गर्भपात के बाद अत्यधिक रक्तस्राव होने का खतरा हो सकता है।

अनार्तव में चित्रक के फायदे :-

जब किसी स्त्री को आर्तव (मासिक रक्तस्राव) नहीं आ रहा हो तो चित्रक मूल की 2 ग्राम मात्रा गरम पानी के साथ देने से आर्तव शुरू हो सकता है।

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कुष्ठ रोग में चित्रक के फायदे :-

लाल चित्रक की सूखी जड़ का चूर्ण एक ग्राम मात्रा में सुबह-शाम महामंजिष्ठादि क्वाथ के साथ सेवन करने से लाभ होता है। कुष्ठ रोग में चित्रक की छाल के चूर्ण की एक ग्राम मात्रा नियमित खाने से एक वर्ष की अवधि में लाभ होता है। त्वचा पर मण्डल कुष्ठ व सफ़ेद दाग़ में चित्रकमूल चूर्ण को गौमूत्र में मिलाकर लेप करें। लेप के पश्चात यदि छाले या जले हुए समान निशान दिखाई दें तो लेप तत्काल बन्द कर नारियल का तैल लगाएं। इन छालों पर नई त्वचा आती है और सफ़ेद दाग मिट जाते हैं।

सूतिका ज्वर में चित्रक के फायदे :-

प्रसव उपरान्त स्त्री को होने वाले बुखार तथा यदि गर्भाशय में कुछ अवरोध हो तो चित्रक की जड़ की 1-1 ग्राम मात्रा पिपलामूल के चूर्ण की आधा ग्राम मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम शहद के साथ चटाने से लाभ होता है।

अपक्व विद्रधि में चित्रक के फायदे :-

शरीर पर बाहर की ओर कोई अपक्व गांठ या कच्ची फुसी दिखाई दे तथा उसमें दर्द हो तो चित्रक की जड़ को पीस कर गरम पानी में मिलाकर गांठ पर बांध दें। इससे वह जल्दी पक कर फूट जाती है। फिर मवाद निकाल कर इसकी सफ़ाई कर चित्रक की छाल में सेन्धानमक मिलाकर छाछ में पीस लें और टिकिया बना कर घाव पर रखने से घाव जल्दी भर जाता है।

गले का दर्द व स्वरभेद में चित्रक के फायदे :-

अजमोदा, हल्दी, आंवला, यवक्षार व चित्रक के चूर्ण की समान मात्रा मिलाकर इस मिश्रण की एक ग्राम मात्रा दिन में 3 बार विषम मात्रा में शहद और घी यानी एक भाग शहद और आधा भाग घी में मिलाकर चाटने से गले के रोग ठीक होते हैं। और स्वर भेद में राहत मिलती है।

पीलिया के इलाज में चित्रक से लाभ (Chitrak is Beneficial for Jaundice in Hindi)

लीवर संबंधी रोगों में भी चित्रक का प्रयोग फायदेमंद होता है, जैसे कामला (पीलिया) में चित्रक लीवर की कोशिकाओ को हेल्दी कर पीलिया के लक्षणों को कम करता है।

चित्रक के सेवन से बुखार का इलाज (Chitrak Uses in Fighting with Fever in Hindi)

  • (Chitrak )चित्रक की जड़ के चूर्ण में सोंठ, काली मिर्च तथा पिप्पली का चूर्ण मिला लें। इसे 2-5 ग्राम की मात्रा में देने से बुखार ठीक होती है।

  • बुखार में जब रोगी खाना नहीं खा सके, उस समय चित्रक की जड़ के टुकड़ों को चबाने से अच्छा लाभ होता है।

  • 2-5 ग्राम चित्रक (plumbago zeylanica) की जड़ के चूर्ण को दिन में तीन बार सेवन करने से से बुखार कम हो जाती है। प्रसूति को बुखार आने पर इसे निर्गुंडी के 10-20 मिली रस के साथ देना चाहिए।

चर्म रोगों के लिए रामबाण है चित्रक की छाल (Uses of Chitrak for Skin Disease in Hindi)

  • चित्रक (plumbago zeylanica) की छाल को दूध या जल के साथ पीसकर कुष्ठ और त्वचा के दूसरे प्रकार के रोगों में लेप करने से आराम मिलता है। इन्हीं चीजों को एक साथ पीसकर पुल्टिस (पट्टी) बनाकर बाँध दें। छाला उठने तक बाँधे रखें। इस छाले के आराम होने पर सफेद कुष्ठ के दाग मिट जाते हैं।

  • लाल चित्रक की जड़ को पीसकर, तेल के साथ मिलाकर पकाकर, छानकर लगाने से सूजन, कुष्ठ, दाद, खुजली आदि त्वचा की बीमारियों में लाभ होता है। लाल चित्रक की जड़ को पीसकर लगाने से मण्डल कुष्ठ में लाभ होता है।

  • नीले चित्रक की जड़ को पीसकर चर्मकील में लगाने से चर्मकील (Wart) का शमन होता है।

गठिया में लाभदायक चित्रक की जड़ का उपयोग (Chitrak Uses for Arthritis Treatment in Hindi)

  • चित्रक की जड़, इन्द्रजौ, कुटकी, अतीस और हरड़ को समान भाग में लेकर चूर्ण बना लें। इसे 3 ग्राम मात्रा में सुबह और शाम सेवन करने से वात के कारण होने वाली समस्याएं ठीक होती हैं।

