महिला में पीसीओएस(pcod) डिसऑर्डर क्या हैं ? || पीसीओएस के लक्षण और इलाज

  महिला में पीसीओएस(pcod) डिसऑर्डर क्या हैं ?

क्या आप जानते हैं पीसीओएस के बारे में?  नहीं; तो आईये जानें ,पीसीओएस क्या है ?  इसके खतरे और समाधान भी…   पीसीओएस यानी ‘पोलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम’। पीसीओएस हार्मोन सम्बंधित एक समस्या है | जिसमें महिला में स्त्री यौन हार्मोन का असंतुलन हो जाता है |  जिससे महिला को कई प्रकार के लक्षण उत्पन्न होते हैं।  चेहरे पर बाल उग आना, बार-बार मुहांसे होना, पिगमैंटेशन, अनियमित रूप से पीरियड्स का होना और गर्भधारण में मुश्किल होना है।

pcod Video 

पी सी ओ एस  प्रजनन योग्य महिलाओं जिनकी उम्र 12-45 वर्ष की किसी भी स्त्री को हो सकता है। हर महीने महिलाओं की दाईं और बाईं ओवरी में पीरियड्स के बाद दूसरे दिन से अंडे बनने शुरू हो जाते हैं। ये अंडे 14-15 दिनों में पूरी तरह से बन कर 18-19 मिलीमीटर साइज के हो जाते हैं। इस के बाद अंडे फूट कर खुद फेलोपियन ट्यूब्स में चले जाते हैं और अंडे फूटने के 14वें दिन महिला को पीरियड्स शुरू हो जाता है। लेकिन कुछ महिलाओं, जिन्हें पीसीओएस की समस्या है, उनमें अंडे तो बनते हैं पर फूट नहीं पाते जिस की वजह से उन्हें पीरियड्स नहीं आता।

ऐसी महिलाओं को 2 से 3 महीनों तक पीरियड्स नहीं आने की शिकायत रहती है। ऐसे हालात में फूटे अंडे ओवरी में ही रहते हैं और एक के बाद एक उन से सिस्ट बनती चली जाती हैं। लगातार सिस्ट बनते रहने से ओवरी भारी लगनी शुरू हो जाती है। इसी ओवरी को पोलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम(पीसीओएस) कहते हैं।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं अपने स्वास्थ्य की अनदेखी कर देती हैं, जिसका खमियाजा उन्हें बाद में भुगतना पड़ता है। लड़कियों को पीरियड्स शुरू होने के बाद अपने स्वास्थ्य पर खासतौर से ध्यान देने की आवश्यकता होती है। उचित ज्ञान न होने व पूर्ण चिकित्सकीय जांच न होने की वजह से महिलाएं इस समस्या से जूझ रही हैं। 

पीसीओएस स्टडी के मुताबिक, हर 10 में एक औरत को ये सिंड्रोम होता है। इन 10 में से 6 टीनएज लड़कियां होती हैं। एम्स के डिपार्टमेंट ऑफ एंडोक्रॉइनॉल्जी एंड मेटाबॉलिज्म की स्टडी के मुताबिक, “बच्चा पैदा करने की उम्र वाली 20 से 25 % औरतों में पीसीओएस के लक्षण पाए गए। पीसीओएस झेल रही 60% औरतें मोटापे का शिकार हैं और 30 से 40 % औरतें फैटी लिवर से पीड़ित हैं। 70 % औरतों का ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है। 60 से 70 % में एस्ट्रोजन का स्तर ज्यादा है।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने देश भर में पी सीओ एस को लेकर सर्वे कराया। जिसमें पाया गया कि ये समस्या औरतों में और बढ़ रही है।” पीसीओएस का बढ़ने कारण इसकी जानकारी का न होना है। डॉक्टरों के पास जाने में शर्म या गुप्त अंगों के रोगों को लेकर लोग इतने संवेदनशील हैं, कि आपस में ज़िक्र तक नहीं करते। पर अब ज़रुरत है कि हम शर्म छोड़ कर खुल कर बात करें और अपने से जुड़ी हर बदलाव को समझे और कुछ भी अगल या परेशानी होने पर डॉक्टरों की सलाह लें।

सिर्फ डॉक्टरों ही क्यूं न हम आपस में इसकी जानकारी रखें और आपस में शेयर करें। ताकि अब कोई भी स्त्री ज्ञान के अभाव में इस परेशानी को न सहे। खुद को जांचे, खुद को समझे क्योंकि यह सिर्फ आपका शरीर नहीं, आपका मंदिर है।
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पीसीओएस के लक्षण क्या है?

  1. प्रजनन की योग्यता में कमी,

  2. अनियमित मासिक चक्र,

  3. अत्यधिक मुहांसे,

  4. पेट दर्द,

  5. पिगमेंटेशन,

  6. यौन इच्छा में कमी,

  7. बार-बार गर्भपात,

  8. सिर के बाल झड़ना,

  9. चेहरे के बाल,

  10. मोटापा,

  11. इन्सुलिन प्रतिरोध

  12. और उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर- ये सब पीसीओएस के लक्षण हैं।

  13. अल्ट्रासाउंड किये जाने पर अंडग्रंथियों में कई थैलीनुमा रचनाओं का मिलना सबसे आम लक्षण है।

किन करणों से पीसीओएस (pcos) होता है?

पीसीओडी की मुख्य करणों में होता है इन्सुलिन प्रतिरोध और अनुवांशिक रूप से माता या पिता द्वारा भी आ जाता है। पीसीओएस होने के कुछ करणों में जीवन शैली का बड़ा योगदान माना जा रहा है। भागदौड़ वाली जीवनशैली, अनियमत खान पान, एक्सरसाइज न करना, ज्यादा जंक फूड का सेवन जिससे मोटापा बढ़ता है। मोटपा बढ़ने से फेट एसिड की मात्रा बढ़ती है। मोटापा बढ़ने से शरीर में मेल हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है।

(pcos) पीसीओएस  कितना खतरनाक है?

काफी खतरनाक है,  क्योंकि यदि इसे समय से कंट्रोल नहीं किया गया है तो भविष्य में काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।  पीसीओएस से प्रभावित स्त्रियों में डायबिटीज, मेटाबोलिज्म में असंतुलन, बांझपन, उच्च रक्तचाप और हृदय से जुड़े रोगों के होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

क्या यह सच है? कि लड़कों के कपड़े पहनने से भी पीसीओडी (pcod) होता है।

नहीं , यह सच नहीं है  यह एक गलत भ्रांति है । पीसीओडी (pcod) का लड़कों के कपड़े पहनने से कोई मतलब नहीं है।  पीसीओएस(pcos) के बारे में सही जानकारी न होने के कारण ऐसी अफवाहों को बढ़ावा मिलता है।

पीसीओएस(pcos)को कंट्रोल करने के लिए क्या करना चाहिए?

लाइफस्टाइल में बदलाव लाएं। रेगुलर एक्सरसाइज और एक्सरसाइज़ को अपनी जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाएं। अपने खान-पान का ख्याल रखें और नियमित आहार लें। अधिक मात्रा में पानी पिएं और फल और सब्जियां खूब खाएं। ज्यादा मुंहासे, अनियमित पीरियड्स, एक दम से वजन के बढ़ना, शरीर पर अनचाहें बालों के बढ़ना, इन सभी लक्षणों को देखते ही डॉक्टर से सम्पर्क करें। धन्यवाद , आपको यह जानकारी पसन्द आयी है तो लाइक करें और अपने दोस्तों के साथ शेयर करें |
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