शतावरी चूर्ण  के फायदे , प्रयोग, खुराक और नुकसान | Shatavari Churna ke fayde

शतावरी चूर्ण  के फायदे , प्रयोग, खुराक और नुकसान | Shatavari Churna ke fayde | Shatavari Churna  benefits,uses,dosage and disadvantages in hindi

Shatavari  (शतावरी) एक प्राकृतिक वरदान है। शतावरी में प्रोटीन्स, म्युसीलेज, प्लुरोनिक एसिड, हेमिसेल्युलोज आदि होते हैं। शतावरी विटामिन के, विटामिन बी 1, विटामिन ई और फोलिक एसिड का बहुत अच्छा स्रोत है। इसमें एंटी ऑक्सिडंट तथा जीवाणुविरोधी होने के गुण पाए जाते हैं। साथ ही फोलेट, लोह, तांबा, कैल्शियम, प्रोटीन और फाइबर से भरा होता है।

शुतमूल या शतावरी(shatavari) बहुत सी बीमारियों का इलाज करने के लिए जाना जाता है। ऐस्परैगस रसमोसूस जाति की यह जड़ी बूटी औरतों के लिए चमत्कारी मानी जाती है। यह औरतों को यौवन से लेकर मध्य आयु, फिर बुजुर्ग होने तक यहां तक कि रजोनिवृत्ति होने तक जीवन के प्राकृतिक चरणों में समर्थन देती है। केवल औरतों के लिए ही नही आदमियों के स्वास्थ्य पर भी इसके आश्चर्यजनक प्रभाव देखे जा सकते हैं।

शतावरी चूर्ण  के गुणधर्म (SHATAVARI CHURNA  KE GUN IN HINDI)

शुतमूल या शतावरी मधुर, स्वादिष्ट, शीत, वृष्य, सिंग्ध, कड़वी, रसायनी, दुग्धप्रद, अग्निदीपक, बलकर, मेदकारक, शुक्रवृद्धीकर, चक्षुल, पुष्टिकर हैं |शतावरी का प्रयोग पुरातन युग से आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है। यह एक ऐसी महत्वपूर्ण वनस्पति है, जिसका उपयोग हर एक औषधि में किया जाता है।

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शतावरी चूर्ण  के फायदे और उपयोग : Shatavari Churna  benefits and Uses (labh) in Hindi

रजोनिवृति के समय मदद करना :– शतावरी चूर्ण(Shatavari Churna) सर्वोत्तम ऊर्जा देता है और अपने शीतल स्वभाव के कारण रजोनिवृति के समय होने वाली समस्याओं जैसे गर्मी की लहरें, रात को पसीना आना, यादाश्त कम होना और चिंता को भी संतुलन में ले आता है। जो हार्मोन पहले से ही संतुलित होते हैं उनका भी यह पक्ष लेता है।

स्वस्थ प्रजनन प्रणाली को बढ़ावा देना :– शतावरी चूर्ण( Shatavari Churna)प्राकृतिक रूप से फाइटो-एस्ट्रोजन नामक हार्मोन होते हैं जोकि महिलाओं की स्वस्थ प्रजनन प्रणाली के लिए जिम्मेदार होते हैं। यह गर्भाशय को तो मजबूत करता ही है साथ ही बच्चा होने के बाद स्वास्थ्य लाभ और स्तनों में दूध के स्तर को भी स्वस्थ बनाता है।dcgyan

योनि के स्वास्थ्य में सुधार :– योनि के संक्रमण का कारण बनने वाले कैंडिडा बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए भी शतावरी चूर्ण(Shatavari Churna) जाना जाता है। जब लगातार इसका प्रयोग किया जाए तो यह पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम के इलाज़ में भी काम आता है।dcgyan

प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन :– शतावरी चूर्ण(Shatavari Churna) हर स्थिति में शरीर के प्रतिरोध को बढ़ावा देता है चाहे वह सामान्य हो या फिर प्रतिरक्षा को दबाने की स्थिति हो जिसकी वजह से प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा भी मिलता है और स्वस्थ भी होती है।

प्राकृतिक एन्टी ऑक्सीडेंट गुण :– मुक्त कणों को कम करना और अल्सर को बनने से रोकना जोकि गैस्ट्रिक क्षेत्र के अंदर की परत में होता है, शतावरी के खास गुणों में से एक है।

