दूर्वादि घृत के फायदे , प्रयोग, खुराक और नुकसान | Duravadi Ghrita ke fayde

दूर्वादि घृत के फायदे , प्रयोग, खुराक और नुकसान | Duravadi Ghrita ke fayde | Duravadi Ghrita benefits,uses,dosage and disadvantages in hindi

यह दूर्वादि घृत एक आयुर्वेदिक दवा है जिसका उपयोग नकसीर फूटने ,प्रदर रोग के कारण ज्यादा रक्त स्राव,खूनी बवासीर व पित्त के प्रकोप जैसे रोगों के उपचार मे किया जाता है ।

दूर्वादि घृत के घटक द्रव्य :

  1. दूबा (दूर्वा) – 15 ग्राम।

  2. नीलोफर (नीलकमल) का केसर – 15 ग्राम।

  3. मजीठ – 15 ग्राम।

  4. एलवा – 15 ग्राम।

  5. छोटी हरड़ – 15 ग्राम।

  6. लोध – 15 ग्राम।

  7. खस – 15 ग्राम।

  8. नागरमोथा – 15 ग्राम।

  9. लालचन्दन – 15 ग्राम।

  10. पदमकाष्ठ (कमल की डण्डी) – 15 ग्राम।

दूर्वादि घृत बनाने की विधि :

सबको पानी में पीस कर लुगदी बना लें, इस लुगदी को एक किलो गोघृत में डाल कर चार लिटर दूध (बकरी का दूध लें) और चावल का धोवन चार लिटर इसमें डाल कर मन्दी आंच पर पकने के लिए रख दें, इसे तब तक पकाएं जब तक दूध और पानी जल न जाए। जब सिर्फ घी बचे तब उतार लें और कपड़े से निचोड़ कर छान लें तथा बनी में भर लें।

दूर्वादि घृत के फायदे और उपयोग : Duravadi Ghrita benefits and Uses (labh) in Hindi

बवासीर में दूर्वादि घृत के फायदे –

बवासीर में खन गिर रहा हो तो इस घी का एनीमा लगाने और इस घी का फाहा गदा में लगाने से आराम होता है।

 रक्त प्रदर रोग में लाभदायक –dcgyan

स्त्रियों को रक्त प्रदर रोग के कारण ज्यादा रक्त स्राव हो रहा हो तो इस घी का फाहा बना कर सोते समय यह फाहा योनि में अन्दर तक सरका कर रख लेना चाहिए ताकि रात भर अन्दर रखा रह सके। यदि रक्त स्राव के तेज़ प्रवाह के कारण फाहा बाहर निकल आये तो फिर से नया फाहा घी में डुबो कर अन्दर रख लेना चाहिए। इस प्रयोग से रक्त स्राव में कमी आती है।

 नाक से खून निकलने पर इसके लाभ –

नकसीर फूटने पर नाक से खून गिरने पर दो-दो बूंद घी नाक में टपकाना चाहिए।

रक्तपित्त मे लाभदायक –

सारे शरीर पर इस घृत को लगा कर मालिश करने से रक्तपित्त में जल्दी लाभ होता है,

पित्त शमन में इसके लाभ –

यह रक्तपित्त, अम्लपित्त और पित्त के प्रकोप का शमन करता है।

 अंग से रक्त स्राव होने पर इसका उपयोग –

शरीर के जिस अंग से रक्त स्राव हो रहा हो वहां इस घृत को लगाने से रक्त स्राव रुक जाता है।

 रक्तस्राव रोकने में उपयोगी –

यह दूर्वादि घृत अत्यन्त शीतल प्रकृति का होता है और रक्तपित्त, रक्तार्श (खूनी बवासीर), स्त्रियों के रक्त प्रदर तथा अत्यार्तव (Menorrhagia) आदि रोगों में होने वाले रक्तस्राव को शीघ्र रोकता है।

 पेशाब की जलन दूर करने वाला –

पेशाब करने में जलन होने पर भी स्त्रियों को योनि में यह फाहा रखना चाहिए। इस घी को बाह्य रूप से लगाने के साथ ही एकदो चम्मच घी दिन में तीन बार चाट कर या दूध के साथ सेवन करना चाहिए।

दूर्वादि घृत के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Duravadi Ghrita?)

   6 से 10 ग्राम, बराबर मिश्री मिलाकर, दिन में दो बार।

दूर्वादि घृत के सेवन का तरीका (How to Use Duravadi Ghrita?)

यह घृत उत्तम रक्तस्तम्भक है, मुख से रक्त आने पर इसे पीने को देना चाहिए, नाक से रक्त आने पर इसका नस्य देना चाहिए, कान या आँख से रक्त आने पर कान या आँख में डालना चाहिए तथा लिङ्ग, योनि अथवा गुदा से रक्त आने पर उत्तर बस्ति या अनुवासन बस्ति में इसका प्रयोग करना चाहिए।

रक्तपित्त रोग की यह प्रमुख औषध है, रक्तपित्त में उपद्रव स्वरूप होने वाले लक्षण जैसे प्यास लगना, शरीर में जलन, मुँह सूखना, चक्कर आना, ठण्डे पदार्थ खाने की इच्छा होना आदि में इसके प्रयोग से बहुत लाभ मिलता है साथ ही प्रवालपिष्टी, कहरवा पिष्टी, अशोकारिष्ट का भी सेवन करें तो शीघ्र ही लाभ मिलता है।

दूर्वादि घृत के नुकसान (Side Effects of Duravadi Ghrita):-

इस दूर्वादि घृत लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें

दूर्वादि घृत कैसे प्राप्त करें ? ( How to get Duravadi Ghrita)

यह योग इसी नाम से बना बनाया आयुर्वेदिक औषधि विक्रेता के यहां मिलता है।

कहाँ से खरीदें  :-  अमेज़ॉन,नायका,स्नैपडील,हेल्थ कार्ट,1mg Offers,Medlife Offers,Netmeds Promo Codes,Pharmeasy Offers,

ध्यान दें :- Dcgyan.com के इस लेख (आर्टिकल) में आपको दूर्वादि घृत के फायदे, प्रयोग, खुराक और नुकसान के विषय में जानकारी दी गई है,यह केवल जानकारी मात्र है | किसी व्यक्ति विशेष के उपयोग करने से पहले चिकित्सक से परामर्श करना आवश्यक है |

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