शुक्रमातृका वटी के फायदे , प्रयोग, खुराक और नुकसान | Shukramatrika Vati ke fayde

शुक्रमातृका वटी के फायदे , प्रयोग, खुराक और नुकसान | Shukramatrika Vati ke fayde | Shukramatrika Vati benefits,uses,dosage and disadvantages in hindi

शुक्रमातृका वटी टैबलेट के रूप में उपलब्ध एक आयुर्वेदिक दवा है। शुक्रमातृका वटी भैषज्य रत्नावली का आयुर्वेदिक योग है जो किडनी और वीर्य वाहिनी नाड़ियों पर असर करती है

वात, पित्त, कफ, द्वन्द्व दोष एवं त्रिदोष जन्य कारणों से होने वाला २० प्रकार का प्रमेह, मूत्रकृच्छ, अश्मरी आदि रोगों को नष्ट कर, शारीरिक बल एवं वर्ण को बढ़ाने वाली, अग्नि प्रदीप्त करने वाली, ज्वर दोष नष्ट करने वाली और पण्डित चन्द्रनाथ द्वारा बनाई गई इस वटी को शुक्रमातृकावटी कहते हैं।यह योग इसी नाम से विभिन्न आयुर्वेदिक औषधि निर्माता कम्पनियों द्वारा बनाया हुआ बाज़ार में मिलता है।

जो नुस्खे को स्वयं बनाने में सक्षम हों एवं रुचि रखते हों उनकी जानकारी एवं उपयोग के लिए इस योग के घटक-द्रव्यों एवं निर्माण विधि का विवरण प्रस्तुत किया जा रहा है।

शुक्रमातृका वटी के घटक द्रव्य :- Shukramatrika Vati Ingredients in Hindi

  1. शुद्ध पारा – 40 ग्राम

  2. शुद्ध गन्धक – 40 ग्राम

  3. अभ्रक भस्म – 40 ग्राम

  4. लोहभस्म – 40 ग्राम

  5. छोटी इलायची के दाने – 20 ग्राम

  6. गोखरू – 20 ग्राम

  7. हरड़ – 20 ग्राम

  8. बहेड़ा – 20 ग्राम

  9. आंवला – 20 ग्राम

  10. तेजपात – 20 ग्राम

  11. रसौत – 20 ग्राम

  12. धनियां – 20 ग्राम

  13. चव्य – 20 ग्राम

  14. जीरा – 20 ग्राम

  15. तालीस पत्र – 20 ग्राम

  16. सोहागे का फूला – 20 ग्राम

  17. मीठे अनार के दाने – 20 ग्राम

  18. शुद्ध गुग्गुलु – 10 ग्राम

शुक्रमातृका वटी बनाने की विधि :-

पहले पारा और गन्धक को खरल में डाल कर, घोंटते हुए कज्जली बना लें। शेष सब द्रव्यों को अलग-अलग कूट पीस छान कर महीन चूर्ण कर लें। अब सभी द्रव्यों को एक में मिला कर खरल करते हुए अनार के रस या गोखरू के काढ़े को मिलाते रहें ताकिगोली बांधी जा सके। १२ घण्टे तक खरल में घुटाई करके २-२ रत्ती की गोलियां बना लें। एक ग्राम चूर्ण की ४ गोली बनेंगी।

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शुक्रमातृका वटी के फायदे और उपयोग : Shukramatrika Vati benefits and Uses (labh) in Hindi

शुक्रमातृका वटी मुख्य रूप से पुरुषों के वीर्यदोष एवं प्रमेह रोग की एक सफल औषधि है । इस औषधि का सेवन करने से पुरुषों की खोई हुई शक्ति वापस प्राप्त होती हैं । यह औषधि वीर्यदोष के अतिरिक्त पाचन तंत्र पर भी अपना बहुत अच्छा प्रभाव डालती है । उसका कारण यह है कि, इस औषधि में हरड़, बहेड़ा, आंवला सहित धनिया, जीरा एवं अन्य बहुत सी जड़ी बूटियां मौजूद होती हैं जो हमारे पाचन तंत्र के लिए लाभदायक होती है ।

यह औषधि जठराग्नि प्रदीप्त करती है, शरीर में रहने वाले मंद मंद ज्वर को नष्ट करती है तथा पुरुष को बिल्कुल निरोगी बना देती है । यह औषधि वीर्य को गाढ़ा करती है तथा वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या और उनकी क्वालिटी को भी बेहतर करती हैं । यह औषधि वीर्य वाहिनी नाड़ियों एवं गुर्दे पर सकारात्मक प्रभाव दिखाती है ।