पाचन तंत्र और आंतों के स्वास्थ्य का ध्यान :– शतावरी एक ऐसी श्रेष्ठ जड़ी बूटी है जो आंतों को साफ करती है और पाचन एंजाइमों की सक्रियता पर भी प्रभाव डालती है।

पुरुषों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद :– महिलाओं की प्रजनन प्रणाली के साथ साथ यह पुरुष प्रजनन प्रणाली के लिए भी लाभदायक है। शतावरी के प्रयोग से पुरुषों के प्रजनन तरल पदार्थ बढ़ते हैं, स्वस्थ शुक्राणुयों का विकास होता है और पौरुष बढ़ता है। यह पुरुषों की सूजन और यौन समस्याओं का हल है।

सौंदर्य और कांति बढ़ाने में मददगार शतावरी :– शतावरी अनेक सौंदर्य साधनों में उपयोग किया जाता है। महिलाओं की बहुत सी बीमारियों में तथा वज़न बढ़ाने के लिए, शरीर को बलवान बनाने के लिए और त्वचा की कांति सुधारने के लिए शतावरी का प्रयोग फायदेमंद होता है।dcgyan

नेत्र ज्योति बढ़ाने में लाभदायक शतावरी चूर्ण :– शारीरिक कार्यक्षमता सुधारने के लिए, आँखों की दृष्टि सुधारने के लिए गर्भ की वृद्धि के लिए, कमरदर्द एवं अल्सर की बीमारी में शतावरी उपयुक्त होती है।

बलवर्धक शतावरी चूर्ण :– प्रसूति पश्चात माता तथा बालक की शक्ति बढ़ाने के लिए, माता की दुग्ध ग्रंथियों के विकास हेतु तथा गर्भाशय की बीमारियाँ, प्रदररोग, पथरी आदि में शतावरी चूर्ण बहुत लाभप्रद होता है।

जोड़ों का दर्द मिटाए शतावरी :– शतावरी का तेल अर्धांग वायु, जोड़ों के दर्द तथा सामान्य मालिश के लिए किया जाता है।

बढ़ते बच्चों के लिए फायदेमंद शतावरी :– बढ़ते बच्चों का वज़न बढ़ाने के लिए, शरीर को बलवान बनाने के लिए, ऊँचाई तथा आँखों की रोशनी बढ़ाने के लिए शतावरी कारगर काम करती है।

गर्भपात से रक्षा करे शतावरी चूर्ण :– शतावरी में ऐंटी ऑक्सिडंट सॅपोनिन्स (Anti oxidant saponins) पाया जाता है जो खास तौर पर गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय के संकुचन को रोकता है तथा गर्भाशय की मांसपेशियों (muscles) को आराम पहुँचाता है, जिसकी वजह से गर्भपात को रोकने तथा समय से पूर्व होनेवाले प्रसव को रोकने में मदद मिलती है।

शतावरी चूर्ण का नियमित सेवन खून की कमी करे दूर :– शतावरी चूर्ण के नियमित सेवन से महिलाओं में खून की कमी (रक्तहीनता) दूर होती है ।

माँ का दूध बढ़ाने में शतावरी चूर्ण के लाभ :– शतावरी चूर्ण शिशु को स्तनपान करानेवाली माताओं में स्तन दूध की मात्रा में वृद्धि करने में मदद करता है।

माहवारी को नियमित करने में शतावरी चूर्ण फायदेमंद :– शतावरी में पाए जानेवाले मुख्य घटकों में से स्टेरॉयडल सैपोनीन यह घटक एस्ट्रोजन को नियंत्रित करने के लिए जाना जाता है। जिससे माहवारी नियमित होती है। जिन महिलाओं को हमेशा ही अनियमित माहवारी का सामना करना पड़ता है, उन्हें नियमित शतावरी का सेवन करना चाहिए।

वज़न कम करे शतावरी चूर्ण :– महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान अतिरिक्त पानी की वजह से जो वज़न बढ़ता है शतावरी चूर्ण उसे कम करता है।

तनाव दूर करने में मददगार शतावरी :– शतावरी चूर्ण का सेवन मानसिक तनाव और डिप्रेशन को दूर करता है और अनिद्रा से छुटकारा दिलाता है।

गले की खराश दूर करे शतावरी :– शतावरी खाँसी और गले में खराश को दूर करने में सहायक है।

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शतावरी चूर्ण  के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Shatavari Churna ?)