  • चित्रक की जड़, आंवला, हरड़, पीपल, रेवंद चीनी और सेंधा नमक को बराबर भाग लेकर चूर्ण बनाकर रखें। 4-5 ग्राम चूर्ण को सोते समय गर्म पानी के साथ सेवन करने से जोड़ों का दर्द, वायु के रोग और आंतों के रोग मिटते हैं।

  • लाल चित्रक की जड़ की छाल को तेल में पकाकर, छानकर लगाने से पक्षाघात यानी लकवा और गठिया में लाभ होता है।

  • लाल चित्रक की जड़ को पीसकर, तेल के साथ मिलाकर पका लें। इसे छानकर लगाने से आमवात यानी गठिया में लाभ होता है।

  • गठिया के लक्षणों को नियंत्रित करने में चित्रक एक अच्छी औषधि है, क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार आमवात में आम दोष की उपस्थिति होती है। चित्रक दीपन -पाचन वाला होने से आम दोष का पाचन कर आमवात के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है।

तिल्ली विकार में चित्रक से फायदा (Chitrak Uses to Treat Spleen Disorder in Hindi)

  • ग्वारपाठा यानी एलोवेरा के 10-20 ग्राम गूदे पर चित्रक की छाल के 1-2 ग्राम चूर्ण को बुरक लें। इसे सुबह और शाम खिलाने से तिल्ली की सूजन ठीक होती है।

  • चित्रक की जड़ (chitrak root), हल्दी, आक (मदार) का पका हुआ पत्ता, धातकी के फूल का चूर्ण में से किसी एक को गुड़ के साथ दिन में तीन बार खाएं। इसे एक से दो ग्राम तक खाने से तिल्ली की सूजन दूर होती है।

  • चित्रक का प्रयोग प्लीहा या तिल्ली संबंधी विकारों में फायदेमंद होता है क्योंकि एक रिसर्च के अनुसार चित्रक का प्रयोग प्लीह या तिल्ली को स्वस्थ रखने में सहायक होता है, साथ ही आयुर्वेद के अनुसार चित्रक को रसायन भी कहा गया है।

पाचनतंत्र विकार में चित्रक चूर्ण के सेवन से लाभ (Chitrak Benefits for Indigestion in Hindi)

  • सैन्धव लवण, हरीतकी, पिप्पली तथा चित्रक चूर्ण को बराबर मात्रा में मिला कर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 1-2 ग्राम गर्म जल के साथ सेवन करने से भूख लगती है। इसके सेवन से घी, मांस और नए चावल का भात तुरंत पच जाता है।

  • 2-5 ग्राम चित्रक (chitraka) चूर्ण में बराबर मात्रा में वायविडंग तथा नागरमोथा चूर्ण को मिलाकर सुबह और शाम भोजन से पूर्व सेवन करने से भोजन में अरुचि, भूख की कमी तथा अपच की समस्या ठीक होती है।

गण्डमाला (गले की गाँठ) में चित्रक का सेवन फायदेमंद (Benefits of Chitrak to Treat Goiter in Hindi)

भल्लातक, कासीस, चित्रक तथा दन्तीमूल (chitrak mool) की बराबर मात्रा के चूर्ण में गुड़ और स्नुही यानी थेहुर पौधे के दूध तथा आक का दूध मिला लें। इसका लेप करने से गले की गांठे ठीक हो जाती हैं। नीले चित्रक की जड़ (plumbago zeylanica root) को पीसकर लेप करने से गण्डमाला में लाभ होता है।

दांतों के रोग में चित्रक के औषधीय गुण से लाभ (Benefits of Chitrak for Tooth Problems in Hindi)

नीले चित्रक की जड़ (chitrak root)तथा बीज के चूर्ण को दांतों पर मलने से पायोरिया (Pyorrhea) यानी दांतों से पीव आने की बीमारी ठीक होती है। इसके साथ ही दांत का घिसना-टूटना बंद होता है।

नाक से खून बहने पर चित्रक के चूर्ण का सेवन फायदेमंद (Chitrak Powder Stops Nose Bleeding in Hindi)

सफेद चित्रक के 2 ग्राम चूर्ण (chitrak powder)को शहद के साथ मिलाकर खाने से नकसीर यानी नाक से खून आना बंद होता है। 500 मिग्रा लाल चित्रक के चूर्ण (chitrak churna)को शहद के साथ मिलाकर चाटने से नकसीर बन्द होती है।

चित्रक के उपयोगी भाग (Useful Parts of Chitrak in Hindi)

जड़

चित्रक के सेवन का तरीका (How to Use Chitrak?)

जड़ का चूर्ण – 1-2 ग्राम

चिकित्सक के परामर्शानुसार सेवन करें।

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चित्रक के नुकसान :Side Effects of Chitrak

  • अत्यधिक गर्म होने के कारण चित्रक का प्रयोग अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए।

  • लाल चित्रक गर्भ को गिराने वाला होता है इसलिए इसका प्रयोग गर्भवती स्त्रियों को नहीं करना चाहिए।

  • इसका अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से पक्षाघात यानी लकवा एवं मृत्यु भी हो सकती है।

चित्रक कहाँ पे पाया या उगाया जाता है (Where is Chitrak Found or Grown?)

 (Chitrak Plant) चित्रक की खेती पूरे भारत में की जाती है। यह भारत के सभी स्थानों विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र एवं दक्षिण भारत के पर्णपाती और पथरीले वनों में पाया जाता है। यह खाली भूमि पर पाया जाता है।

सफेद चित्रक (chitramoolam) विशेषतः पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, दक्षिण भारत तथा श्रीलंका में होता है।

लाल चित्रक खासिया पहाड़, सिक्किम, बिहार में अधिक मिलता है।

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