प्रमेह गज केसरी वटी के फायदे , प्रयोग, खुराक और नुकसान | Prameha Gaj Kesari Vati ke fayde

प्रमेह गज केसरी वटी के फायदे , प्रयोग, खुराक और नुकसान | Prameha Gaj Kesari Vati ke fayde | Prameha Gaj Kesari Vati benefits,uses,dosage and disadvantages in hindi

मधुमेह (डायबिटीज़) जो प्रमेह रोग का ही एक रूप है। इस रोग को दूर करने में आयुर्वेदिक योग ‘प्रमेह गज केसरी वटी’ सफल सिद्ध हुआ है। रस तन्त्रसार व सिद्ध प्रयोग संग्रह’ तथा ‘आयुर्वेद सार संग्रह’ नामक सुप्रसिद्ध आयुर्वेदिक ग्रन्थों में इस योग की बहुत प्रशंसा की गई है। वैद्य जगत भी इस योग को गुणकारी और विश्वसनीय मानता है और नि:शंक हो कर प्रयोग करता है। प्रमेह गज केसरी वटी(Prameha Gaj Kesari Vati) मधुमेह को नियन्त्रित करने में सफल सिद्ध होने वाला निरापद योग है।

प्रमेह गज केसरी वटी के घटक द्रव्य :

1.लोह भस्म – 10 ग्राम,

2.नाग भस्म – 10 ग्राम,

3.बंग भस्म – 10 ग्राम,

4.अभ्रक भस्म – 40 ग्राम,

5.शुद्ध शिलाजीत – 50 ग्राम,

6.गोखरू – 60 ग्राम,

प्रमेह गज केसरी वटी बनाने की विधि :

सब द्रव्यों को खरल में डाल कर नींबू का रस डाल कर खूब अच्छी तरह से घुटाई करके सब द्रव्यों को खूब अच्छे से मिला (एक जान कर) लें और 250-250 मिली ग्राम की गोलियां बना कर छाया में सुखा कर शीशी में भर लें ।

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प्रमेह गज केसरी वटी के फायदे और उपयोग : Prameha Gaj Kesari Vati benefits and Uses (labh) in Hindi

1.इक्षुमेह (Glycosuria) और उदक मेह (Diabetes Insipidus) नामक प्रमेह रोग उत्पन्न करने का कारण होता है अग्न्याशय का विकृत होना। अग्न्याशय से उत्पन्न होने वाले आग्नेय रस (Insulin) के निर्माण में कमी होने का यह परिणाम होता है कि शर्करा के पाचन में कमी होने लगती है जिससे रक्त में शर्करा (Sugar) की मात्रा बढ़ने लगती है। अग्न्याशय की विकृति और रक्त में शर्करा बढ़ने के दोष को दूर करने में प्रमेह गज केसरी योग गुणकारी सिद्ध होता है।

2. इसके सेवन से अग्न्याशय (Pancreas) को बल मिलता है और अग्न्याशय सक्रिय हो कर रक्त शर्करा को नियन्त्रित करता है।madhumeh,diabetes,

 3.मधुमेह रोग में रक्त शर्करा पर नियन्त्रण होता है।

4.इस योग को सेवन करने से प्रमेह, मधुमेह, पेशाब में रुकावट और दाह आदि व्याधियां दूर होती हैं।

 
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प्रमेह गज केसरी वटी के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Prameha Gaj Kesari Vati?)

सुबह शाम 1-1 गोली

प्रमेह गज केसरी वटी के सेवन का तरीका (How to Use Prameha Gaj Kesari Vati?)

सुबह शाम 1-1 गोली खाली पेट पानी के साथ लेना चाहिए। गुड़मार का काढ़ा बना कर, इस काढ़े के साथ सेवन करने से शीघ्र लाभ होता है।

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प्रमेह गज केसरी वटी कैसे प्राप्त करें ? ( How to get Prameha Gaj Kesari Vati)

यह योग इसी नाम से बना बनाया आयुर्वेदिक औषधि विक्रेता के यहां मिलता है।

कहाँ से खरीदें  :-  अमेज़ॉन,नायका,स्नैपडील,हेल्थ कार्ट,1mg Offers,Medlife Offers,Netmeds Promo Codes,Pharmeasy Offers,

ध्यान दें :- Dcgyan.com के इस लेख (आर्टिकल) में आपको प्रमेह गज केसरी वटी के फायदे, प्रयोग, खुराक और नुकसान के विषय में जानकारी दी गई है,यह केवल जानकारी मात्र है | किसी व्यक्ति विशेष के उपयोग करने से पहले चिकित्सक से परामर्श करना आवश्यक है |

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