शुरू में एक चौथाई से आधा चम्मच ही लेने की सकह दी जाती है। इसको एक गिलास गर्म दूध में शहद या चीनी मिलाकर लिया जा सकता है। फिर इसकी मात्रा बढ़ाकर आधा से दो चम्मच यानी 3 से 10 ग्राम की जा सकती है। चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है।

शतावरी चूर्ण  के सेवन का तरीका (How to Use Shatavari Churna ?)

इस जड़ी बूटी को लेने का सर्वोत्तम तरीका चूर्ण रूप में है क्योंकि इस जड़ी को जीभ पर रखने से पाचन क्रिया आरम्भ होती है और शरीर को इस प्रक्रिया को शुरू करने के सिग्नल मिलने लगते हैं। इसको गोली के रूप में भी ले सकते हैं और तरल रूप में भी। गुड़ में मिलाकर जैम भी बनाया जा सकता है और घी में मिलाकर भी लिया जा सकता है।

इसके विभिन्न घरेलू प्रयोगों को अपनाकर हम अपना स्वास्थ्य अच्छा रख सकते हैं।

1.रोज़ाना रात को सोने से पहले 1 चम्मच चूर्ण 1 कप दूध में लेने से वात, कफ तथा पेट की बीमारियाँ दूर होने में मदद होती है।

2.रोज 1 चम्मच शतावरी चूर्ण को 1 कप दूध में लेने से महिलाएं अपना स्वास्थ्य पा सकती हैं। इसके नियमित सेवन से गर्भ की बीमारियों में, कमज़ोरी में मदद मिलती है।

3.शतावरी का 5 से 10 ग्राम चूर्ण, 10-15 ग्राम घी तथा दूध में डालकर लेने से नींद न आने की समस्या समाप्त हो जाती है।

4.ज्वर होने पर शतावरी चूर्ण और गिलोय का रस गुड़ में मिलाकर लेने से फायदा होता है।

5.माइग्रेन जैसे सिरदर्द के लिए शतावरी बहुत कारगर औषधि है। शतावरी को कूटकर रस निकाल लें, बराबर हिस्सों में शतावरी का रस और तिल का तेल मिलाकर सिर पर मालिश करने से सिरदर्द बंद हो जाता है।

शुतमूल या शतावरी के सेवन से अल्सर जैसी बीमारी में फायदा होता है। डायबिटीज़ के मरीज को शतावरी की मूलियाँ चबाकर खाने से लाभ मिलता है। मगर आजकल मूलियाँ बाजार में नहीं मिलती हैं इसलिए इसके चूर्ण को रोज 1 चम्मच पानी के साथ लेने से भी लाभ मिलता है। जितना लाभ मूलियाँ चबाने से मिलता है उतना ही लाभ चूर्ण से भी मिलता है। इसलिए ‘शतावरी खाओ और शतायुषी हो जाओ।’

 
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शतावरी चूर्ण के नुकसान (Side Effects of Shatavari Churna):-

शुतमूल या शतावरी चूर्ण  के कोई ज्ञात दुष्प्रभाव नहीं हैं फिर भी इसे आजमाने से पहले अपने चिकित्सक या सम्बंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से राय अवश्य ले ।

शतावरी चूर्ण  कैसे प्राप्त करें ? ( How to get Shatavari Churna )

यह “ शतावरी चूर्ण ” इसी नाम से बना हुआ बाज़ार में मिलता है।

कहाँ से खरीदें  :-  अमेज़ॉन,नायका,स्नैपडील,हेल्थ कार्ट,1mg Offers,Medlife Offers,Netmeds Promo Codes,Pharmeasy Offers,

ध्यान दें :-

 Dcgyan.com के इस लेख (आर्टिकल) में आपको शतावरी चूर्ण  के फायदे, प्रयोग, खुराक और नुकसान के विषय में जानकारी दी गई है,यह केवल जानकारी मात्र है | किसी व्यक्ति विशेष के उपयोग करने से पहले चिकित्सक से परामर्श करना आवश्यक है |

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