TDS In Hindi टीडीएस क्या है

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TDS In Hindi टीडीएस क्या है

TDS In hindi टीडीएस क्या है और आपको टैक्स-सेविंग सबूत जमा करने की आवश्यकता क्यों है, यहाँ हम बात करेंगे सैलरी पर कटने वाले TDS की, समझेंगे टीडीएस क्या है, टीडीएस की गणना कैसे की जाती है और आपको टैक्स-सेविंग सबूत जमा करने की आवश्यकता क्यों है। कैसे बचें टीडीएस के सैलरी में से कटने से और कब और कैसे जमा करवाएँ अपने एम्प्लॉअर को टैक्स-सेविंग सबूत यह सब हिंदी में जानने और समझने की कोशिश करते हैं।

 TDS In Hindi टीडीएस क्या है

चालू वित्त वर्ष के समाप्त होने के कुछ महीनों पहले आपकी कंपनी के अकाउंट्स डिपार्टमेंट यानी लेखा विभाग या HR डिपार्टमेंट ने आपको अतिरिक्त TDS का भुगतान करने से बचने के लिए अपने कर बचत प्रमाण प्रस्तुत करने के लिए कहा होगा।

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TDS In hindi टीडीएस क्या है और टीडीएस को समझना

TDS यानी Tax Deducted at Source का मतलब है स्रोत पर कर कटौती, जैसा कि नाम से स्पष्ट है, TDS का उद्देश्य आय के स्रोत पर राजस्व संग्रह करना है। यह अनिवार्य रूप से कर एकत्रित करने का एक तरीका है जिससे जैसे जैसे आप वेतन अर्जित करते हैं वैसे वैसे आप कर देते है और वैसे ही प्रति माह आपका एम्प्लॉअर TDS को सरकार के खाते में जमा करवा देता है जैसे ही वेतन को अर्जित किया जा रहा है।

आयकर अधिनियम के अनुसार वेतन द्वारा अर्जित आय टीडीएस के अधीन होती है। इसका मतलब है कि वेतन के भुगतानकर्ता (यानी नियोक्ता) भुगतान के समय वेतन पर कर कटौती करने के लिए कानून द्वारा बंधे होते हैं और कटौती के बाद कर को सीधे सरकार को भुगतान करते हैं। नतीजतन, एक वित्तीय वर्ष की शुरुआत के बाद से, आपकी कंपनी के लेखा विभाग आपके अनुमानित कर योग्य आय के आधार पर आपके वेतन पर करों की गणना करने का काम  शुरू कर देते हैं।

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टीडीएस की गणना कैसे की जाती है

 

आपकी अनुमानित कर योग्य आय वित्तीय वर्ष के दौरान दी जाने वाली प्रस्तावित कुल सकल आय से कर-बचत कटौती घटाकर जो राशि बचेगी उस के बराबर होगी। यदि कोई प्रस्तावित टैक्स-सेविंग निवेश घोषित नहीं किया जाता है तो पूर्ण वेतन पर टीडीएस काटा जाता है।

 

दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करना

 

इसलिए, वित्तीय वर्ष के दौरान, आपने कोई कर बचत निवेश किया है या कोई व्यय है जो आयकर अधिनियम के अनुसार सकल कुल आय से कटौती के लिए अर्हता प्राप्त करता है, तो आपको अपने नियोक्ता को ऐसे निवेश / व्यय के दस्तावेजी सबूत प्रस्तुत करने होंगे ।

एक बार वास्तविक सबूत जमा हो जाने के बाद, खाता विभाग आपके द्वारा किए गए वास्तविक निवेश के प्रमाणों के आधार पर करों की गणना करेगा, जो आपके वेतन से अतिरिक्त कर की कटौती से आपको बचाएगा।

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कर बचत की योजना बनाने में बहुत देर नहीं हुई है

 

वित्तीय वर्ष की शुरुआत में यानी अप्रेल से जून के मध्य आपका एम्प्लॉअर आपसे एक अंडर्टेकिंग ले सकता है जिसमें आप बताते हैं की चालू वित्त वर्ष में आप आई-टी अधिनियम के अनुसार धारा 80 सी में बताई गयी योजनाओं में कितना निवेश करेंगे। इसी प्रकार वित्त वर्ष के अंत आते आते यानी जनवरी महीने के आस पास वास्तविक निवेश या व्यय का प्रमाण प्रस्तुत करना होता है। टैक्स सेविंग निवेश करने से आप अपने टैक्स आउटगो को कम करने के लिए आई-टी अधिनियम के अनुसार धारा 80 सी और अन्य टैक्स-ब्रेक का उपयोग कर सकते हैं। धारा 80 सी में निवेश करने के लिए जीवन बीमा,ulip,NSC(पोस्ट ऑफिस) ELSS जैसी योजनाएँ प्रमुख हैं।

 यह पोस्ट  हिंदी में पढ़ने के बाद ,आशा है आपको यह समझ आ गया होगा और आप समय पर ही अपना टैक्स सेविंग निवेश कर लेंगे। और हाँ, अपने नियोक्ता  को समय पर सभी सही दस्तावेज जमा करना याद रखिएगा।

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