 नपुंसकता में शुक्रमातृका वटी के फायदे –

यह औषधि वीर्य को गाढ़ा करती है । अत्यधिक कामुक आचरण करने, भोगविलास में अति करने, यौन-कुरीतियों द्वारा अपनी शक्ति नष्ट करने के परिणाम स्वरूप उत्पन्न हुई नपुंसकता को दूर करने के लिए इस योग का प्रयोग ‘कामचूड़ामणि रस’ की १-१ गोली के साथ लाभन होने तक करना चाहिए।

शीघ्रपतन में शुक्रमातृका वटी के लाभ –

जरा सी कामोत्तेजना होने पर, कामोत्तेजक साहित्य पढ़ने या दृश्य देखने पर अथवा रति क्रिया में प्रवृत्त होने पर जिनका तुरन्त वीर्यपात हो जाता हो उनको इस योग के साथ ‘वीर्यशोधन वटी’ या ‘कामचूड़ामणि रस’ की १-१ गोली सुबह शाम पूर्ण लाभ न होने तक सेवन करना चाहिए।

स्वप्न दोष में शुक्रमातृका वटी के फायदे –

जिन युवकों को स्वप्नदोष होता हो वे कामुक विचारों का त्याग रख, सुबह शाम दोनों समय शौच जाने का नियम पालन कर, पेट साफ़ रख कर इस योग के साथ चन्द्रप्रभा वटी १-१ गोली सुबह शाम सेवन करें तो इस योगसे निश्चित रूप से मुक्त हो जाएंगे।

मूत्र संक्रमण में लाभकारी शुक्रमातृका वटी

यह औषधि मूत्र संस्थान एवं गुर्दों से संबंधित संक्रमण को भी दूर करती है । यदि गुर्दे में या मूत्र मार्ग (यूरिन पाइप) में पथरी हो तो उस स्थिति में यह औषधि लाभकारी सिद्ध होती है । इस औषधि का विशेष प्रभाव वात वाहिनी नाड़ियों एवं मूत्र संस्थान पर पड़ता है।। यह इन अंगों की कमजोरी को दूर कर इन्हें ताकत प्रदान करती है ।

हिमोग्लोबिन में –  यह रक्त में हिमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाती है तथा रक्त कणिकाओं की संख्या में वृद्धि करती है ।khoon nali

प्रमेह रोग में –  यह वात एवं पित्त के कारण उत्पन्न होने वाले प्रमेह रोग को दूर करने में मददगार होती है ।

तनाव में –  यह मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव डालती है जिससे व्यक्ति का मनोबल बढ़ता है, तनाव दूर होता है तथा रात को नींद भी अच्छी आती है ।

 पेशाब की जलन में –  यह औषधि मूत्र मार्ग के इन्फेक्शन जैसे पेशाब की जलन आदि में बहुत अच्छा लाभ पहुंचाती हैं ।

 
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शुक्रमातृका वटी के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Shukramatrika Vati?)

एक-एक गोली सुबह एवं शाम

शुक्रमातृका वटी के सेवन का तरीका (How to Use Shukramatrika Vati?)

इस औषधि की एक-एक गोली सुबह एवं शाम को भोजन के पश्चात अनार के रस, बकरी के दूध या पानी के साथ ले सकते हैं ।

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शुक्रमातृका वटी के नुकसान (Side Effects of Shukramatrika Vati):-

1.शीघ्र लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से इस योग को अधिक मात्रा में लेना हानिकारक होगा अत: बताई गई मात्रा से अधिक मात्रा का प्रयोग न करें। कुछ दिन सेवन करके छोड़ देना भी ठीक नहीं।

2.इस औषधि को योग्य चिकित्सक की सलाह एवं देखरेख में ही लेना चाहिए । सेक्स संबंधी समस्याओं में इस औषधि का सेवन करते समय खानपान एवं आहार-विहार का विशेष ध्यान रखना परम आवश्यक है अन्यथा इस औषधि का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाएगा । रोगी को सेक्सी एवं गंदे विचारों से दूर रहना चाहिए, अश्लील किताबें पढ़ना या अश्लील वीडियो देखना नहीं चाहिए । यदि कब्ज की समस्या हो तो पंचसकार चूर्ण या त्रिफला चूर्ण का सेवन किया जा सकता है ।

शुक्रमातृका वटी कैसे प्राप्त करें ? ( How to get Shukramatrika Vati)

यह योग इसी नाम से बना बनाया आयुर्वेदिक औषधि विक्रेता के यहां मिलता है।

कहाँ से खरीदें  :-  अमेज़ॉन,नायका,स्नैपडील,हेल्थ कार्ट,1mg Offers,Medlife Offers,Netmeds Promo Codes,Pharmeasy Offers,

ध्यान दें :- Dcgyan.com के इस लेख (आर्टिकल) में आपको शुक्रमातृका वटी के फायदे, प्रयोग, खुराक और नुकसान के विषय में जानकारी दी गई है,यह केवल जानकारी मात्र है | किसी व्यक्ति विशेष के उपयोग करने से पहले चिकित्सक से परामर्श करना आवश्यक है |

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